अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. (फोटो: ब्लूमबर्ग)
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वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि सीआईए इस बात के ‘पुख्ता’ नतीजे पर नहीं पहुंची है कि पत्रकार जमाल खाशोगी की हत्या का आदेश किसने दिया, हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि एजेंसी के मुताबिक सऊदी क्राउन प्रिंस ने ही खाशोगी की हत्या का आदेश दिया था.

ट्रंप ने एक बयान में कहा कि सीआईए के पास खाशोगी की हत्या में क्राउन प्रिंस का हाथ होने का कोई पुख्ता सबूत नहीं है. उन्होंने कहा, ‘ऐसा हो सकता है कि क्राउन प्रिंस को इस त्रासदीपूर्ण घटना की जानकारी हो.. शायद ऐसा हो या शायद ऐसा न हो. इस बात के आधार पर कहा जा सकता है कि हमें खाशोगी की हत्या से जुड़े सभी तथ्यों की जानकारी शायद कभी नहीं होगी.’

कुल मिला कर ‘अमरीका पहले’ की नीति पर व्हाइट हाउस से जारी ट्रंप का वक्तव्य निहायत ही दिलचस्प है. उससे प्रतीत होता है कि अमरीका अपनी सऊदी अरब से रिश्तों पर कोई आंच आने नहीं देना चाहता चाहे इन में किसी हत्या का मामला क्यों न आड़े हाथों आ जाए.

कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट के कार्यकारी निदेशक जोएल साइमन कहते हैं, ‘अगर आप व्हाइट हाउस के वक्तव्य का निचोड़ निकालें तो, राष्ट्रपति ट्रंप ने ये ज़ोर देकर कहा है कि अगर आप अमरीका से धंधा करते हैं तो आपको पत्रकारों की हत्या करने की छूट है. ये सऊदी अरब और दुनिया को भयावह संदेश है.’

ट्रंप अपने वक्तव्य की शुरुआत में कहते हैं कि ‘दुनिया एक खतरनाक’ जगह है. फिर वो ईरान का उदाहरण देते हैं कि कैसे यमन में ईरान सऊदी के खिलाफ छद्म युद्ध लड़ रहा है और इराक के लोकतंत्र स्थापित करने की कोशिशों को विफल करने में जुटा है. ईरान ने कई अमरीकियों की जान ली है. वह खुलकर नारा लगाता है ‘डेथ टू अमेरिका’, ‘डेथ टू इस्राइल’ और वह आतंक को शह देने वाला दुनिया का प्रमुख देश है. यानि ईरान दुश्मन नंबर एक है.

वहीं सऊदी अरब यमन से सेना हटाने को तैयार है, कट्टर इस्लामिक आतंकवाद से निपटने के लिए लड़ाई में सबसे आगे है. यानी माना जाए की वो दोस्त नंबर एक है.

पर इसके बाद ट्रंप मुद्दे पर आते हैं. सऊदी ने अमरीका में 450 बिलियन डॉलर खर्च और निवेश करने का मन बनाया है. ट्रंप कहते हैं कि ये रिकॉर्ड पैसा है इससे कई हज़ार नौकरियां उत्पन्न होंगी. इस धन में से 110 बिलियन डॉलर सैन्य उपकरण खरीद में इस्तेमाल होगा. ‘ये मुर्खता होगी अगर हम ये कांट्रैक्ट खत्म करें.’ इसका फायदा रूस और चीन को होगा.

खाशोगी की हत्या को ‘भयंकर’ बताते हुए उन्होंने कहा कि उनका देश इसे माफ नहीं करेगा. यह हत्या करने वालों को कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए. गहन स्वतंत्र शोध के बाद इस जघन्य हत्या की विस्तृत जानकारी मिली है. ‘हमने 17 सऊदी लोगों पर प्रतिबंद लगा दिया है जिनपर खाशोगी को मारने के आरोप और उनके शरीर को नष्ट करने का आरोप है.’

सऊदी प्रतिनिधियों का कहना है कि खाशोगी देश का दुश्मन था और मुस्लिम ब्रदरहुड (जिसे सऊदी समेत कई सरकारें आतंकवादी संगठन मानती हैं) का सदस्य था. ट्रंप कहते हैं कि ‘उनका (सऊदी समर्थन का) निर्णय इसपर आधारित नहीं था. किंग सलमान और क्राउन प्रिंस मोहमद बिन सलमान इस हत्या की किसी भी योजना या कार्यान्वयन की जानकारी से इंकार करते हैं. हमारी गुप्तचर एजेंसियां सभी सूचनाएं एकत्रित कर रहीं हैं. पर संभव है कि क्राउन प्रिंस को इस त्रासद घटना के बारे में कुछ न पता हो. शायद ऐसा हो या शायद ऐसा न हो.’

ट्रंप का कहना था कि खाशोगी की हत्या के सभी तथ्य कभी सामने नहीं आएंगे पर अमरीका का रिश्ता सऊदी अरब के साथ है. वे हमारे ईरान के खिलाफ अच्छे सहयोगी रहे हैं. इस्राइल और सऊदी और अन्य सहयोगियों के साथ हम दुनिया से आतंकवाद के खतरे के खात्मे का काम करेंगे.

ट्रंप का कहना था कि कांग्रेस में राजनीतिक या दूसरे कारणों से शायद सासंद दूसरी दिशा में जाना चाहें. वे इसके लिए स्वतंत्र हैं.

ट्रंप ने फिर सऊदी अरब को अमरीका के बाद सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश बताया और कहा कि ‘उन्होंने मेरे साथ काम किया है और मेरी तेल कीमत को कम रखने की मांग को माना है – ये दुनिया के लिए बहुत ज़रूरी है. अमरीका के राष्ट्रपति होने के नाते मैं ये सुनिश्चित करना चाहता हूं कि इस खतरनाक दुनिया में अमरीका के राष्ट्रहित साधे जाएं और जो देश हमारा बुरा चाहते हैं उनका सामना करें. आसान शब्दों में इसे अमरीका फर्स्ट कहते है.’

ट्रंप प्रशासन के सऊदी प्रशासन और खासकर उसके युवराज के समर्थन में खड़े होने पर तीखी टिप्पणियां आ रही हैं. विपक्षियों के तीखे हमलों मसलन व्हाइट हाउस का वक्तव्य सऊदी पीआर एजेंसी द्वारा लिखा वक्तव्य दिखता है. प्रतिक्रियाएं आ रही हैं कि ‘तेल के लिए सब माफ’. अमेरीका फर्स्ट एजेंडा वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार ‘मानवाधिकार के ऊपर अर्थनीति’ को रखना बताया.


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