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Sunday, 24 May, 2026
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कॉम्प्रिहेंसिव, स्पेशल, प्रिविलेज्ड: भारत की विदेश नीति में इन शब्दों का क्या मतलब है?

भारत के 30 से ज़्यादा देशों और ग्रुप्स के साथ स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप फ्रेमवर्क हैं, जिनमें कुछ कैटेगरी एक ही देश के लिए रिज़र्व हैं, जो इन रिश्तों की बहुत ज़्यादा अहमियत को दिखाता है.

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नई दिल्ली: इस हफ्ते भारत ने साइप्रस, इटली और नॉर्डिक देशों के साथ अपने रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया. शुक्रवार को नई दिल्ली में जारी संयुक्त बयान में भारत और साइप्रस ने अपने रिश्तों को ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ तक बढ़ाने की घोषणा की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इससे दोनों देशों के रिश्तों को “नई महत्वाकांक्षा और नई गति” मिलेगी.

पिछले एक दशक में नई दिल्ली ने रक्षा और तकनीक, व्यापार, कनेक्टिविटी और ऊर्जा सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में अलग-अलग देशों के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारियां बढ़ाई हैं.

पिछले बुधवार पीएम मोदी की यात्रा के दौरान भारत और नॉर्डिक देशों ने ओस्लो में हुए तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में अपने रिश्तों को ‘ग्रीन टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ तक बढ़ाने का फैसला किया.

एक दिन बाद पीएम मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने भारत-इटली संबंधों को ‘स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ तक बढ़ाया. इसके साथ रक्षा, नवाचार, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और समुद्री क्षेत्र में सहयोग का रोडमैप पेश किया गया. इससे पहले दोनों देशों के बीच सिर्फ रणनीतिक साझेदारी थी.

अब तक भारत के पास सिर्फ साउथ कोरिया के साथ ही स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप थी.

16 मई को हेग में पीएम मोदी और नीदरलैंड के प्रधानमंत्री रॉब जेटन के बीच बातचीत के दौरान भारत और नीदरलैंड्स ने भी अपने रिश्तों को औपचारिक रूप से स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ा दिया.

उससे पहले 7 मई को राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के दौरान भारत और वियतनाम ने अपने रिश्तों को ‘एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ तक बढ़ाया. इससे दोनों देशों के बीच रक्षा, आर्थिक और भू-राजनीतिक सहयोग में बड़े विस्तार का संकेत मिला.

भारत की रणनीतिक साझेदारियों को अलग-अलग स्तरों में बांटा गया है. इनमें कॉम्प्रिहेंसिव ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप, स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप, स्पेशल स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप और कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप शामिल हैं.

दो देशों के रिश्तों को दिए जाने वाले नाम कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक होते हैं. इसलिए अलग-अलग देशों ने अपने रिश्तों की प्रकृति बताने के लिए अलग-अलग स्तर और शब्द बनाए हैं.

कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप का मतलब आमतौर पर कई क्षेत्रों में व्यापक सहयोग होता है, लेकिन उसमें रणनीतिक पहलू बहुत मजबूत नहीं होता. वहीं स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप आम तौर पर रक्षा, सुरक्षा या उन्नत तकनीक जैसे खास क्षेत्रों में गहरे सहयोग को दिखाती है.

कुछ देश इन दोनों अवधारणाओं को मिलाकर “कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” कहते हैं. इसका मतलब होता है कि कई क्षेत्रों में व्यापक सहयोग के साथ-साथ अहम रणनीतिक क्षेत्रों में गहरा तालमेल भी हो.

“एन्हांस्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” या “स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” जैसे शब्द और भी ऊंचे स्तर के कूटनीतिक रिश्तों को दिखाते हैं.

किसी रणनीतिक साझेदारी का असली मतलब इस बात से तय होता है कि उसके तहत कितना वास्तविक सहयोग हो रहा है. कुछ साझेदारियों में रक्षा सहयोग, बड़े आर्थिक प्रोजेक्ट और संस्थागत राजनीतिक बातचीत जैसे ठोस कदम शामिल होते हैं.

जबकि कुछ साझेदारियों को सिर्फ प्रतीकात्मक कूटनीतिक कदम माना जाता है, जिनका मकसद दोस्ती, तालमेल या साझा इरादे दिखाना होता है, भले ही वास्तविक सहयोग सीमित हो.

बड़ी ताकतों — यूनाइटेड स्टेट्स, चीन, रूस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम — में भारत की चीन को छोड़कर सभी के साथ रणनीतिक साझेदारी है. पिछले दशकों में भारत और चीन के रिश्ते कई उच्च स्तरीय कूटनीतिक बैठकों के जरिए बढ़े और बदले हैं.

Infographics: Deepakshi Sharma/ThePrint
इन्फ़ोग्राफ़िक्स: दीपाक्षी शर्मा/दिप्रिंट

2005 में भारत और चीन ने ‘स्ट्रैटेजिक एंड कोऑपरेटिव पार्टनरशिप फॉर पीस एंड प्रॉस्पेरिटी’ पर हस्ताक्षर किए थे. सितंबर 2014 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने रिश्तों को “क्लोजर डेवलपमेंटल पार्टनरशिप” का नाम दिया.

लेकिन 2020 में सीमा पर सैन्य झड़पों के बाद भारत-चीन के रिश्ते तेजी से बिगड़ने लगे. इन झड़पों में दोनों तरफ जानें गई थीं. इसके बाद दोनों देशों ने भरोसा बहाल करने के कई कदम उठाए.

इसी पृष्ठभूमि में यह समझना जरूरी है कि भारत अलग-अलग देशों के साथ किस तरह की साझेदारियां रखता है और उनका मतलब क्या है.

कॉम्प्रिहेंसिव ग्लोबल एंड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप

कॉम्प्रिहेंसिव ग्लोबल एंड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप एक ऐसा कूटनीतिक ढांचा है, जिसमें सिर्फ व्यापार या रक्षा ही नहीं बल्कि राजनीति, अर्थव्यवस्था, रणनीति, तकनीक, संस्कृति और सुरक्षा जैसे वैश्विक स्तर के कई क्षेत्रों में सहयोग शामिल होता है.

भारत के पास फिलहाल सिर्फ अमेरिका के साथ CGSP है. इसमें रक्षा, महत्वपूर्ण तकनीक, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा, व्यापार और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा सहयोग शामिल हैं. इस पर आधिकारिक रूप से 25 फरवरी 2020 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान साइन हुए थे.

2024 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और पीएम मोदी ने कहा था कि यह साझेदारी 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण गठबंधनों में से एक बन चुकी है. इसकी वजह साझा लोकतांत्रिक मूल्य और रक्षा, तकनीक, स्वच्छ ऊर्जा और वैश्विक शासन जैसे क्षेत्रों में बढ़ता सहयोग है.

दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों, सेमीकंडक्टर, अंतरिक्ष, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा सप्लाई चेन में बढ़ते सहयोग पर भी जोर दिया. यह सहयोग आईसीईटी यानी ‘इनिशिएटिव ऑन क्रिटिकल एंड इमर्जिंग टेक्नोलॉजी’ जैसे कार्यक्रमों के तहत हो रहा है.

उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रक्षा उत्पादन, नवाचार, सैन्य तालमेल और बढ़ते सैन्य सहयोग पर भी बात की.

हालांकि ट्रंप प्रशासन 2.0 के दौरान इस रिश्ते में तनाव भी आया है. ट्रंप ने भारत पर ऊंचे व्यापार शुल्क लगाए हैं और अब उन्हें पाकिस्तान, खासकर पाकिस्तान सेना प्रमुख आसिम मुनीर के करीब माना जा रहा है.

लगातार दो साल से भारत उस क्वाड शिखर सम्मेलन का आयोजन नहीं कर पाया, जिसकी अध्यक्षता उसके पास थी, क्योंकि राष्ट्रपति ट्रंप और उनसे पहले जो बाइडेन बैठक में शामिल होने भारत नहीं आए.

स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप

यह साझेदारी का सबसे ऊंचा स्तर है और फिलहाल सिर्फ रूस के साथ है.

अक्टूबर 2000 में “डिक्लेरेशन ऑन द इंडिया-रूस स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों देशों के रिश्ते राजनीति, सुरक्षा, रक्षा, व्यापार, विज्ञान और तकनीक, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों जैसे क्षेत्रों में बढ़े हैं.

दिसंबर 2010 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान इस रिश्ते को ‘स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ तक बढ़ाया गया. इसके साथ राजनीतिक और सरकारी स्तर पर कई स्थायी संवाद तंत्र भी बनाए गए.

भारत-रूस रिश्तों में रक्षा सहयोग सबसे अहम आधार बना हुआ है. दोनों देशों ने सैन्य-तकनीकी सहयोग समझौते को 2031 तक बढ़ा दिया है.

Infographics: Deepakshi Sharma/ThePrint
इन्फ़ोग्राफ़िक्स: दीपाक्षी शर्मा/दिप्रिंट

दोनों देश 2030 तक भारत-रूस आर्थिक सहयोग के रणनीतिक क्षेत्रों के विकास कार्यक्रम के तहत व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी काम कर रहे हैं. साथ ही भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में भी कोशिशें चल रही हैं.

स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप

भारत की किसी पश्चिमी देश के साथ पहली रणनीतिक साझेदारी फ्रांस के साथ थी, जिसे 26 जनवरी 1998 को औपचारिक रूप दिया गया.

फरवरी 2026 में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इम्पैक्ट समिट के दौरान भारत और फ्रांस ने अपने रिश्तों को ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ तक बढ़ाया.

25 साल के रणनीतिक सहयोग और होराइजन 2047 रोडमैप के आधार पर दोनों देशों ने रक्षा, नागरिक परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बहुपक्षीय सहयोग जैसे क्षेत्रों में रिश्ते और मजबूत करने पर सहमति जताई.

स्पेशल स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप

भारत और जापान ने सितंबर 2014 में पीएम मोदी की टोक्यो यात्रा के दौरान अपने रिश्तों को स्पेशल स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप तक बढ़ाया.

इस समझौते को तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के साथ जारी टोक्यो घोषणा के जरिए औपचारिक रूप दिया गया.

यह 2006 में बनी “स्ट्रैटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप” का उन्नत रूप था. इसमें रक्षा, सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, कनेक्टिविटी, तकनीक और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे क्षेत्रों में सहयोग का ढांचा तैयार किया गया.

स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप है. इसका मुख्य आधार तकनीकी सहयोग, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, जहाज निर्माण और रक्षा संबंध हैं.

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच यह साझेदारी 18 मई 2015 को पीएम मोदी की सियोल यात्रा के दौरान आधिकारिक रूप से स्थापित हुई थी.

इसी हफ्ते इटली दूसरा देश बन गया, जिसके साथ भारत ने रिश्तों को स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के स्तर तक बढ़ाया है.

कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप

यूरोप में भारत ने यूनाइटेड किंगडम और पोलैंड के साथ रिश्तों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया है. वहीं जर्मनी और नीदरलैंड्स के साथ भारत अब भी स्ट्रैटेजिक पार्टनर बना हुआ है.

दक्षिण-पूर्वी यूरोप में ग्रीस के साथ भारत ने अगस्त 2023 में रिश्तों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया. इससे कनेक्टिविटी, समुद्री सहयोग, सुरक्षा और व्यापार में बढ़ते तालमेल को दिखाया गया.

भारत और यूनाइटेड किंगडम ने 2004 में अपनी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप शुरू की थी, जिसे मई 2021 में कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया गया.

भारत और जर्मनी के बीच लंबे समय से स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप है. यह औद्योगिक सहयोग, हरित ऊर्जा, उन्नत मैन्युफैक्चरिंग और कौशल विकास पर आधारित है.

भारत और जर्मनी ने 2022 में रिश्तों को ग्रीन एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट पार्टनरशिप यानी GSDP तक बढ़ाया, ताकि जलवायु कार्रवाई, नवीकरणीय ऊर्जा और टिकाऊ शहरीकरण में सहयोग किया जा सके.

इंडो-जर्मन ग्रीन एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट पार्टनरशिप पर 2 मई 2022 को आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर हुए. यह समझौता बर्लिन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज ने छठी इंडो-जर्मन इंटरगवर्नमेंटल कंसल्टेशन के दौरान किया.

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत और एसोसिएशन ऑफ साउथईस्ट एशियन नेशंस ने 2022 में रिश्तों को ASEAN-इंडिया कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया.

उसी साल ASEAN-इंडिया ईयर ऑफ फ्रेंडशिप भी मनाया गया, जो दोनों के बीच 30 साल के संवाद संबंधों की याद में था. यह बढ़ोतरी भारत की एक्ट ईस्ट नीति और क्षेत्रीय जुड़ाव के बढ़ते महत्व को दिखाती है.

भारत के अलावा इस सहयोग में सिंगापुर, इंडोनेशिया, वियतनाम और मलेशिया भी शामिल हैं.

भारत और सिंगापुर के बीच नवंबर 2015 में बनी स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप को सितंबर 2024 में पीएम मोदी की यात्रा के दौरान कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया गया.

भारत और इंडोनेशिया के बीच कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप है. इसमें समुद्री सुरक्षा, कनेक्टिविटी, रक्षा और इंडो-पैसिफिक सहयोग शामिल हैं.

यह रिश्ता पहली बार 2018 में पीएम मोदी की जकार्ता यात्रा के दौरान बढ़ाया गया था. जनवरी 2025 में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बने, जिसके बाद दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत हुए.

अगस्त 2024 में मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की भारत यात्रा के दौरान भारत और मलेशिया ने रिश्तों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया.

अफ्रीकी देश

अफ्रीका में भारत ने मिस्र और तंजानिया के साथ रिश्तों को बढ़ाया.

जनवरी 2023 में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी की भारत यात्रा के दौरान नई दिल्ली और काहिरा ने रिश्तों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया.

इस कदम से राजनीति, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, तकनीक, रक्षा, सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी क्षेत्रों में लंबे समय के सहयोग को संस्थागत रूप दिया गया.

भारत और तंजानिया ने 9 अक्टूबर 2023 को राष्ट्रपति सामिया सुलुहु हसन की भारत यात्रा के दौरान रिश्तों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया. इसमें समुद्री, रक्षा और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया.

पश्चिम अफ्रीका में भारत और नाइजीरिया ने 2007 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की यात्रा के दौरान औपचारिक रूप से स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप स्थापित की.

यह साझेदारी अबुजा डिक्लेरेशन को अपनाने के साथ शुरू हुई, जिसने दोनों देशों के रिश्तों को नए स्तर तक पहुंचाया.

खाड़ी देशों के साथ रिश्ते

खाड़ी क्षेत्र में भारत ने कुवैत के साथ रिश्तों को बढ़ाया, संयुक्त अरब अमीरात के साथ कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की, कतर के साथ स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की और सऊदी अरब के साथ स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप काउंसिल समझौता किया.

भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने 2017 में तब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत यात्रा के दौरान कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप पर हस्ताक्षर किए. वह भारत के 68वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि थे.

दिसंबर 2024 में पीएम मोदी की कुवैत यात्रा के दौरान भारत-कुवैत रिश्तों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया गया. इसका मकसद राजनीति, व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, संस्कृति, शिक्षा, तकनीक और लोगों के बीच संबंध मजबूत करना है.

कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी की भारत यात्रा के दौरान 18 फरवरी 2025 को नई दिल्ली में द्विपक्षीय स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप समझौते पर हस्ताक्षर हुए. इसका मकसद राजनीति, व्यापार, ऊर्जा, निवेश, सुरक्षा, संस्कृति और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाना है.

29 अक्टूबर 2019 को पीएम मोदी की रियाद यात्रा के दौरान भारत और सऊदी अरब ने स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप काउंसिल समझौते पर हस्ताक्षर किए.

इस समझौते के तहत एक उच्च स्तरीय संस्थागत व्यवस्था बनाई गई, ताकि राजनीति, अर्थव्यवस्था, व्यापार, सुरक्षा, सैन्य और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जा सके. इसका मकसद दोनों देशों के विकास लक्ष्यों में तालमेल और रणनीतिक भरोसा मजबूत करना भी है.

एशियाई तालमेल

पश्चिम एशिया में भारत और इज़राइल ने जुलाई 2017 में पीएम मोदी की यात्रा के दौरान रिश्तों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया. इसका मकसद विकास, नवाचार, साइबर सुरक्षा, उद्यमिता, रक्षा, कृषि और उन्नत तकनीक में सहयोग बढ़ाना है.

नवंबर 2008 में भारत और ओमान के रिश्तों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया गया.

भारत और ईरान ने 2003 में नई दिल्ली घोषणा पर हस्ताक्षर के साथ अपने रिश्तों को रणनीतिक ढांचे में बदला. इससे पहले 2001 में तेहरान घोषणा हुई थी. इसमें राजनीति, अर्थव्यवस्था, ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी.

मध्य एशिया में भारत और कजाकिस्तान ने 2009 में तत्कालीन राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरबायेव की भारत यात्रा के दौरान स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप स्थापित की.

भारत और उज़्बेकिस्तान ने 2011 में आधिकारिक रूप से स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप स्थापित की.

भारत और ताजिकिस्तान ने 2012 में राष्ट्रपति इमोमाली रहमोन की भारत यात्रा के दौरान रिश्तों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया.

भारत और तुर्कमेनिस्तान ने अप्रैल 2022 में अश्गाबात में हुई शिखर बैठक के दौरान रिश्तों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया.

भारत और मंगोलिया ने 2015 में रिश्तों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया. इसकी घोषणा 17 मई 2015 को पीएम मोदी की उलानबटार यात्रा के दौरान हुई. उसी साल दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों के 60 साल भी पूरे हुए थे.

दक्षिण एशिया में भारत ने सिर्फ भूटान और बांग्लादेश के साथ रिश्तों को बढ़ाया.

नवंबर 2025 में पीएम मोदी की थिम्फू यात्रा के दौरान भारत और भूटान ने अपने पुराने रिश्तों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया.

22 जून 2024 को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत यात्रा के दौरान भारत और बांग्लादेश ने रिश्तों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया. इसे “इंडिया-बांग्लादेश शेयर्ड विज़न फॉर फ्यूचर” दस्तावेज जारी करके औपचारिक रूप दिया गया.

नेपाल के साथ भारत के करीबी रणनीतिक रिश्तों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक ले जाने की कोशिश हुई थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.

भारत और श्रीलंका ने 9 जून 2010 को तत्कालीन राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे की यात्रा के दौरान औपचारिक रूप से स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप स्थापित की.

भारत-अफगानिस्तान स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप 4 अक्टूबर 2011 को नई दिल्ली में समझौते पर हस्ताक्षर के बाद औपचारिक रूप से शुरू हुई. भारत ऐसा समझौता करने वाला पहला देश बना था.

प्रिविलेज्ड पार्टनरशिप

भारत और मेक्सिको ने 2007 में मेक्सिको के राष्ट्रपति फेलिपे काल्डेरोन की भारत यात्रा के दौरान “प्रिविलेज्ड पार्टनरशिप” स्थापित की.

बाद में 2016 में पीएम मोदी की मेक्सिको यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रिश्तों को “स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप” तक बढ़ाने पर सहमति जताई.

एन्हांस्ड पार्टनरशिप

एशिया में ही भारत और ब्रुनेई ने सितंबर 2024 में पीएम मोदी की यात्रा के दौरान रिश्तों को एन्हांस्ड पार्टनरशिप तक बढ़ाया.

दक्षिण अमेरिका में भारत और ब्राज़ील के बीच ग्लोबल साउथ सहयोग और बहुपक्षीय भागीदारी के ढांचे के तहत स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप है.

ओशिनिया क्षेत्र में भारत और ऑस्ट्रेलिया ने 2020 में रिश्तों को कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया. इससे पहले 2009 में दोनों देशों के बीच स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप बनी थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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