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Monday, 22 July, 2024
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तमिलनाडु में कामराज के दिनों को लौटाने की कोशिश में कांग्रेस, 2026 के विधानसभा चुनाव पर हैं निगाहें

फरवरी में पदभार संभालने वाले राज्य कांग्रेस प्रमुख के सेल्वापेरुन्थगई, जिला और बूथ-स्तर के कार्यकर्ताओं से जुड़ने और पार्टी को फिर से जीवंत करने के लिए तमिलनाडु का दौरा कर रहे हैं.

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चेन्नई: आम चुनावों में इंडिया ब्लॉक की सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के साथ चुनाव लड़ने वाला तमिलनाडु कांग्रेस, जिसने लड़ी गई सभी नौ सीटों पर जीत हासिल की, अब ज़मीनी स्तर पर खुद को मजबूत करने का प्रयास कर रही है, क्योंकि उसकी नज़र इस बात पर है कि 2026 के राज्य विधानसभा चुनावों में वह स्वतंत्र रूप से क्या हासिल कर सकती है.

चेन्नई में मंगलवार को आयोजित पार्टी की आम सभा की बैठक में, फरवरी 2024 में राज्य कांग्रेस प्रमुख नियुक्त किए गए के. सेल्वापेरुन्थगई ने कहा कि पार्टी को खुद को मजबूत करना चाहिए और राज्य में जीत के लिए गठबंधन सहयोगियों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए.

पार्टी सूत्रों का कहना है कि नए कांग्रेस प्रमुख ने पार्टी की ताकत का आकलन करने के लिए राज्य में अगले ग्रामीण स्थानीय निकाय चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ने या जनरल बॉडी मीटिंग में अपने सहयोगी डीएमके से पर्याप्त प्रतिनिधित्व की मांग करने का विचार रखा, जिसमें पार्टी पदाधिकारियों से अलग-अलग राय मांगी गई.

पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक में मौजूद वरिष्ठ नेता ई.वी.के.एस. एलंगोवन ने कहा कि तमिलनाडु कांग्रेस को अपने सहयोगी के साथ मिलकर साझा दुश्मन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने के लिए काम करना चाहिए.

उन्होंने कहा, “हमने सभी सीटें केवल डीएमके की वजह से जीती हैं. अगर हम अपने दम पर चुनाव लड़ने का फैसला करते हैं, तो हम हार जाएंगे. जब हमने अपने काम के दम पर चुनाव लड़ा, तो हमारी ज़मानत ज़ब्त हो गई. किसी के मन में कोई इच्छा होना गलत नहीं है, लेकिन लालच नहीं होना चाहिए. अब, हमारा लक्ष्य साझा दुश्मन को हराना होना चाहिए.”

हालांकि, श्रीपेरंबदूर के विधायक सेल्वापेरुन्थगई 19 अप्रैल को राज्य में लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद से तमिलनाडु में “कामराज और कांग्रेस शासन” के युग को बहाल करने के मिशन पर हैं, जिसके बाद उन्होंने और राज्य के अन्य कांग्रेस नेताओं ने जिला और बूथ स्तर के पार्टी कार्यकर्ताओं से जुड़ने, उनकी चिंताओं को दूर करने और उन्हें फिर से जीवंत करने के लिए दौरे शुरू किए.

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अध्यक्षता संभालने के लिए इस्तीफा देने के पहले तक के. कामराज ने 1954 से 1963 के बीच लगातार तीन कार्यकालों तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री (सीएम) के रूप में कार्य किया, और 1967 में अगले चुनावों में डीएमके के सी.एन. अन्नादुरई सीएम बने.

स्वतंत्रता के बाद दो दशकों तक राज्य पर शासन करने के बावजूद, 1967 से तमिलनाडु में कांग्रेस का कोई मुख्यमंत्री नहीं रहा है. 1967 से, कांग्रेस राज्य में दो द्रविड़ पार्टियों में से एक – डीएमके या अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) – के साथ गठबंधन कर रही है.

डीएमके के साथ पार्टी की साझेदारी 2004 के आम चुनावों से चली आ रही है, लेकिन 2016 की तुलना में 2021 में राज्य चुनावों में इसने जितनी सीटें लड़ीं, उनकी संख्या कम हो गई. 2016 में कांग्रेस ने 234 सीटों में से 41 पर चुनाव लड़ा और आठ पर जीत हासिल की और फिर 2021 में केवल 25 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन 18 पर जीत हासिल की.

​​कांग्रेस को इस लोकसभा चुनाव में अधिक सीटों की उम्मीद थी, लेकिन उसे तमिलनाडु में 39 में से नौ और पुडुचेरी में एक सीट से संतोष करना पड़ा. इस आम चुनाव में तमिलनाडु में पार्टी का वोट शेयर 2019 के आम चुनाव के 12.7 प्रतिशत से घटकर 10.7 प्रतिशत हो गया, हालांकि इसने 2019 में भी नौ सीटों पर चुनाव लड़ा और एक सीट हारी थी.

लोकसभा चुनाव परिणामों की घोषणा से एक सप्ताह पहले दिप्रिंट से बात करते हुए सेल्वापेरुंथगई ने कहा था, “1937 से 1967 तक, हमने (कांग्रेस) तमिलनाडु पर शासन किया. तब हम स्कूली शिक्षा प्रणाली, बिजली परियोजना और अस्पताल लेकर आए. सब कुछ कामराज के द्वारा ही लाया गया.”

कामराज की सरकार को अक्सर शिक्षा प्रणाली में सुधार का श्रेय दिया जाता है. तमिलनाडु 1956 में उनके कार्यकाल के दौरान स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना शुरू करने वाला पहला राज्य था.

तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के महासचिव लक्ष्मी रामचंद्रन ने नतीजों से पहले दिप्रिंट से कहा: “वह (सेल्वापेरुंथगई) पार्टी के जिला प्रमुखों से मिल रहे हैं और उनके प्रदर्शन का आकलन कर रहे हैं. यह सही समय है. यह (लोकसभा) चुनाव खत्म हो चुके हैं, लेकिन हमें 2026 (राज्य) चुनावों की तैयारी करनी है. हमारे पास इसके लिए सही लोग हैं.”

तमिलनाडु कांग्रेस के शोध विभाग के उपाध्यक्ष नबील अहमद ने बताया कि पार्टी कार्यकर्ताओं तक अपनी पहुंच बनाने के लिए सेल्वापरुन्थगई ने 38 जिलों में से 10 जिलों – तिरुवन्नामलाई, वेल्लोर, तिरुपथुर, कृष्णगिरि, धर्मपुरी, सलेम, नमक्कल, इरोड, तिरुपुर और कोयंबटूर को कवर किया है. अगले चरण का कार्यक्रम जुलाई में घोषित किए जाने की संभावना है.

सेल्वापरुन्थगई ने दिप्रिंट से कहा, “हम पार्टी संगठन को मजबूत कर रहे हैं और हमारे पास पहले से ही एक आधार है. हम इसे मजबूत करेंगे, जिससे वोट बैंक बढ़ाने में मदद मिलेगी. इससे हमारे गठबंधन सहयोगी को भी मदद मिलेगी.”


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माइक्रो-लेवल प्रबंधन, युवा लोगों को लाना

पार्टी पदाधिकारियों ने कहा कि कार्यकर्ताओं के असंतोष से लेकर नेतृत्व और निष्क्रिय पदाधिकारियों तक, कांग्रेस के पास जमीनी स्तर पर कई मुद्दे हैं. उन्होंने कहा, “अध्यक्ष बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं और वे जो कुछ भी कह रहे हैं, हम उसे नोट कर रहे हैं.”

अहमद ने कहा कि दौरे के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी. उन्होंने कहा कि पार्टी अपने ज़िला नेतृत्व में बदलाव करेगी और ज़रूरत पड़ने पर नए चेहरे लाएगी. उन्होंने कहा, “जो नेता 10 साल से अधिक समय से पद पर हैं, उन्हें नए चेहरे लाने के लिए राज्य नेतृत्व में पदोन्नत किया जाएगा. युवा जनता के साथ अधिक सक्रिय रूप से जुड़ सकेंगे.”

उनके अनुसार, पार्टी का वॉर रूम और डिजिटल टीम भी पार्टी की गतिविधियों और संदेशों को जनता तक पहुंचाने के लिए नेतृत्व के साथ मिलकर काम करेगी.

नबील ने कहा, “हम तकनीक का उपयोग कर रहे हैं और हमें अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है. कई युवा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमसे जुड़ रहे हैं. हम उन्हें पार्टी में उचित तरीके से लाने के तरीकों पर चर्चा कर रहे हैं.”

इस बीच, पार्टी की संभावनाओं पर विश्वास व्यक्त करते हुए रामचंद्रन ने कहा, “मैं बेहद सकारात्मक हूं. द्रविड़ पार्टियों में से एक – AIADMK – एक कमजोर पड़ती ताकत है. और दिल्ली में राहुल जी के नेतृत्व वाली हमारी जैसी राजनीतिक पार्टी के लिए जगह है. तमिलनाडु के लोग राहुल जी से प्यार करते हैं, चाहे वे किसी भी पार्टी से क्यों न हों.”

उन्होंने कहा कि पार्टी को इस समर्थन और प्रशंसा का उपयोग करना चाहिए और इसे चुनावी जीत में बदलना चाहिए. “मुझे खुशी है कि उन्होंने (सेल्वापेरुंथगई) लोकसभा चुनाव के ठीक बाद अब काम शुरू कर दिया है. इसलिए, अभी समय है.”

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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