Monday, 27 June, 2022
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राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र बोले- करौली में हुई हिंसा एक सोची-समझी साजिश

राज्यपाल कलराज मिश्र ने करौली में ‘सांप्रदायिक तनाव पर काबू पाने के लिए त्वरित कार्रवाई’ करने को लेकर पुलिस की सराहना की, साथ ही कहा कि राजस्थान सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.

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नई दिल्ली: राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र का कहना है कि करौली हिंसा जैसी घटनाएं ‘पूर्वनियोजित साजिश के बिना नहीं हो सकतीं हैं.’ साथ ही उम्मीद जताई है कि दोषियों को जल्द से जल्द दंडित किया जाएगा.

उन्होंने दिप्रिंट को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘जिस तरह पथराव किया गया, उससे लगता है कि यह (हिंसा) अचानक नहीं भड़की, बल्कि राजस्थान में सांप्रदायिक सद्भाव की सोची-समझी साजिश थी. मुझे उम्मीद है कि दोषियों को जल्द से जल्द दंडित किया जाएगा.’ साथ ही उन्होंने ‘टकराव बढ़ने से रोकने में परिपक्वता दिखाने’ के लिए राज्य पुलिस की सराहना भी की.

राज्यपाल की यह टिप्पणी राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के उपनेता राजेंद्र राठौर के बयान जैसी ही है, जिन्होंने मंगलवार को कहा था कि राज्य के करौली शहर में शनिवार 2 अप्रैल को भड़की हिंसा सुनियोजित थी.

गौरतलब है कि हिंदूवादी संगठनों की तरफ से हिंदू नव वर्ष के उपलक्ष्य में शनिवार को एक बाइक रैली निकाली गई थी जिसमें हिस्सा लेने वालों ने कथित तौर पर भड़काऊ नारेबाजी की. इस दौरान मुस्लिम बहुल इलाके से गुजरते समय रैली में शामिल लोगों को पर कथित तौर पर पथराव किया गया. इसके बाद भड़की हिंसा में दोनों पक्षों के करीब 35 लोग घायल हुए और कई दुकानों और वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया.

इस मामले में 50 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है या हिरासत में लिया गया है और इलाके में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं. कर्फ्यू भी लगाया गया था, लेकिन बाद में इसमें आंशिक रूप से ढील दी गई है.

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यह पूछने पर कि क्या उन्होंने करौली की घटना में कोई पैटर्न देखा, कलराज मिश्र ने कहा, ‘पिछले दो-तीन सालों में ऐसी कोई घटना नहीं हुई है, इसलिए कोई पैटर्न नहीं दिख सकता है. लेकिन इस घटना ने पुलिस को और सतर्क कर दिया है. और राज्य सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.’

मामले की पड़ताल के लिए मंगलवार को करौली का दौरा करने वाली भाजपा की ‘फैक्ट फाइंडिग टीम’ में शामिल रहे राठौर ने आरोप लगाया है कि मुस्लिम संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को एक पत्र के माध्यम से ‘चेताया’ था कि 2 अप्रैल से 4 अप्रैल तक राज्य में तनाव भड़क सकता है.

माना जा रहा है कि यह पत्र बाइक रैली से पहले भेजा गया था.

राजस्थान में पीएफआई के अध्यक्ष मोहम्मद आसिफ ने पूर्व में दिप्रिंट को बताया था कि ‘राज्य के मुख्यमंत्री और डीजीपी को पत्र भेजकर यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया था कि विभिन्न जिलों में रैली के दौरान आपत्तिजनक नारे न लगाए जाएं क्योंकि इससे सांप्रदायिक तनाव फैल हो सकता है और बाहरी असामाजिक तत्व सांप्रदायिक टकराव की कोशिश कर सकते हैं.

पुलिस की ओर से संभावित लापरवाही के बारे में पूछे गए एक सवाल पर, राज्यपाल ने कहा, ‘तमाम लोग पुलिस कार्रवाई के बारे में बहुत-सी बातें कहते हैं. लेकिन, मेरे विचार से उसने सांप्रदायिक झड़प पर काबू पाने के लिए तुरंत कार्रवाई की. नहीं तो स्थिति और बिगड़ सकती थी. वहीं, जिस तरह एक पुलिसकर्मी ने झड़प के दौरान एक छोटे बच्चे को बचाया, उसकी मैं सराहना करता हूं. पुलिस की भूमिका पर टिप्पणी करते समय इस पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए.’

गौरतलब है कि करौली हिंसा के दौरान एक घर में आग लगने के बाद एक बच्चे सहित चार लोगों को बचाकर 31 वर्षीय कांस्टेबल नेत्रेश शर्मा सुर्खियों में आ गए थे. गोद में बच्चे के साथ उनकी एक तस्वीर वायरल हुई थी और उनके साहसिक कार्य के लिए मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने सराहना की है.

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने करौली मुद्दे पर मुख्यमंत्री गहलोत से बात की थी, कलराज मिश्र ने कहा, ‘मेरी वहां के हालात पर डीजीपी एम.एल. लाठर से बात हुई थी और उन्होंने मुझे पूरे घटनाक्रम का ब्योरा दिया. मैंने उनसे कहा कि हरसंभव प्रयास होना चाहिए कि सांप्रदायिक सौहार्द और न बिगड़े. लोगों के जीवन और संपत्ति की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है.’


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जुबानी जंग छिड़ी

करौली हिंसा को लेकर राजस्थान में सत्तासीन कांग्रेस और विपक्षी दल भाजपा के बीच पिछले कुछ दिनों से जुबानी जंग छिड़ी हुई है.

मुख्यमंत्री गहलोत ने सोमवार को इन झड़पों को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधा और इस माह के शुरू में भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा के राज्य के दौरे पर सवाल उठाए.

उन्होंने कहा था, ‘ये लोग…पूरे देश को आग में झोंक रहे हैं. नड्डा आए और आग लग गई. वे ऐसा माहौल बना रहे हैं.’

दूसरी तरफ, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनिया ने इस तरह की झड़पों के लिए कांग्रेस की कथित तुष्टीकरण वाली नीति को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा, ‘यह बाइक रैली पर एक सुनियोजित हमला था.’

पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की दिग्गज नेता वसुंधरा राजे ने कहा कि ‘राज्य में नफरती मानसिकता की अनुमति नहीं दी जा सकती.’ उन्होंने रमजान के दौरान मुस्लिम बहुल इलाकों में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के आदेश को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा.

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘राज्य में लोग केवल रमजान का ही पालन नहीं कर रहे हैं…इस भीषण गर्मी में नवरात्रि के उपवास भी कर रहे हैं. राज्य सरकार को जवाब देना चाहिए कि उसे केवल रमजान मनाने वालों की ही चिंता क्यों है, और राज्य के बाकी लोगों के बारे में क्यों नहीं है? यह तुष्टीकरण और वोटबैंक की राजनीति नहीं तो और क्या है?’

इस बीच, पुलिस ने करौली मामले में निर्दलीय पार्षद मकबूल अहमद को आरोपी बनाकर मामला दर्ज किया है. वह कथित तौर पर बाइक रैली के दौरान पथराव में शामिल था. जयपुर की मेयर सौम्या गुर्जर (भाजपा) के पति राजाराम गुर्जर की बाइक कथित तौर पर हिंसा स्थल पर पाए जाने के बाद उनके खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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