अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू की फाइल फोटो | फेसबुक
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नई दिल्ली: 26 वर्षीय महिला ने अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू और तीन अन्य पर एक दशक पहले उसके साथ हुए बलात्कार का आरोप लगाया है, उसका कहना है कि उस समय वह नाबालिग थी.

महिला शादी-शुदा है और दो बच्चों की मां ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है, जिसमें उसने कहा है कि कुछ अनजाने लोग उसके परिवार वालों को धमकी दे रहे हैं. उसने कोर्ट से सुरक्षा की मांग करते हुए कहा है कि चार साल पहले उसने जबसे उन चार लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है तभी से उसके परिवार वालों को धमकियां मिल रही हैं.

लगातार मिलने वाली धमकियों का हवाला देते हुए, उसने पुलिस सुरक्षा के लिए अदालत से अनुरोध किया है.

दिप्रिंट द्वारा संपर्क किए जाने पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया क्योंकि यह मामला विचाराधीन है.

पिछले साल खांडू ने महिला के खिलाफ गुवाहाटी उच्च न्यायालय में मानहानि का मुकदमा दायर किया था. नॉर्थईस्ट टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2018 में, एक न्यायाधीश ने महिला या उसके प्रतिनिधियों को ‘आगे कोई अपमानजनक बयान देने या अभियोगी (पेमा खांडू) के खिलाफ आंदोलन करने से रोकने का आदेश दिया था.

‘बहला-फुसलाकर किया गया बलात्कार और पिटाई’

शिकायतकर्ता के अनुसार, जुलाई 2008 में सीमावर्ती तवांग जिले में कथित सामूहिक बलात्कार हुआ था.

बुधवार को अधिवक्ता श्रीराम पी द्वारा दायर याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा है कि फुरमा लामा नाम के एक व्यक्ति ने उसे ‘तवांग के सर्किट हाउस में सरकारी नौकरी देने का वादा कर फुसलाया था.

याचिका में लिखा है, ‘फुरमा लामा जुलाई 2008 में याचिकाकर्ता को सर्किट हाउस तवांग कुछ महत्वपूर्ण लोगों से मिलवाने का वादा कर ले गये थे.

सर्किट हाउस में महिला को तीन लोगों से मिलवाया गया था, जिनमें से एक पेमा खांडू थे जो उस समय ‘सशस्त्र सेना में कर्नल’ थे.

दो अन्य लोगों में एक थुपटेन ताशी थे जो गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल तवांग में शिक्षक थे और दोरजी वांग्चू सहायक खनिज विकास अधिकारी थे.

याचिका में महिला ने लिखा है कि उसे उस दौरान कोल्ड ड्रिंक में नशीले पदार्थ डाल कर पिलाया गया जिसकी वजह से वह बेहोश हो गई, जिसके बाद उन चारों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया.

शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में लिखा है कि जब उसे होश आया तो उसने खुद को नग्नअवस्था में पाया. अपने आपको इस स्थिति में देखकर वह चिल्लाने लगी, तो खांडू ने कथित तौर पर उसे ‘थप्पड़ मारा, उसे गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी और कहा कि अगर उसने किसी को भी इस घटना के बारे में बताया तो वह उसके टकड़े-टुकड़े कर देंगे.

शिकायतकर्ता अपनी याचिका में कहती है कि वह जानती थी कि ‘उनके (अपराधियों के) आचरण से समझ में आता है कि वे बहुत शक्तिशाली लोग थे, वह डर गई और उसने उन लोगों के खिलाफ कोई शिकायत न दर्ज कराने का फैसला लिया.

महिला के अनुसार उसने 2012 में खांडू को देखा, जब वह राज्य के पर्यटन मंत्री नियुक्त किए गए थे, तब उसे एहसास हुआ कि वह वास्तव में कौन था.

एफआईआर दर्ज करने के प्रयास ‘नाकाम’ कर दिए गए

महिला ने दावा किया है कि मामले को तार्किक निष्कर्ष तक ले जाने की कोशिशों को बार-बार नाकाम कर दिया गया.

शिकायतकर्ता के अनुसार जब उसने तवांग में पुलिस से संपर्क किया तब उन्होंने उसे और उसके पति को कई झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी.

जब उसने दिसंबर 2015 में ईटानगर के एक पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करने की कोशिश की, तो याचिका में कहा गया है कि कर्मियों ने प्राथमिकी दर्ज करने से इनकार कर दिया.

शिकायतकर्ता के अनुसार जनवरी 2016 में ईटानगर के पुलिस अधीक्षक के कार्यालय का रुख किया, जिसमें थाने के प्रभारी अधिकारी के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई थी.

उसी वर्ष मई में दावा किया कि उसने पापुम परे जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष एक याचिका दायर की जिसके तहत ईटानगर आता है, पुलिस को उसकी शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की.

हालांकि मामले को न्यायिक मुद्दों के आधार पर खारिज कर दिया गया था, उसने बताया कि जैसा तवांग में कथित अपराध हुआ था. पीड़ित के अनुसार राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी उनका साथ नहीं दिया.

सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका में महिला ने इस मामले में पुलिस की निष्क्रियता के खिलाफ कानूनी सहारा लेने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय तक पहुंचने का अवसर भी मांगा.

खांडू अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दोरजी खांडू के बेटे हैं, जो आठ साल पहले एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मारे गए थे. खांडू वर्तमान में पूर्वोत्तर राज्य की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार के प्रमुख हैं. इसके पूर्व वह कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं, वे 2016 में खुद भाजपा में शामिल हुए थे.

जब उन्होंने 2016 में पद संभाला तो 37 वर्ष के थे, वह मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय नेता बन गए थे.

सुप्रीम कोर्ट में याचिका अरुणाचल प्रदेश में चुनाव से एक हफ्ते पहले आयी है, जब राज्य में 11 अप्रैल को होने वाले संसदीय और विधानसभा चुनावों के लिए मतदान होना है.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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