विशाखापत्तनम: आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड दुर्घटना में जान गंवाने वाले प्रत्येक नियमित कर्मचारी के परिवार को 1.72 करोड़ रुपये और प्रत्येक संविदा कर्मचारी के परिवार को 45.75 लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा.
सोमवार शाम को संयंत्र के ‘स्टील मेल्ट शॉप-1’ में पिघले हुए इस्पात की ढलाई के दौरान भीषण विस्फोट हुआ, जिसमें आठ श्रमिकों की मौत हो गई और छह अन्य मजदूर घायल हो गए.
विस्फोट के कारण भीषण आग लग गई.
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुआवजा राशि में मृतक कर्मचारियों के सभी वैधानिक और अंतिम लाभ शामिल होंगे.
कल्याण ने पत्रकारों को बताया, “सरकार की ओर से, हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक नियमित कर्मचारी के परिवार को 1.72 करोड़ रुपये जबकि प्रत्येक संविदा कर्मचारी के परिवार को 45.75 लाख रुपये का भुगतान किया जाएगा. अंतिम लाभ के अलावा, मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि भी दी जाएगी.”
उन्होंने कहा कि प्रत्येक शोक संतप्त परिवार के एक सदस्य को रोजगार दिया जाएगा जबकि गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को 10 लाख रुपये प्रति परिवार मुआवजा दिया जाएगा.
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि घायल श्रमिकों के इलाज का पूरा खर्च राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड वहन करेगा.
कल्याण ने यह भी कहा कि इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रहेगी और यही लाभ मृतक श्रमिकों के बच्चों को भी मिलेंगे.
उन्होंने कहा कि मृतक के परिजनों को इस्पात संयंत्र के क्वार्टरों में पीड़ित कर्मचारी की सेवा अवधि समाप्त होने तक रहने की अनुमति दी जाएगी.
कल्याण ने कहा कि परिवार के जो सदस्य फिलहाल टाउनशिप के बाहर रह रहे हैं, उन्हें भी इच्छा जताने पर संयंत्र के क्वार्टर में रहने की अनुमति दी जाएगी.
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि दुर्घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है.
उन्होंने कहा कि यह समिति जांच करेगी कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं और सुरक्षा ऑडिट किए गए थे या नहीं.
इससे पहले, कल्याण ने इस्पात संयंत्र में दुर्घटनास्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों एवं श्रमिकों से दुर्घटना के कारणों के बारे में पूछताछ की.
उन्होंने अस्पताल में घायलों से भी मुलाकात की.
जनसेना द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में श्रमिकों के हवाले से बताया गया कि उन्होंने उपमुख्यमंत्री को बताया कि दुर्घटना मानवीय त्रुटि के कारण हुई और प्रबंधन की लापरवाही तथा रखरखाव में खामियों के कारण उनके साथियों की मौत हुई.
इस बीच हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति रमना के परिवार के एक सदस्य ने दावा किया कि रमना को हाल ही में ‘स्टील मेल्ट शॉप-1’ के उस अनुभाग में तैनात किया गया था, जहां दुर्घटना हुई.
रिश्तेदार ने एक समाचार चैनल को बताया, “अगर वह अपनी पिछली तैनाती पर बने रहते तो शायद यह घटना न होती.”
मृतक श्रमिकों के परिजनों ने दावा किया कि दुर्घटना के बाद प्रबंधन के किसी भी वरिष्ठ अधिकारी ने उनसे अस्पताल में मुलाकात नहीं की.
उन्होंने कहा कि प्रबंधन और श्रमिक संघों के बीच दुर्घटना से उत्पन्न चिंताओं के समाधान के लिए बातचीत होनी चाहिए.
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.