तिरुवनंतपुरम, नौ नवंबर (भाषा) केरल विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग की प्रमुख पर एक शोधार्थी के खिलाफ जातिवादी टिप्पणी करने और उसकी थीसिस पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।
श्रीकार्यम पुलिस ने विश्वविद्यालय के करियावट्टोम परिसर में संस्कृत विभाग की प्रमुख और प्राच्य अध्ययन संकाय की डीन सी.एन. विजयकुमारी के खिलाफ मामला दर्ज किया। यह मामला वंचियूर निवासी और विभाग के शोधार्थी विपिन विजयन की शिकायत पर दर्ज किया गया।
शनिवार देर रात दर्ज की गई प्राथमिकी के अनुसार, विजयकुमारी ने 15 अक्टूबर को विजयन की मौखिक परीक्षा के बाद उनकी थीसिस पर हस्ताक्षर करने से कथित तौर पर इनकार कर दिया था।
प्राथमिकी में कहा गया है कि बाद में जब विजयन ने विजयकुमारी से दोबारा संपर्क कर हस्ताक्षर करने का अनुरोध किया ताकि उनकी पीएचडी प्रक्रिया पूरी हो सके तो आरोपी ने अन्य शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति में कथित तौर पर जातिवादी टिप्पणी की।
इसमें कहा गया है कि शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब विजयन ने 2015 में विजयकुमारी के निरीक्षण में करियावट्टोम परिसर में एम.फिल. की पढ़ाई शुरू की थी वह तभी से इसी प्रकार की जाति-आधारित टिप्पणियां कर रही हैं।
प्राथमिकी में कहा गया है कि विजयकुमारी ने शिकायतकर्ता से कथित तौर पर कहा था कि निचली जातियों के लोग संस्कृत नहीं सीख सकते और इन लोगों के उनके कमरे में आने पर वह उसे पानी से साफ करेंगी।
पुलिस ने बताया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(आर) और 3(1)(एस) के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह धारा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति समुदाय के किसी सदस्य को सार्वजनिक रूप से जानबूझकर जातिसूचक नाम लेकर अपमानित करने और अपशब्द कहने के अपराध से संबंधित है।
अधिकारियों ने बताया कि ये अपराध गैर-जमानती हैं और प्रोफेसर की गिरफ्तारी पर फैसला लेने से पहले विस्तृत जांच की जाएगी।
विजयकुमारी ने किसी भी प्रकार की जातिवादी टिप्पणी करने से इनकार किया है और दावा किया है कि उन्होंने थीसिस पर हस्ताक्षर करने से इसलिए इनकार कर दिया था क्योंकि शोधकर्ता को संस्कृत का पर्याप्त ज्ञान नहीं था और उनके काम में कई खामियां थीं।
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सिम्मी प्रशांत
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