Sunday, 3 July, 2022
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भारत चीन गतिरोध पर बोले राजनाथ- भारतीय जवानों ने जहां शौर्य की जरूरत थी वहां शौर्य दिखाया

लद्दाख में चल रहे भारत चीन गतिरोध पर सदन में राजनाथ सिंह ने कहा, 'भारत की सीमाएं सुरक्षित हैं और हमारे जवान मातृभूमि की रक्षा में डटे हुए हैं.'

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नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच जारी पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में जारी गतिरोध पर मंगलवार को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भारत की स्थिति पर अपना पक्ष रखा. रक्षामंत्री सिंह ने कहा भारत चीन सीमा विवाद एक गंभीर मुद्दा है. रक्षामंत्री ने सदन को यह भी बताया कि किस तरह चीनी सैनिकों ने यथास्थिति को बदलने की एकतरफा कोशिश की.

राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना के शौर्य की तारीफ करते हुए कहा कि हम अपनी सीमा की सुरक्षा में सफल रहे हैं. उन्‍होंने कहा, ‘इस तनावभरे माहौल में हमारे बहादुर जवानों ने जहां संयम की जरूरत थी वहां संयम रखा तथा जहां शौर्य की जरुरत थी, वहां शौर्य प्रदर्शित किया.’

हालांकि सिंह ने यह भी कहा कि दोनों देश शांति पर सहमत हैं. शांतिपूर्ण तरीके से ही इसका हल भी निकलेगा. चीन ने कई बार अपने स्टेटस बदलने की कोशिशें की है लेकिन हमारे जवानों ने इसे असफल कर दिया है.

रक्षामंत्री ने लोकसभा में कहा, ‘अप्रैल के महीने में लद्दाख की सीमा पर चीन की सेना और हथियारों में बढोत्तरी देखी गई. चीन द्वारा हमारी पेट्रोंलिग में बाधा उत्पन्न की. इसी वजह से यह स्थिति बनी.’

सिंह ने कहा, ‘हमारे भारतीय बहादुर जवानों ने चीन की सेना को भारी क्षति पहुंचाई और अपनी सीमा की पूरी तरह से सुरक्षित भी की.’

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‘भारतीय जवानों ने जहां र्शार्य की जरुरत थी वहां शौर्य दिखाया जहां शांति की जरुरत थी वहां शांति रखी.’

रक्षा मंत्री ने कहा कि दोनों देश को यथास्थिति बनाए रखना चाहिए. शांति और सद्भाव सुनिश्चित करना चाहिए. लेकिन 29-30 अगस्त की रात में फिर चीन ने पैंगोंग में घुसने की कोशिश की लेकिन हमारे जवानों ने उनके सारे प्रयास विफल कर दिए.


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‘भारत की सीमाएं सुरक्षित हैं’

सदन में राजनाथ सिंह ने कहा, ‘भारत की सीमाएं सुरक्षित हैं और हमारे जवान मातृभूमि की रक्षा में डटे हुए हैं.’ कोविड की चुनौतीपूर्ण दौर में आईटीबीपी और सशस्त्र सेना की तैनाती तेजी से की गई है. बीते कई दशकों में चीन ने बड़े स्तर पर इन्फ्रास्ट्र्क्चर की गतिविधियां शुरु की है. इसके जवाब में हमारी सरकार ने भी बार्डर एरिया डिवेलपमेंट के बजट को बढ़ा दिया है.

सीमाई इलाके में काफी रोड और ब्रिज बने हैं. सैन्य बलों को बेहतर सपोर्ट भी मिला है.बॉर्डर एरिया में सैनिक ज्यादा अलर्ट रह सकते है. जरुरत पड़ने पर कार्रवाई भी कर सके है. सीमावर्ती इलाकों में विवादों का शांतिपूर्वक हल निकालने के लिए भारत प्रतिबद्ध है.

सिंह ने कहा, ‘मैंने चीन के रक्षामंत्री के सामने स्थिति को रखा है. यह भी कहा है कि इस मुद्दे का शांति से हल निकालना चाहते है. हमने ये भी स्पष्ट किया है कि भारत की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.’

रक्षामंत्री ने आगे कहा, ‘भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी चीन के विदेश मंत्री से कहा है कि अगर समझौते को माना जाए तो शांति बहाली रखी जा सकती है. हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है.’

सिंह ने कहा, ‘हमारे जवानों का जोश और हौसला बुलंद है. पीएम के जवानों के बीच जाने के बाद ये संदेश ​गया है कि भारत के सभी लोग जवानों के साथ खड़े है. अभी की स्थिति के अनुसार चीन ने एलएसी के अंदरूनी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सैनिक और गोला बारूद जमा कर रखे हैं.’

‘चीन की कार्रवाई के जवाब में हमारी सेना ने पूरी काउंटर तैनाती कर रखी है. भारतीय सेना के लिए विशेष अस्त्र-शस्त्र और गोला बारूद की पर्याप्त व्यवस्था की गई है. उनके रहने के तमाम बेहतर सुविधाएं दी गई हैं. लद्दाख में हम एक चुनौती के दौर से गुजर रहे हैं. हमें एक रिजोल्यूशन पारित करना चाहिए कि पूरा सदन जवानों के साथ खड़ा है.’


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लद्दाख में है चीन का भूमि पर कब्जा

रक्षामंत्री सिंह ने आगे कहा, ‘चीन मानता है कि ट्रैडिशनल लाइन के बारे में दोनों देशों की अपनी अलग-अलग व्याख्या है.’

सदन में बयान देते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और चीन 1950 और 60 के दशक में इस पर बात कर रहे थे लेकिन कोई भी हल नहीं निकल पाया है.

‘चीन ने लद्दाख में बहुत पहले कुछ भूमि पर कब्जा किया था, इसके अलावा पाकिस्तान ने चीन को पीओके की भी कुछ भूमि चीन को सौंप दी है.’ राजनाथ सिंह ने यह भी माना कि ये एक बड़ा मुद्दा है इसकी बातचीत और शांतिपूर्ण तरीके से ही हल निकाला जा सकता है. आज सीमा पर शांति बनाए रखना जरुरी है.एलएसी को लेकर दोनों देशों की अलग-अलग व्याख्याएं है. शांति बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच समझौते जरूरी है.

सिंह ने बताया. ‘चीन भारत की लगभग 38 हजार स्क्वॉयर किमी भूमि का अनाधिकृत कब्जा लद्दाख में किए हुए है. वहीं 1963 में एक तथा कथित बाउंड्री एग्रीमेंट के तहत पाकिस्तान ने पीओके की 5180 स्क्वॉयर किमी भारतीय भूमि अवैध तरीके से चीन को सौंप दी है. भारत और चीन दोनों ने ये औपचारिक तौर पर माना है कि बाउंड्री क्वेश्चन एक जटिल मुद्दा है. इसके समाधान के लिए धीरज की जरुरत है. इस इश्यू का फेयर, रीजनेबल और परस्पर स्वीकार्य समाधन, शांतिपूर्ण बातचीत से ही निकाला जाए.’

राजनाथ सिंह ने आगे कहा, 1988 के बाद भारत और चीन के​​ द्विपक्षीय संबंधों में विकास हुआ है. भारत का द्विपक्षीय समझौते से संबंध भी विकसित हो सकते हैं और सीमा का भी निपटारा हो सकता है. लेकिन इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ भी सकता है. समझौते में कहा है कि जब तक सीमा का पूर्ण रुप से समाधान नहीं निकल जाता एलएसी का उल्लंघन नहीं किया जाएगा. 1990 और 2003 में भारत और चीन में एक सहमति बनाने की कोशिश की गई है लेकिन चीन ही इस दिशा में आगे नहीं बढ़ा.

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