मुंबई/नयी दिल्ली, 26 नवंबर (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि आतंकवाद को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की मोदी सरकार की नीति स्पष्ट है और पूरा विश्व भारत के आतंकवाद विरोधी अभियानों की सराहना कर रहा है तथा व्यापक समर्थन दे रहा है।
मुंबई आतंकवादी हमले के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि देते हुए शाह ने कहा कि आतंकवाद किसी एक देश के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानव जाति के लिए बहुत बड़ा अभिशाप है।
मुंबई में, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने शहर के पुलिस मुख्यालय में उन लोगों को पुष्पांजलि अर्पित की, जिन्होंने 26 नवंबर 2008 को आतंकवादियों से लड़ते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।
आतंकवादी हमले में शहीद हुए पुलिसकर्मियों के परिवारों के सदस्यों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।
हमले की 17वीं बरसी पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शहीदों को याद करते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ 26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों की बरसी पर, मैं उन वीर सैनिकों को नमन करती हूं जिन्होंने हमारे देश के लोगों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।’’ उन्होंने कहा कि राष्ट्र उनके सर्वोच्च बलिदान को कृतज्ञतापूर्वक याद करता है।
मुर्मू ने कहा, ‘‘आइए! हम हर तरह के आतंकवाद का मुकाबला करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करें। आइए! हम एक मजबूत और समृद्ध भारत के निर्माण के संकल्प के साथ प्रगति के पथ पर एक साथ आगे बढ़ें।’’
शाह ने ‘एक्स’ पर अपने संदेश में कहा कि आतंकवाद किसी एक देश के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानव जाति के लिए बहुत बड़ा अभिशाप है।
उन्होंने कहा, ‘‘मुंबई आतंकी हमले का डटकर सामना करते हुए अपना बलिदान देने वाले वीर जवानों को नमन करता हूं और इस कायराना हमले में अपनी जान गंवाने वाले सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। मोदी सरकार की आतंक के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने) की नीति स्पष्ट है, जिसे पूरा विश्व सराह रहा है और भारत के आतंकवाद विरोधी अभियानों को व्यापक समर्थन दे रहा है।’’
पाकिस्तान से आये 10 आतंकवादियों द्वारा 26 नवंबर 2008 को मुंबई के कई हिस्सों में एक साथ किये गये हमलों में 166 लोगों की जान चली गयी थी और 300 से अधिक घायल हो गये थे।
पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के 10 सशस्त्र आतंकवादी समुद्र के रास्ते शहर में घुसे थे और उन्होंने ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट होटल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) और नरीमन हाउस सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों पर एक साथ हमलों को अंजाम दिया था।
इन हमलों की वैश्विक स्तर पर निंदा हुई और इसके बाद भारत के आतंकवाद-रोधी उपायों में महत्वपूर्ण बदलाव हुए।
बुधवार को कई लोगों ने सीएसएमटी, कामा व आल्बलेस रुग्णालय तथा अन्य स्थानों पर भी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्हें पाकिस्तानी आतंकवादियों ने निशाना बनाया था।
कई लोगों ने सहायक उपनिरीक्षक तुकाराम ओम्बले की प्रतिमा ‘‘प्रेरणा स्थल’’ पर भी पुष्पांजलि अर्पित की, जो गिरगांव चौपाटी पर आतंकवादी अजमल कसाब को पकड़ते समय लाठी लेकर आतंकवादियों से भिड़ गये थे और शहीद हो गए थे।
‘एक्स’ पर पोस्ट किये गए एक बयान में, अमेरिकी दूतावास ने कहा कि वह पीड़ितों की स्मृति का सम्मान करता है और हमलों के पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ एकजुटता से खड़ा है।
बयान के अनुसार, ‘‘अमेरिका इन हमलों के लिए ज़िम्मेदार लोगों को अदालत के कठघरे में लाने के भारत के प्रयासों का लंबे समय से समर्थन करता रहा है।
दूतावास ने यह भी कहा कि अमेरिका ने इस साल तहव्वुर हुसैन राणा को इस भयावह हमले की साजिश रचने में उसकी भूमिका के लिए भारत प्रत्यर्पित किया था।
अमेरिकी दूतावास ने कहा, ‘‘राणा का प्रत्यर्पण इन जघन्य हमलों में मारे गए पीड़ितों और उनके परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 26/11 के पीड़ितों को याद करते हुए, हम अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार के साथ मिलकर, आतंकवादी कृत्यों के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के अपने दृढ़ संकल्प की पुष्टि करते हैं।’’
मुंबई में इजराइल के महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच ने बुधवार को कहा कि उनका देश और भारत न केवल आतंकवादियों से लड़ रहे हैं, बल्कि उन झूठे विमर्श से भी लड़ रहे हैं जिनमें हमलावर खुद को पीड़ित बताते हैं।
मुंबई में इज़राइल के महावाणिज्य दूतावास द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, रेवाच ने कहा कि दोनों देश कई वर्षों से आतंकवाद से पीड़ित हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘आज, दोनों देश न केवल आतंकवादियों से लड़ रहे हैं, बल्कि उन झूठे विमर्श से भी लड़ रहे हैं जो वे गढ़ने और फैलाने की कोशिश करते हैं – जहां हमलावर खुद को पीड़ित बताते हैं।’’
मुंबई आतंकवादी हमले की बरसी के अवसर पर, विचार समूह, ‘नैटस्ट्रैट’ ने 1947 से 2025 तक सीमा पार से किये गए बड़े आतंकवादी हमलों का विवरण देने वाला एक दस्तावेज़ जारी किया।
रणनीतिक और सुरक्षा मुद्दों पर शोध करने वाले स्वतंत्र, गैर-लाभकारी संस्था द्वारा संकलित इस रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘भारत के खिलाफ पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के इतिहास को बार-बार बताया जाना चाहिए।’’
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश
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