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Tuesday, 23 July, 2024
होमरिपोर्ट'सौर ऊर्जा, ई-कार्ट, रिसाइक्लिंग', ग्रीन महाबलीपुरम भारतीय हेरिटेज स्थलों के लिए बेहतरीन उदाहरण हैं

‘सौर ऊर्जा, ई-कार्ट, रिसाइक्लिंग’, ग्रीन महाबलीपुरम भारतीय हेरिटेज स्थलों के लिए बेहतरीन उदाहरण हैं

महाबलीपुरम तट मंदिर को ‘भारत का पहला हरित पुरातात्विक स्थल’ होने का गौरव प्राप्त है. अब, तमिलनाडु के अन्य धरोहर स्थल भी इसका अनुसरण कर सकते हैं.

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चेन्नई: भीषण गर्मी का सामना करते हुए, 43 वर्षीय राजलक्ष्मी अपनी इलेक्ट्रिक बग्गी को पत्थर की पगडंडियों पर चलाते हुए पर्यटकों को 1200 साल पुराने महाबलीपुरम तट मंदिर तक ले जाती हैं. तमिलनाडु का पोस्टकार्ड हेरिटेज मंदिर अब पूरी तरह से हरियाली से भरा है, जो भारत में किसी पुरातात्विक स्थल के लिए पहली बार है.

यह मंदिर, जहाँ हर दिन लगभग 8,000 आगंतुक आते हैं, अब सौर ऊर्जा से जगमगाता है. इसका बगीचा, जिसमें 50 देसी पौधे हैं, रिसाइकिल किए गए पानी पर लहलहाता है. मंदिर परिसर के भीतर तीन स्थानों पर पीने के पानी की आपूर्ति करने वाला इन-हाउस वॉटर प्यूरीफायर है. इलेक्ट्रिक बग्गी यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल पर सुगम, उत्सर्जन-मुक्त पर्यटन प्रदान करती है.

ये पर्यावरण-अनुकूल (ईको-फ्रेंडली) पहल चेन्नई स्थित गैर-लाभकारी संस्था (एनजीओ) हैंड इन हैंड इंडिया द्वारा ग्रीन हेरिटेज प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं. इसे रेनॉ निसान टेक्नोलॉजी एंड बिजनेस सेंटर इंडिया (RNTBCI) द्वारा वित्त पोषित किया गया है और इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का संरक्षण प्राप्त है.

हैंड इन हैंड इंडिया के उपाध्यक्ष जी कन्नन ने कहा, “हम स्मारक का पर्यावरण-अनुकूल तरीके से जीर्णोद्धार करना चाहते थे. इसलिए, हमने आरएनटीबीसीआई के समक्ष यह विचार रखा और वे अपने सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व) पहल के तहत इसे निधि देने के लिए सहमत हो गए. फिर हमने सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक की. उन्होंने भी इसे स्वीकार कर लिया.”

कन्नन ने कहा कि उनके संगठन ने इसकी विशिष्टता की ओर लोगों का ध्यान खींचने के लिए “भारत का पहला हरित पुरातात्विक स्थल” का टैग गढ़ा.

महाबलीपुरम मंदिर परिसर में ग्रीन हेरिटेज प्रोजेक्ट के तहत लगाया गया पानी का नल | फोटो: अनीसा पीए | दिप्रिंट

इस बीच, एएसआई के महाबलीपुरम उपमंडल में संरक्षण सहायक डी श्रीधर के अनुसार, अन्य स्थानीय गैर सरकारी संगठन यानि एनजीओ भी विरासत स्थलों के लिए हरित परियोजनाओं की योजना बना रहे हैं.

उन्होंने कहा कि अब तक एएसआई को महाबलीपुरम से लगभग 7 किलोमीटर दूर एक गांव सालवनकुप्पम में टाइगर गुफा और कांचीपुरम जिले में एक अन्य स्मारक के जीर्णोद्धार के लिए प्रस्ताव मिले हैं.

चेन्नई से लगभग 60 किमी दूर स्थित, पल्लव राजवंश द्वारा 725 ई. में निर्मित महाबलीपुरम मंदिर अपनी जटिल ग्रेनाइट वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है और तमिलनाडु के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है.

हालांकि ‘ग्रीन’ टैग ने पर्यटकों की संख्या में बहुत अधिक वृद्धि नहीं की है, लेकिन इस पहल ने बिजली की खपत में कटौती, भरपूर पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और सुविधाजनक परिवहन विकल्प प्रदान करके मंदिर प्रबंधन और आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाया है.


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सौर ऊर्जा, बैठने की जगह, सेल्फी प्वाइंट

2021-2022 में ताजमहल की तुलना में अधिक विदेशी पर्यटकों ने महाबलीपुरम मंदिर का दौरा किया, जिससे इसकी विज़िटर सुविधाओं को ‘विश्व स्तरीय’ मानकों पर अपग्रेड करने पर ध्यान केंद्रित किया गया.

कन्नन ने कहा कि मंदिर को पारिस्थितिक रूप से पुनर्निर्मित करने का निर्णय कई विरासत स्थलों के प्रबंधन के लिए एएसआई के सीमित धन से उपजा है. शुरुआत में, योजना केवल 1 करोड़ रुपये के बजट के साथ एक सौर ऊर्जा प्रणाली को लागू करने की थी. लेकिन अंततः, अधिक घटक जोड़े गए, जिससे खर्च बढ़कर 2.6 करोड़ रुपये हो गया. यह परियोजना 2020 में शुरू हुई और 2023 में पूरी हुई.

मार्च में हैंड इन हैंड इंडिया द्वारा एएसआई को सौंपी गई परियोजना की पूर्णता रिपोर्ट के अनुसार, टीम ने 10 किलोवाट क्षमता वाले तीन सौर संयंत्र स्थापित किए, जिससे फरवरी 2023 और मार्च 2024 के बीच 25,200 किलोवाट ऊर्जा की बचत हुई. कन्नन ने कहा कि हालांकि मंदिर हर दिन लगभग 18 किलोवाट ऊर्जा की खपत करता है, लेकिन 30 किलोवाट की स्थापना भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए की गई थी.

उन्होंने स्मारक परिसर के भीतर तीन स्थानों पर 500 लीटर प्रति घंटे (एलपीएच) पीने के पानी का संयंत्र भी स्थापित किया. संयंत्र द्वारा उत्पन्न अपशिष्ट जल का उपयोग एक बगीचे में पानी देने के लिए किया जाता है, जहां 50 बादाम के पेड़ लगाए गए हैं. एनजीओ का दावा है कि जल संयंत्र ने परिसर में प्लास्टिक की बोतलों के कचरे को भी कम किया है.

महाबलीपुरम मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक नया सेल्फी पॉइंट ग्रीन हेरिटेज प्रोजेक्ट की घोषणा करता है | फोटो: अनीसा पीए | दिप्रिंट

जहां तक ​​हरियाली की बात है, मंदिर परिसर से करीब 400 मीटर दूर पौधे उगाए जा रहे हैं, क्योंकि मुख्य परिसर के अंदर पेड़ लगाने की अनुमति नहीं है. कन्नन ने कहा कि प्रवेश द्वार से दृश्य को बाधित करने से बचने के लिए मंदिरों के सामने पेड़ न लगाने के दिशा-निर्देश हैं.

अन्य नई फेसिलिटीज़ पर्यटन को और अधिक मनोरंजक बनाने के लिए तैयार की गई हैं.

स्थानीय महिलाओं द्वारा संचालित सौर ऊर्जा से चलने वाली तीन बग्गियां बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और दिव्यांग लोगों के लिए मुफ्त परिवहन प्रदान करती हैं. संगठन ने परिसर में बेंच और प्रवेश द्वार पर नौ बोलार्ड भी लगाए हैं, साथ ही युवा पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए एक सेल्फी प्वाइंट भी बनाया है.

राजलक्ष्मी हैंड इन हैंड इंडिया द्वारा जमीनी कार्यों के लिए नियोजित चार स्थानीय महिलाओं में से एक हैं. महिलाओं ने पहले बगीचे और बुनियादी ढांचे के रखरखाव से लेकर परियोजना के पूरा होने तक बग्गी चलाने तक सब कुछ मैनेज किया. इसके बाद, एएसआई कर्मचारियों ने रखरखाव का काम संभाला, जबकि राजलक्ष्मी और उनकी टीम ने बग्गी चलाना जारी रखा.

राजलक्ष्मी महाबलीपुरम मंदिर परिसर में ई-कार्ट चालक के रूप में कार्यरत हैं। फोटो: अनीसा पीए | दिप्रिंट

राजलक्ष्मी ने कहा कि उन्हें एक कठोर भर्ती प्रक्रिया के बाद चुना गया, जिसमें उनके कम्युनिकेशन स्किल, ड्राइविंग और आने वाले विजिटर्स के साथ उचित व्यवहार का परीक्षण किया गया.

उन्होंने कहा, “पच्चीस महिलाओं ने परीक्षण में भाग लिया. अंग्रेजी और तमिल में दक्षता के साथ-साथ चार पहिया वाहन चलाने का लाइसेंस होना अनिवार्य था.” उन्होंने कहा कि परीक्षण के बाद 10 दिनों का प्रशिक्षण दिया गया, जिसके बाद उसके सहित चार महिलाओं का चयन किया गया.

तत्कालीन चेंगलपट्टू जिला कलेक्टर एआर राहुल नाथ द्वारा 2022 में उद्घाटन किया गया बग्गी संचालन, इस परियोजना को लागू करने में पहला कदम था. राजलक्ष्मी, जिन्हें हाल ही में एक पर्यवेक्षक के रूप में पदोन्नत किया गया था, ने कहा कि एनजीओ के अधिकारी महीने में एक बार या रखरखाव के काम के लिए आवश्यकतानुसार आते हैं.


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‘स्मारक खतरे में हैं’

एनजीओ ने ग्रीन हेरिटेज प्रोजेक्ट की कल्पना की और उसे लागू किया, लेकिन एएसआई ने शुरू से अंत तक इसकी देखरेख की. कन्नन ने कहा कि टीम ने महाबलीपुरम और चेन्नई में एएसआई अधिकारियों के दिशा-निर्देशों का ईमानदारी से पालन किया. एएसआई के डी श्रीधर ने इस पहल का स्वागत किया, उन्होंने कहा कि प्रदूषण, समुद्र के संपर्क और जलवायु परिवर्तन के कारण महाबलीपुरम के कई स्मारक खतरे में हैं. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर हम उनकी रक्षा नहीं करते हैं, तो वे अगले 10 से 20 वर्षों में नष्ट हो जाएंगे.”

एएसआई के डी श्रीधर ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि प्रदूषण, समुद्र के संपर्क और जलवायु परिवर्तन के कारण महाबलीपुरम के कई स्मारक खतरे में हैं. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर हम उनकी रक्षा नहीं करेंगे, तो वे अगले 10 से 20 वर्षों में नष्ट हो जाएंगे.”

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में वृक्षों की संख्या बढ़ाने से स्मारकों को हवा के दबाव और कार्बन उत्सर्जन से बचाने में मदद मिलेगी.

श्रीधर ने बताया कि एएसआई को अक्सर व्यापक परियोजनाओं के लिए धन की कमी का सामना करना पड़ता है, लेकिन वर्तमान में वह अन्य संगठनों के प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है, ताकि अन्य विरासत स्थलों को हरा-भरा बनाया जा सके.

लेकिन एएसआई अधिकारी ने सावधानी के तौर पर एक बात कही- रात में मंदिर को प्रकाश से जगमग करना, जो कि इस पहल का हिस्सा था, प्राचीन संरचनाओं को नुकसान पहुंचा सकता है.

इस बीच, कई स्थानीय दुकान मालिकों ने कहा कि वे सेल्फी प्वाइंट और मुख्य प्रवेश द्वार पर परियोजना के पूरा होने का संकेत देने वाले बोर्ड को छोड़कर ग्रीन हेरिटेज प्रोजेक्ट के बारे में नहीं जानते थे.

कन्नन ने कहा कि एनजीओ का इस परियोजना के माध्यम से पर्यटकों की संख्या बढ़ाने का इरादा नहीं था और उसने इसकी मार्केटिंग भी नहीं की. हालांकि, इसने परियोजना निष्पादन अवधि के दौरान छात्रों, स्वयंसेवकों और राजनेताओं को शामिल करते हुए कई जागरूकता अभियान चलाए. उन्होंने कहा, “हमारा विचार स्मारक को हरा-भरा और स्वच्छ बनाना है. और पर्यटकों को अच्छा अनुभव प्रदान करना है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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