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ज्यां द्रेज | फेसबुक, राइट टू फूड कैंपेन इंडिया
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नई दिल्ली: जाने माने अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज और दो एक्टिविस्टों को गुरुवार को झारखंड पुलिस ने बिना किसी सूचना के अपनी गिरफ्त में ले लिया.पुलिस ने उन्हें गरहवा जिले से हिरासत में लिया.जहां वे एक बैठक आयोजित करने जा रहे थे. पुलिस ने दो घंटे की पुछताछ के बाद उन्हें रिहा कर दिया. द्रेज के साथ खाने का अधिकार मुहिम पर काम कर रहे विवेक कुमार और अनुज भी थे.यह तीनों लोग बिशनपुर में ​जिला प्रशासन से अनुमति के बगैर बैठक करने जा रहे थे.

इस मामले में दिप्रिंट ने जब विवेक कुमार से बात की तो उन्होंने कहा कि ‘हम गरहवा जिले में बिना अनुमति के बैठक करने जा रहे थे.हमें यह देख रहे थे कि आगे क्या करना है.इस दौरान पुलिस ने हमें हिरासत में ले लिया.पुलिस ने इस दौरान हमें एक बांड पर साइन करने के लिए कहा इसमें लिखा था कि उन्हें सरकार से कोई आपत्ति नहीं है. हम लोगों ने बांड पर साइन करने से इंकार कर दिया.

पलामू जिले के डीआईजी ने इंडियन एक्सप्रेस अखबार को बताया कि वे बिना सब-डिविजनल अधिकारी की परमिशन के सामाजिक मुद्दे पर मीटिंग का आयोजन कर रहे थे. उन्हें क्षेत्र में चुनाव आचार संहिता लगने के कारण गिरफ्तार किया गया था. इस मामले में जब गरहवा पुलिस अधीक्षक और ​कलेक्टर से बात करनी कोशिश की तो उनसे संपर्क नहीं हो सका.

द्रेज खाने के अधिकार के लिए लंबे समय से कार्य कर रहे है. वे कई वर्षों से झारखंड व अन्य राज्यों में काम कर रहे है. राइट टू फूड एसोसिएश ने एक बयान जारी कर कहा ​है कि ‘हमारा मानना है कि अन्न का अधिकार हर किसी का मूल अधिकार है.’ जिस तरह की रैली और बैठक द्रेज गेहरवा में आयोजित कर रहे थे वह केवल लोगों को जागरुक करने के लिए हो रही थी. यह कार्यक्रम कई वर्षों से संस्था के सदस्यों द्वारा चलाया जा रहा है. वहीं वर्तमान समय में लोगों की प्राथमिकता राजनीतिक पार्टियां नहीं है.हम जैसे संगठन इस मसले पर काम करेंगे तभी राज्य सरकार का ध्यान इसी ओर जाएगा.

(इस लेख को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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