salman khan
सलमान खान । यूट्यूब स्क्रीनग्रैब
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सलमान खान एक अभिनेता नहीं हैं। सलमान खान एक सितारा हैं। सलमान खान एक कमोडिटी हैं। सलमान खान हैं बींग ह्यूमन ।

मेरा भतीजा कम बोलने वाला एक युवा व्यक्ति है। लेकिन वह भार उठाना पसंद करता है। वह अपने प्रोटीन शेक्स पर पूरा ध्यान देता है और उसे समय-समय पर थिएटर में जाकर सलमान खान की फिल्म देखने के लिए जाना जाता है।

मैंने उससे पूछा, “तुम्हारी उनकी सबसे पसंदीदा फिल्म कौन सी है?” उसने थोड़ा सोचा और फिर कहा “कोई नहीं”।

मैंने अपनी नीति बदली। “ठीक है, तो उनकी तुम्हें सबसे ख़राब लगने वाली फिल्म कौन सी है?”

उसने अपने फ़ोन पर वापस लौटने से पहले कहा, “क्या वे सभी ख़राब नहीं हैं?”

लेकिन फिर भी वह लगातार जाता रहता है।

और, गूगल खोज परिणामों में “सबसे खराब बॉलीवुड अभिनेता” के रूप में सलमान खान का आना समस्या का संक्षेप है। सलमान खान किसी भी तरह से धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से एक अभिनेता होने के हर दिखावे से बाहर आ चुके हैं। वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने लम्बे समय पहले अपनी शर्ट उतरी थी और फिर एक स्टार बन गए थे। वह एक फ्रेंचाइजी है। वह एक कमोडिटी हैं। वह हैं बींग ह्यूमन।

मुझे लगता है कि यह हमारे बारे में और अधिक कहता है हालांकि हम इसके बारे में घबराहट में हैं। लगभग विद्वतापूर्ण मीडिया लेख व्याख्या दे रहे हैं कि गूगल में कीवर्ड और मेटा टैग कैसे काम करते हैं और ट्विटर-उत्पात भड़कने से पहले एक षड़यंत्र सिद्धांत का तुरंत पर्दाफाश करना ज़रूरी है। एक गूगल प्रवक्ता ने नेटवर्क 18 को बताया कि “गूगल खोज परिणाम एल्गोरिदम द्वारा निर्धारित किए जाते हैं और कोई भी व्यक्ति या समूह तय नहीं करता है कि प्रत्येक क्वेरी के लिए कौन से परिणाम आएँगे”। सच में नहीं, कुछ राजनेताओं दावा है कि एक नारद मुनि है जो गूगल सर्च बॉक्स के पीछे छिप रहा है और इसे नियंत्रित कर रहा है । वैसे, सलमान खान को जादा चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि द इंडियन एक्सप्रेस ने यह देखा हैं कि गूगल पर “बॉलीवुड की असली किंग“ डालने पर भी सलमान खान का ही नाम आता है।

जो और भी मजेदार है वह हैं समाचार पत्रों के लेख, जो गूगल द्वारा बॉलीवुड के सबसे ख़राब अभिनेता के रूप में सलमान को दिखाने के साथ इंडियाज़ फर्स्ट प्राइम मिनिस्टर सर्च करने पर गूगल द्वारा गलती से नरेन्द्र मोदी की तस्वीर दिखाने की तुलना कर रहे हैं। दोनों बिल्कुल तुलनीय नहीं हैं। एक परिणाम इतिहास को फिर से लिखता है। दूसरा केवल एक राय बताता है जो स्पष्ट रूप से इंटरनेट पर कई लोगों द्वारा साझा किया गया है। एक हमें परेशान कर सकता है। दूसरे को हमें हतोत्साहित करना चाहिए। या शायद गूगल, जिसे सब पता है, जानता हो कि एक दिन हम एक ऐसी दुनिया में आगे बढ़ेंगे जहाँ भारत को एहसास होगा कि यह मई 2014 में वास्तव में मध्यरात्रि 12 बजे जागा था और ‘मोदी से पहले’ सब कुछ सिर्फ एक बुरा सपना था।

सलमान खान के बारे में बहुत अधिक हलचल का असली कारण यह है कि इस पूरे समय में हमने सोचा कि राजनेता भगवान थे, क्रिकेटर भगवान थे और बॉलीवुड सुपरस्टार भगवान थे। यह हमारी पवित्र तिकड़ी थी। हमने उन्हें हार पहनाये। हमने उनके जूते पोलिश किए। हमने उन्हें भीड़ दी। हमने उन्हें प्रेमपत्र लिखे। जब वे जेल गए तो हम उनके लिए रोए, न कि उस किसी व्यक्ति के लिए जिसे मारने या छलने के लिए वे दोषी रहे हों। जब उन्हें रिहा किया गया तो हम एक झलक पाने के लिए एक दूसरे पर चढ़ गए और उनका ध्यान खींचने के लिए चिल्लाये। यहाँ तक कि हमने उनके लिए खुद को मार डाला। संक्षेप में, हम उनके अंधभक्त हैं।

लेकिन अब यह पता चला है कि शहर में एक नया भगवान है – गूगल। एक समय कई सर्च इंजन हुआ करते थे – याहू, अल्टाविस्टा, आस्क जिव्स, हॉटबॉट, लाइकोस, इंफोसीक, एक्साइट और नेटस्केप। लेकिन गूगल ने उन सभी पर विजय प्राप्त की और हम धीरे-धीरे एक एकेश्वरवादी खोज दुनिया में होने के अभ्यस्त हो गए हैं।

आज गूगल का वचन आज्ञा है, इसका खोज परिणाम कानून है। हमने इसे सत्य के रूप में अंधविश्वास में स्वीकार कर लिया है।अब आघात के साथ हम महसूस करते हैं कि यह नया भगवान हमारे सभी पुराने भगवानों की तुलना में अधिक शक्तिशाली है। यह भारत के पहले प्रधान मंत्री का चेहरा बदल सकता है। यह हमारे सबसे सफल सुपरस्टारों में से किसी को उठा के उन्हें सबसे बुरा कह सकता है। क्या गूगल भगवान गलत हो सकते हैं? क्या गूगल भगवान अचूक नहीं हैं? क्या ऐसा नहीं है कि हम उस सर्च इंजन की पूजा इसलिए करते हैं क्योंकि हमें विश्वास है कि यह हमें कभी गुमराह नहीं करेगा।

नकली खबरों के इस युग में कुछ भी संभव है। हम जानते हैं और हमें हमारी राजनीतिक वरीयताओं के अनुसार किसी अनचाहे टेलीविजन चैनल से आने वाली किसी चीज पर भरोसा न करने की स्कूली शिक्षा दी गई है। लेकिन हमें यह भी सिखाया गया है कि हम गूगल  पर भरोसा कर सकते हैं। यह हमारी वर्तनी की गलतियों को भी सुधारता है और कहता है कि “के लिए परिणाम दिखा रहा है” यह कुछ ऐसा सोचता है जो हम खोज रहे थे। अब उस विश्वास प्रणाली की जड़ हिल गयी है। जैसा कि सलमान ने खुद कहा था, मर जाएंगे लेकिन झूठ नहीं बोलेंगे। यह गूगल के लिए भी आदर्श वाक्य हो सकता था।

यहाँ एक छोटी सी सांत्वना यह है कि प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार, 2017 में दक्षिण कोरिया में 96 प्रतिशत इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के विपरीत केवल 25 प्रतिशत भारतीयों ने इंटरनेट का उपयोग किया था। स्मार्टफोन का स्वामित्व 2013 में 12 प्रतिशत से बढ़कर 2017 में 22 प्रतिशत हो गया, लेकिन इसका मतलब है कि 78 प्रतिशत भारतीयों के पास अभी भी कोई स्मार्ट फोन नहीं है। सलमान खान इंटरनेट के दायरे (डिजिटल बबल) के बाहर सुरक्षित हैं। ट्विटर पर बहुत अधिक हलचल के बावजूद, अधिकांश देशों ने न तो गूगल किया है और न ही ट्वीट किया है। वे अभी भी ईद के प्रदर्शन को ईमानदारी से देखते हैं और अपने गूगल परिणामों के बारे में चिंता किए बिना इसका आनंद लेते हैं। जबकि समीक्षकों ने रेस 3 की कटु आलोचना की और सलमान के लिए अपनी सबसे तेज मनोरंजक टिप्पणियां दीं, लेकिन सुल्तान, टाइगर जिंदा है और बजरंगी भाईजान जैसी फिल्मों ने अपने प्रदर्शन के पहले सप्ताहांत में 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा आसानी से हासिल कर लिया था।

वो लोग जो नहीं समझते कि सिर्फ एक ‘ट्यूबलाइट’ होने का क्या मतलब होता है। सलमान खान केवल सलमान खान हो सकते हैं। वह सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और सबसे खराब अभिनेता से परे हैं। याद कीजिए जब दुर्घटना के बरसों बाद एक ड्राईवर इस दुर्घटना के लिए आरोप लेने के लिए अचानक से प्रकट हुआ था। और एक सेलिब्रिटी गायक ने ट्वीट किया था कि “सड़कें कारों और कुत्तों के लिए होती हैं, न कि लोगों के सोने के लिए…. इसमें @BeingSalmanKhan की कोई गलती नहीं है”। यह हर चीज का सबूत है जो सलमान खान के साथ सही है और हमारे देश के साथ गलत है।

उनके अभिनय को खारिज करना भी गलत है। उन्होंने हाल के वर्षों में अदालतों और काला हिरन और फुटपाथ-निवासियों के आसपास शानदार प्रदर्शन किया है। वे उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं और गूगल का इस पर ध्यान ना देना यह तो बड़ी अजीब बात है। याद कीजिए, उन्होंने जंगल में एक डरे हुए हिरन को खोजने और उसे बिस्कुट खिलाने के बारे में एक टेलीविजन चैनल को किस प्रकार बताया था। जब वह जमानत मिलने के बाद अपने घर की बालकनी पर दिखाई दिए तो बिना कुछ बोले उन्होंने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और उन्मादी भीड़ की ओर केवल हाथ हिलाकर उन्हें घर जाने और कुछ आराम करने के लिए कहा, यह सब उन्होंने फ़िल्मी तरीके से व्यक्त किया। कितना मार्मिक था जब वह अदालत में रोए थे कि मैं भूल जाता हूं कि मामला काले हिरन का था या फुटपाथ निवासियों का। हर तरह से, सलमान खान अपने अभिनय के लिए पुरस्कारों के हकदार हैं। बस उनके कुछ प्रदर्शन फिल्मफेयर पुरस्कारों के योग्य नहीं हैं।

गूगल की कोई खोज उन्हें नहीं पकड़ेगी। यह सिर्फ एक संक्षिप्त क्षण के लिए बॉलीवुड के देवताओं और गूगल के भगवान की टक्कर है और डिजिटल इंडिया में एक आविर्भाव है जिसे पचाना मुश्किल लग रहा है। जब हम प्रारंभ से लेकर ‘रेस 3’ तक इनके प्रदर्शन की बात करते हैं तो महसूस करते हैं कि अब थप्पड़ से डर नहीं लगता साहब, गूगल सर्च से लगता है।

Read in English : Salman Khan: ‘Main Google search mein aata hoon, samajh mein nahi’


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