Monday, 8 August, 2022
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महाराष्ट्र सरकार का विश्वविद्यालय के अंतिम वर्ष की परीक्षाएं न कराने का फैसला छात्रों के जीवन से खिलवाड़: संघ समर्थित न्यास

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सोमवार को ये फैसला लिया था कि यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले फाइनल ईयर के छात्रों की परीक्षाएं भी नहीं होंगी. इसी फैसले का न्यास विरोध कर रहा है.

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नई दिल्ली: महाराष्ट्र सरकार के शिक्षा से जुड़े एक बड़े फैसले का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंधित शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास (एसएसयूएन) ने विरोध किया है और राज्य के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को इस संबंध में पत्र लिखा है.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सोमवार को ये फैसला लिया था कि यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले फाइनल ईयर के छात्रों की परीक्षाएं भी नहीं होंगी. उन्होंने ये तय किया कि इन छात्रों को उनके पिछले प्रदर्शन के आधार पर पास किया जाएगा. इसी फैसले का न्यास विरोध कर रहा है.

न्यास ने इस कदम को छात्रों के जीवन से खिलवाड़ बताते हुए इसके खिलाफ आदेश देने की राज्यपाल से अपील की है.

एसएसयूएन के राष्ट्रीय सचिव अतुल कोठारी ने राज्यपाल को पत्र लिखकर कहा, ‘अंतिम वर्ष के छात्रों को बिना परीक्षा के पास करना अनुचित एवम् अन्यायपूर्ण है. इस चीनी कोरोना महामारी की स्थिति में परिक्षाएं आयोजित करना कठिन कार्य है. किन्तु अंतिम वर्ष के छात्रों से जुड़ा ऐसा निर्णय लेने से पहले कई बातों पर गंभीर विचार की ज़रूरत है.’

सरकार को लगता है कि महाराष्ट्र में कोरोना महामारी को लेकर जैसे हालात बने हुए हैं उसकी वजह से परीक्षाएं कराना संभव नहीं है. ऐसे में पिछले सेमेस्टर परीक्षाओं के कुल अंक जोड़कर छात्रों को अंतिम अंक दिए जाएंगे.

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एसएसयूएन का तर्क है कि अंतिम वर्ष के अंकों के आधार पर छात्रों के भविष्य की नींव रखी जाती है. इसमें उन्हें अपने बीते प्रदर्शन को सुधारने का मौका होता है.

संस्था का कहना है कि पिछले प्रदर्शन के आधार पर सभी छात्रों का मूल्यांकन सही नहीं होगा. परिक्षाएं नहीं कराने के बजाए इन्हें देर से कराने का विकल्प तलाशा जाना चाहिए.


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न्यास ने ये तर्क भी दिया है कि अगर ऐसा होता है तो ऐसी डिग्री के आधार पर भविष्य में नौकरी और विदेश में पढ़ाई के लिए दाखिले में दिक्कत आ सकती है.

संस्था का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार ने ये रास्ता भी खुला रखा है कि जो छात्र परीक्षा देना चाहते हैं वो सितंबर, अक्टूबर और नवंबर के महीनों में संभावित तौर पर परीक्षा में शामिल हो सकते हैं. हालांकि, इसे न्यास दोहरी अनिश्चितता पैदा करने वाला कदम मान रहा है.

कोठारी ने राज्यपाल से अपील करते हुए कहा, ‘आपसे विनम्र प्रार्थना है कि कुलाधिपति के अधिकारों का उपयोग करते हुए महाराष्ट्र सरकार द्वारा छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इस निर्णय को वापस लेने का राज्य सरकार को आदेश दें.’

सीएम ठाकरे को लिखी गई चिट्ठी में भी कोठारी ने इसी मांग को दोहराते हुए कहा, ‘शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास आपसे मांग करता है कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इस निर्णय को तत्काल वापस लिया जाए.’

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