Tuesday, 5 July, 2022
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अमरीकी सुपरहीरो की तरह दुष्टों का नाश करने भगवान राम और शिव के भी आ गए हैं सिक्स पैक एब्स

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अमर चित्र कथा कॉमिक्स ने हिन्दू देवताओं को हाइपर मास्कुलिन, क्रोधित अमेरिकी सुपरहीरो की तरह चित्रित करने के लिए राजा रवि वर्मा की सौम्य कामुकता को त्याग दिया है।

कला की सराहना करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए यह स्पष्ट है कि बेंगलुरू और भारत के अन्य शहरों में कार के स्टीकर के रूप में लोकप्रिय होने वाली ‘रुद्र हनुमान’ की तस्वीर एक हॉलीवुड फिल्म राइज ऑफ द प्लैनेट ऑफ द एप्स से काफी प्रभावित थी। पिछले कुछ दशकों से इस तरह का पुनर्प्रस्तुतिकरण काफी आम हो गया है – डीसी कॉमिक बुक के हीरो जैसे कि बैटमैन और यहाँ तक कि नए सुपरमैन की तरह ही राम, शिव और दुर्गा जैसे विचारमग्न अभिव्यक्ति वाले देवी-देवताओं को बुरे लोगों का वध करने के लिए सिक्स पैक्स की जरूरत है। यहाँ तक कि अमर चित्र कथा के नए कॉमिक ने हिन्दू देवी-देवताओं को चित्रित करने के लिए राजा रवि वर्मा की सौम्य कामुकता को त्याग कर हाइपर-मास्कुलिन, क्रोधित, हिंसक अमेरिकी सुपरहीरो वाली शैली को अपना लिया है।

एल-आर: ‘द राइज ऑफ प्लेनेट ऑफ़ द एपस’ का पोस्टर गुस्से में हनुमान की कलाकृति, और कैलेंडर

इस प्रवृत्ति को दक्षिण पंथी राजनेताओं द्वारा सराहा गया है और वैध बताया गया है, जो हिन्दुत्व की एक अनोखी विचारधारा का पालन करते हैं जिसे वे मुस्लिमों से घृणा करने तथा एक जहरीली मर्दानगी वाले पंथ में श्रद्धा रखने के आधार पर हिन्दुत्व कहते हैं। परिणामस्वरूप, बिना किसी कारण के कई बुद्धिजीविद परेशान हैं। उन लेखकों ने कहा तुम्हारी हिम्मत कैसी हुई? यह हमारे हनुमान नहीं हैं, जो अन्यथा कहते होंगे कि वे धार्मिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक या अज्ञेयवादी हैं और उस अभ्यास पर असहमति प्रकट करते होंगे जहाँ लोग अपने जीवन की दैवीय परेशानियों को दूर करने के लिए मंगलवार को (दिल्ली में) और शनिवार को (मुम्बई में) हनुमान मंदिरों में जाकर मूर्ति पर तेल चढ़ाते है।

इस तस्वीर ने लोगों की कल्पना पर कब्जा कर लिया जैसा कि इसकी लोकप्रियता से पता चलता है। क्या कला और इसकी लोकप्रियता हिंदुओं में भरे ग़ुस्से को दर्शाती है? क्या दक्षिण पंथी सरकार का उदय इस क्रोध का कारण या परिणाम है? या यह सिर्फ एक लोकप्रिय भड़काऊ कृति है? क्या यह राजनीतिक प्रोपगंडा भी हो सकता है? या क्या यह अवसरवादियों द्वारा एक राजनीतिक साधन में बनाया जा रहा है?

हिन्दू देवी-देवताओं का दक्षिणपंथियों और वामपंथियों द्वारा व्यंग्यपूर्वक और कलाकारों द्वारा राजनीतिक संदेशों को व्यक्त करने के लिए उपयोग किया गया है। व्हाट्सएप पर एक ऐसी तस्वीर प्राप्त होती है जिसमें श्रीकृष्ण को यमुना नदी में स्नान करती हुई महिलाओं के कपड़े चुराते हुए दिखाया गया है और दर्शाया गया है कि यह चीज़ बलात्कार की सांस्कृतिक मंजूरी है यह द्रौपदी को अपमानित करने वाले कौरवों से अलग नहीं है। कलाकार और इसे फॉरवर्ड करने वालों के लिए कृष्ण के बचपन की शरारत और कौरवों की दुर्भावना अलग नहीं है। क्या यह पारंपरिक हिन्दू कथा या हिन्दू बुद्धिमानी की प्रमाणिक समझ का एक आधुनिकतम निरूपण है? जैसा कि क्रोधित हनुमान के मामले में, कौन यह निर्णय लेगा कि हनुमान, या कृष्ण, या राम, या शिव, या दुर्गा, या काली का सही विवरण क्या है? 21वीं सदी मे इन्हें कैसे दर्शाना चाहिए?

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कृष्ण की फोटो महिलाओं के कपड़े चुराते हुए महिला दुर्व्यवहार के रूप में दिखाया जा रहा है

जब ब्रिटिश औपनिवेशिकों का बोलबाला था तब राजा रवि वर्मा ने सभी हिन्दू देवी-देवताओं को सुंदर-प्रकृति वाले ब्राह्मण पुरुषों और महिलाओं के रूप में चित्रित किया था। अश्वेत देवता नीले बन गए थे । पारंपरिक भारतीय कला में पाए जाने वाले भारतीय हंसों को लंबी गर्दन वाले और अधिक सुंदर यूरोपियन राजहंसों से प्रतिस्थापित कर दिया गया। कई कलाकार यूरोपीय पुर्नजागरण की तस्वीरों का उपयोग अपने टेम्पलेट के रूप में करते थे इसी वजह से कई बार राधा और कृष्ण भारतीय कम और यूरोपियन लगते हैं।

अब, अमेरिकन डीसी और मार्वल कॉमिक्स के युग में संसार की अव्यवस्था से नाराज हिंदू देवता समस्या दूर करने और चीजों को निर्धारित करने के लिए सुपरहीरो बन गए हैं।

दमयंती और उसके हंस की व्याख्या राजा रवि वर्मा के द्वारा

भारतीय देवताओं को यूरोपीय और अमेरिकी लहजे में देखने की चाह में हम हिंदू मूल विचारों और हिंदू कला की अवधारणा को खो रहे हैं। ग्रीक और रोमन देवता, जो प्रबल प्रदर्शित होते हैं और यथार्थवादी और आदर्श रूप से चित्रित किए जाते हैं, के विपरीत हिन्दू मंदिर की दीवारों पर हिंदू देवता कोमल और गोलाकार चित्रण में, और किसी नर्तक की तरह साहित्यिक शैली में सजे हुए लगभग हमेशा एक सुव्यवस्थित ज्यामितीय फ्रेम में चित्रित होते हैं। यह शैली औपचारिक थी और 5वीं से 15वीं शताब्दी तक लोकप्रिय हुई थी।

यहाँ तक कि शिव और शक्ति के क्रोधित रूपों को इतने योग्य रूप से दिखाया गया था कि कोई भी इनकी विलक्षण प्रकृति, कटे हुए सिर, लाशों का ढेर और खून से भरे प्याले पर ध्यान ही नहीं देता था। यह अभिव्यक्तिवादी या प्रभाववादी या आदर्शवादी कला नहीं है; यह उसी के लिए तैयार की गई प्रतिनिधित्व कला है, जैसे कि एक वैदिक यज्ञ या पौराणिक कथा आम आदमी के विचारों के साथ संवाद करने के लिए तैयार की जाती है। ज्ञान का मूल्यांकन करने के लिए कुछ को अनुष्ठानों की, कुछ को वर्णन करने की और कुछ को कौशल/कला की आवश्यकता होती है।

रूद्र की वुडकार्विंग हाथी-दानव और उसके सिर पर नृत्य करते हुए । 16 वीं शताब्दी।

भारतीय ज्ञान में, हनुमान एक समस्या-निवारक नहीं है, हालांकि उन्हें हिंदी भाषी क्षेत्रों में संकट-मोचन कहा जाता है। जब देवता हमारी समस्याओं का समाधान करते हैं तो वे उसके लिए हमारे बौद्धिक और भावनात्मक विकास में योगदान नहीं देते हैं। और यदि हम बौद्धिक और भावनात्मक उन्नति नहीं करते हैं, तो हम अपने जीवन को अन्य मानवों की तरह बर्बाद करते हैं और विषयों में आसक्त आनंद चाहने वाले जानवर ही बने रहते हैं। जंगल में राम से अचानक भेंट करने वाले सभी बंदरों में से, केवल हनुमान ही राम के दास से महाबली (कई सिरों तथा कई भुजाओं वाले स्वतंत्र देवता) में बदल पाते हैं। पशु से दिव्य शक्ति में बदलने का यह परिवर्तन तब होता है जब वह ब्रह्मा की तरह निर्भर, शिव की तरह स्वतंत्र तथा विष्णु की तरह विश्वसनीय होने के लिए प्रेरित होते हैं।

राम के नौकर भक्त के रूप में हनुमान की पोस्टर कला और महाबली के रूप में, अपने खुद के अधिकार के स्वायत्त देवता

क्रोध विवशता का सूचक है। हिंदू देवता कभी असहाय नहीं होते क्योंकि उनके पास अनंत ज्ञान होता है। यही कारण है कि वे युद्ध-क्षेत्र में, या निर्वासन (वनवास) में व्याकुल या क्रोधित नहीं दिखते हैं। वे बहुत ही शांत दिखते हैं क्योंकि वे सभी कालों, सभी स्थानों के बारे में और सबकुछ जानते हैं। जैसे माता-पिता बच्चों को चलना सीखने में मदद करते हैं उसी प्रकार वे मानव स्तर पर मनुष्यों की मदद करते हैं। जबकि सुपरहीरो साधारण प्राणी हैं जो असाधारण बन जाते हैं। अपनी सभी अभिव्यक्तियों के कारण हिंदू देवता अनंत प्राणी हैं जो राजाओं और बंदरों के रूप में सीमित होने का विकल्प चुनते हैं, ताकि मनुष्यों को उनकी दिव्य क्षमता की खोज करने में मदद मिल सके, स्वयं से परे सोच सकें और दूसरों को अपना सकें।

जबकि अमेरिकी सुपरहीरो विश्व पर अपना प्रभुत्व चाहने वाले सुपरविलन से ग्रह (धरती) को बचाने में व्यस्त हैं। हनुमान सहित, हिन्दू देवता शिक्षक हैं, जो न केवल समस्याएं बल्कि हमारी सीमित समझ, जो हमारे आसपास मौजूद हर वस्तु को समस्या बनाती है, को नष्ट करके हमारा उद्धार करते हैं। ज्ञान में, हम देखते हैं कि दुनिया कैसे कार्य करती है, और हम महसूस करते हैं कि जो कुछ लोगों के लिए समस्या है वही दूसरों के लिए समाधान है। राम रावण से केवल इसलिए नहीं लड़ते हैं कि रावण दुष्ट (एक यहूदी-ईसाई शब्द) है, इसलिए भी क्योंकि रावण अपनी शक्ति और ज्ञान से मंत्रमुग्ध हो गया है और अपनी मानव क्षमता को जगा पाने में असमर्थ है। जैसे कुत्ता हड्डी के मोह में होता है वैसे ही रावण शक्ति के मोह में है, इसीलिए वह आजाद होकर हनुमान की तरह उड़ने में असमर्थ है।

देवदत्त पटनायक एक पौराणिक कथाविद् हैं, और ‘माइ हनुमान चालीसा’ (रूपा प्रकाशन) किताब के लेखक हैं।

Read in English : Hindu gods like Rama & Shiva have six packs now to kill bad guys, like American superheroes

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