Tuesday, 5 July, 2022
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अलवर हत्याकांड हिन्दुओं द्वारा निर्मित उस नफरत का नतीजा है जिसे मैंने तीन साल पहले देखा था

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एक संवाददाता की 2015 की एक डायरी तराशती है कि कैसे गौ रक्षकों का उदय राजस्थान में हुआ था

लवर में गौ रक्षा के नाम पर लिंचिंग, अचानक स्वतः प्रवर्तित कार्य नहीं था। राजस्थान के श्रम मंत्री जसवंत यादव ने मंगलवार को गाय की तस्करी के संदेह पर अलवर में 28 वर्षीय रकबर खान की नृशंस हत्या के लिए “हिंदू रोष” को दोषी ठहराया।

लेकिन भाजपा के यादव यह प्रकट करना भूल गए थे कि अलवर में तथाकथित हिंदू क्रोध का निर्माण काफी समय से चल रहा है।

तीन साल पहले, मैंने रामगढ़ की यात्रा यह देखने के लिए की थी कि इस दिन के लिए मैदान कैसे तैयार किया जा रहा था।

अपराध की राजनीति में उन्हें ‘मुसलमानों को मारो’ शब्द भी नहीं बोलने पड़ते थे। नाराज हिंदू लोगों के समूह, जिन्होंने पुलिस और राजनीतिक समर्थन था, के लिए सांकेतिक शब्दों का शिष्ट प्रयोग पर्याप्त था।

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नाटकीय व्यक्तित्व

जब कोई गौ रक्षा के बारे में सोचता है तो तिलकधारी, चेहरे पर गुस्सा, हाथ में लाठी लिए हुए बेरोजगार हिन्दू युवाओं की तस्वीर ही मन में बनती है। वास्तव में, हम में से कई लोग ऐसे हैं जो कहते होंगे कि बेरोजगारी ही इस इस घृणा का असली कारण है।

लेकिन तीन साल पहले, रामगढ़ के नौकरी-पेशा, परिवार और अच्छी आर्थिक स्थिति वाले लोगों के द्वारा घृणा और गुस्सा पैदा किया जा रहा था। इसमें माध्यमिक स्कूल में संस्कृत पढ़ाने वाले एक शिक्षक, एक डेयरी मालिक, एक व्यक्ति जो हिन्दू देवी-देवताओं और शहीदों की संगमरमर की मूर्तियाँ बनाता था, एक टीवी विक्रेता, एक डॉक्टर और एक निर्वाचित नेता जो बाद में एक कॉलेज कैम्पस में कंडोम गिनने के लिए दिल्ली आए थे, जैसे लोग शामिल थे।

गौ रक्षा तो उनके करियर का एक बहुत ही छोटा हिस्सा थी।

काम करने का तरीका

स्वघोषित गौरक्षकों ने रामगढ़ के 50 गाँवों की पहचान की थी। उनका लक्ष्य गायों को बचाने के मिशन के लिए प्रत्येक गांव में 20 युवाओं को तैयार करना था। फिर युवा नेटवर्क इंफॉर्मर (सूचना देने वाला) के रूप में काम करता था। जो वध करने के लिए गायों की तस्करी कर रहे संदिग्ध मुस्लिम पुरूषों के बारे में दूसरों को चेतावनी देने के लिए मिशन के आँख और कान थे। इन युवाओं को भारतीय गायों को नष्ट करने लिए एक अंतर्राष्ट्रीय साजिश के बारे में बरगलाया गया था।

इन चुने हुए युवाओं के दिलों-दिमाग को जाली मुद्रा रैकेट, दूर बांग्लादेश में गोमांस बाजार, नकली हिंदू नाम वाले मुस्लिम लड़कों, क्षेत्र में आईएसआई की बढ़ती उपस्थिति और भारतीय गायों के विलुप्तिकरण के बारे में कि वह दिन दूर नहीं जब भारतीय गायें केवल कैलेंडर पर दिखाई देंगी जैसी आडंबरपूर्ण जानकारियों की स्थिर धारा से भर दिया गया था। डेयरी मालिकों ने युवाओं से कहा था कि जब गायें लुप्त हो जाएंगी तो गाँव में बच्चों के लिए दूध ही नहीं होगा।

गौ रक्षकों को ट्रकों में भरी हुई गायों की तस्वीरें और वीडियो दिखाए गए थे। वीडियो में गौ रक्षक दलों द्वारा किए गए बचाव के कुछ प्रयासों और कुछ मुस्लिमों की पिटाई को दिखाया गया था।

रात्रि गश्त

गाँव के युवाओं ने हॉकी और धारदार हथियार लेकर हफ्ते में दो बार पूरी रात गाँव की गश्त करते थे। रामगढ़ के गाँव वालों ने उनका नेतृत्व किया और निर्देशित किया। वे गाँव के कच्चे रास्तों और राजमार्गों से मिलने वाली सड़कों पर फैले रहते थे तथा पानी के कुँओं के पीछे छिपे रहते थे।

उन्हें गायों का नौकायन करने वाले मिनी-ट्रकों की तलाश करने के लिए कहा गया था। वे गश्त पर दूसरों से बात करने के लिए रात के अंधेरे में अजीब तरीकों से पुकारते थे।

सभी युवा गायों और देश को एक धुँधले (अस्पष्ट) दुश्मन की संस्कृति और रहन-सहन से बचाने के लिए एक महत्वूपूर्ण मिशन पर थे।

राजनीतिक समर्थन

दल के नेताओं ने कहा कि वे विश्व हिंदू परिषद और शिवसेना के रामगढ़ प्रकरण से संबंधित थे। उन्होंने कहा कि उनका भाजपा से कुछ लेना देना नहीं था। लेकिन दबी आवाज में उन्होंने आगे कहा, “आखिरकार अब यह हमारी सरकार है, यह हमारी बात सुनती है। पुलिस अब हमारी कॉल पर अधिक ध्यान देती है और तुरंत अपने सिपाहियों को भेज देती है।”

स्थानीय भाजपा विधायक ज्ञान देव आहुजा, एक हट्टे कट्टे मूँछों वाले राजनेता, ने कहा कि उन्होंने इन लोगों को वित्तीय सहायता की पेशकश की और गायों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए उन्हें सार्वजनिक बैठकों का संचालन करने में मदद की।

आहुजा ने कहा, “भारत में धर्मनिरपेक्षता का ढोंग करने वाले लोग वास्तव में गाय का अपमान करते हैं।”

स्थानीय पुलिस स्टेशन के पीछे का जो मैदान था वह गौरक्षक दल द्वारा पकड़े गए वाहनों से भर गया था। पुलिस ने दावा किया था कि ये सभी मिनी ट्रक गायों का वध करने के लिए ले जा रहे थे।

गाय भाषण कला

भाषण, विज्ञापन-पत्र और व्हाट्सएप संदेश गाय की प्रशंसा करते हैं और इन्हें भारत में पौराणिक शक्ति मानकर दान करते हैं। गाय की सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा जाता है। जब तक गाय सुरक्षित और स्वस्थ है, हमारी सीमाएं भी सुरक्षित हैं, उनसे बार-बार कहा जाता है। गाय के शरीर में जनमानस का स्वास्थ्य निवास करता है।

गाय का मूत्र, दूध और गोबर हमें बीमारियों से मुक्ति दिला सकता है। रक्तचाप जैसी आधुनिक शहरी बीमारियों को सिर्फ गाय के स्पर्श से ही समाप्त किया जा सकता है।डॉक्टरों का कहना है कि यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है।

अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान वैज्ञानिकों के मुताबिक, गाय के मूत्र से सोना और उसकी लार से चांदी निकाली जा सकती है।
इच्छा पूरी करने वाली गाय कामधेनु का चित्र भी दिखाया जाता है।

आहुजा ने गाय-रक्षकों के बड़े समूह को बताया कि कैलिफोर्निया राज्य गाय मूत्र द्वारा विद्युतीकृत किया जाता है। गाय भारत के लिए समृद्धि हासिल करने का मार्ग है। लेकिन उन्होंने उन्हें चेतावनी भी दी कि यदि गाय का खून मिट्टी पर गिरता है, तो वहाँ भूकंप, ज्वालामुखी और अकाल आता है।

गाय के दुश्मन का पता लगाना

रामगढ़ में गाय का दुश्मन था। सुविधाजनक रूप से, यह हरियाणा में मेवात का मुस्लिम बहुसंख्यक पड़ोसी क्षेत्र था। वे इसे ‘छोटा-पाकिस्तान’ कहते थे। उन्होंने दावा किया कि इसका क्षेत्र और प्रभाव रामगढ़ तक था और स्पष्ट रूप से यह बांग्लादेश के लिए गोमांस का केंद्र भी था।

उन्होंने ग्रामीणों से कहा, हर दिन गायों की हत्या की जाती है और मेवात राजमार्ग पर बिरयानी बेची जाती है। मेवात के मुस्लिमों के पास बंदूकें हैं और वे निहत्थे गाय संरक्षकों पर गोलीबारी करते हैं।

ग्रामीणों को रात की गश्त के दौरान बताया गया था, “अगर हम दंगा चाहते हैं, तो हम इसे एक हजार बार आराम से कर सकते हैं। यह हमारा लक्ष्य नहीं है। हम सिर्फ गाय की रक्षा करना चाहते हैं।”

दुश्मन सिर्फ पड़ोसी गांवों में ही नहीं है। दुश्मन इतिहास में भी हैं।

एक किताब के पिछले पृष्ठ पर लिखा था, पहले उन्होंने मंदिरों को निशाना बनाया, उसके बाद उन्होंने हमारी गायों को निशाना बनाया। उनका एक मात्र लक्ष्य हिंदुओं को उखाड़ फेकना है।”

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