Thursday, 26 May, 2022
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BJP से निकाले जाने के बाद हरक सिंह रावत अपनी पुत्रवधू अनुकृति गोसांईं के साथ कांग्रेस में शामिल

बीजेपी से निष्कासन के बाद हरक सिंह और उनकी बहू अनुकृति गोसांई कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. बीजेपी ने 6 साल के लिए प्राथमिक सदस्यता रद्द कर दी थी.

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नई दिल्लीः उत्तराखंड में बीजेपी के निष्कासित मंत्री हरक सिंह रावत ने शुक्रवार को कांग्रेस ज्वाइन कर लिया. इस दौरान कांग्रेस के कई बड़े नेताओं के साथ-साथ हरीश सिंह रावत मौजूद थे. हालांकि, माना जा रहा था कि हरीश सिंह रावत के विरोध के कारण ही उन्हें अभी तक पार्टी में शामिल नहीं किया जा रहा था लेकिन अब न सिर्फ हरक सिंह रावत बल्कि उनकी बहू अनुकृति गोसांई भी कांग्रेस में शामिल हो गई हैं. बीजेपी ने उन्हें पार्टी से निष्कासित करने के बाद 6 साल के लिए प्राथमिक सदस्यता रद्द कर दी थी.

क्यों किया गया बीजेपी ने निष्कासित

ऐसा माना जा रहा है कि उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में अपने परिवार के लोगों को टिकट देने के लिए वह बीजेपी पर दबाव डाल रहे थे. इसीलिए उनको बीजेपी से निष्कासित किया गया. साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि रावत खुद कोटद्वारा सीट से विधायक हैं और अपनी बहू अनुकृति गोसांईं के लिए लैंसडाउन विधानसभा सीट से टिकट मांग रहे थे. माना जा रहा है कि वे अपनी सीट को बदलने के लिए भी पार्टी पर दबाव बना रहे थे.

कई सीटों से लड़ चुके हैं चुनाव

हरक सिंह उत्तराखंड के बड़े नेताओं में से माने जाते हैं. जब से उत्तराखंड अलग राज्य बना है तब से वह चार बार से लगातार विधायक हैं. पहली बार साल 2002 में वे लैंसडाउन से चुनाव जीते थे. 2007 में उन्होंने फिर इसी सीट से चुनाव लड़ा और जीता. इसके बाद 2012 में रुद्रप्रयाग से वे विधायक बने और साल 2017 में कोटद्वार से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते.

कांग्रेस छोड़ थामा था बीजेपी का दामन

दरअसल, हरक सिंह पहले कांग्रेस के ही नेता थे. लेकिन साल 2016 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया था. कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2016 में हरीश रावत की सरकार गिराने के सूत्रधार भी हरक सिंह थे. हालांकि, बीजेपी से निष्कासित होने के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि हरीश रावत उनके बड़े भाई की तरह हैं और वे उनसे सौ बार माफी मांगने को तैयार हैं. उन्होंने यह भी कहा कि जब उन्होंने पिछली बार कांग्रेस छोड़ा था तो परिस्थितयां अलग थीं, लेकिन उत्तराखंड की भलाई के लिए हरीश रावत से सौ बार माफी मांग सकते हैं.

दिसंबर में कैबिनेट मीटिंग छोड़ चले गए थे बाहर

हरक सिंह की बीजेपी नेतृत्व के साथ असहमति मंत्री पद पर बने रहते हुए भी थी. पिछले साल दिसंबर में वे कैबिनेट की मीटिंग छोड़ कर बाहर चले गए थे. ऐसे में कयास लगाया जा रहा था कि वे मंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे. उन्होंने उस वक्त बीजेपी छोड़ने की भी धमकी दी थी. मेडिकल कॉलेज की स्वीकृति न मिलने पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए उन्होंने कहा था, ‘मेरी खुद की सरकार ही कोटद्वार में मेडिकल कॉलेज बनवाने को स्वीकृति नहीं दे रही है.’ उन्होंने कहा था कि वे इसके लिए पांच साल से कोशिश कर रहे थे.


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