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Tuesday, 9 June, 2026
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सरकार के वक्फ रजिस्ट्रेशन पोर्टल UMEED को एक साल पूरा: 1 लाख संपत्तियां अब भी गायब

वक्फ (संशोधन) अधिनियम विपक्षी दलों और समुदाय से जुड़े संगठनों के भारी विरोध के बीच पारित हुआ था. उनका दावा था कि इससे सरकार को वक्फ संपत्तियों पर कब्ज़ा करने का रास्ता मिल जाएगा.

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नई दिल्ली: केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने पिछले साल 6 जून को UMEED पोर्टल लॉन्च करते समय देश के 38 वक्फ बोर्डों को छह महीने के भीतर सभी वक्फ संपत्तियों को इस एकल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज करने का निर्देश दिया था.

छह महीने बाद केवल 27 प्रतिशत संपत्तियां ही पोर्टल पर दर्ज हो पाई थीं. इसके बाद सरकार ने चुपचाप समय-सीमा बढ़ा दी. छह महीने और गुजरने के बाद दिप्रिंट द्वारा विश्लेषित प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, भारत की 8.72 लाख वक्फ संपत्तियों में से 5,43,597 को अंतिम मंजूरी मिल चुकी है. यह कुल संपत्तियों का लगभग 62 प्रतिशत है.

बाकी संपत्तियों में से कुछ अभी भी प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में हैं, जबकि 1 लाख से अधिक वक्फ संपत्तियों के लिए अब तक कोई रिकॉर्ड जमा ही नहीं किया गया है.

UMEED (यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट) पोर्टल संसद द्वारा विवादित वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 पारित किए जाने के बाद बनाया गया था. यह कानून तीखी राजनीतिक बहस और समुदाय से जुड़े संगठनों के विरोध के बीच पारित हुआ था.

भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का कहना था कि यह संशोधन वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाएगा. वहीं आलोचकों का दावा था कि इससे सरकार को वक्फ संपत्तियों में हस्तक्षेप करने और उन पर नियंत्रण करने का मौका मिल जाएगा.

पोर्टल शुरू होने के बाद पंजाब, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों ने पूरे साल अच्छा प्रदर्शन किया.

वहीं पश्चिम बंगाल, जहां दिसंबर की समय-सीमा तक केवल 716 संपत्तियां ही दर्ज हुई थीं और वहां तृणमूल कांग्रेस सरकार इस प्रक्रिया के प्रति अनिच्छुक मानी जा रही थी, अब 86,222 मंजूरियों तक पहुंच गया है. मई 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद नई सरकार के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नियमों का पालन शुरू किया. हालांकि अंतिम आंकड़े स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन अधिकांश आवेदन उनके सत्ता संभालने के बाद आए हैं.

दूसरी ओर, दिल्ली और महाराष्ट्र में प्रक्रिया अभी भी वेरिफिकेशन के चरण में काफी धीमी बनी हुई है. पिछले हफ्ते अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के रिफॉर्म उत्सव कार्यक्रम में बोलते हुए रिजिजू ने कहा कि जिन संपत्तियों का पंजीकरण नहीं हुआ है, उनका भविष्य वक्फ बोर्डों के लिए अच्छा नहीं दिखता.

उन्होंने कहा, “अभी यह देखना बाकी है कि अपंजीकृत संपत्तियों का क्या होगा, लेकिन संभावना है कि वे सरकार के पास चली जाएंगी.”

8 जून को तैयार की गई UMEED पोर्टल प्रोग्रेस रिपोर्ट में देश के सभी 38 राज्य वक्फ बोर्डों की स्थिति दिखाई गई है. 5,43,597 मंजूरियों के अलावा 69,257 आवेदन अभी सत्यापन के चरण में हैं. 17,979 आवेदन सत्यापन पार कर चुके हैं और अंतिम मंजूरी का इंतज़ार कर रहे हैं. वहीं 49,899 आवेदन शुरू तो किए गए हैं, लेकिन अभी आगे की प्रक्रिया के लिए जमा नहीं किए गए हैं. अस्वीकृत आवेदनों की बात करें तो 85,738 प्रविष्टियों को खारिज कर सुधार के लिए वापस भेजा गया है.

पोर्टल शुरू होने के बाद से अब तक कुल 7,66,470 संपत्तियां किसी न किसी रूप में इस प्रणाली में दर्ज हो चुकी हैं. इसका मतलब है कि सरकार के पुराने आंकड़ों के अनुसार करीब 1 लाख संपत्तियां ऐसी हैं जो अब तक UMEED पोर्टल पर किसी भी रूप में दिखाई नहीं दी हैं.

इन्फोग्राफिक्स: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट
इन्फोग्राफिक्स: श्रुति नैथानी/दिप्रिंट

रिजिजू ने रिफॉर्म उत्सव के दौरान प्रगति की “धीमी” रफ्तार को भी स्वीकार किया.

उन्होंने कहा, “पोर्टल से जुड़ी समस्याओं, तकनीकी गड़बड़ियों और मुतवल्लियों के सिस्टम को ठीक से न समझ पाने के कारण काम की रफ्तार कुछ धीमी रही है.”

उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय हर संभव सहायता दे रहा है और “जल्द ही उनकी मदद के लिए कुछ अतिरिक्त उपाय भी लेकर आएगा.”

पृष्ठभूमि

UMEED से पहले वक्फ संपत्तियों का रिकॉर्ड WAMSI (वक्फ एसेट्स मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया) में रखा जाता था, जो 2009 से चल रहा था. WAMSI से पहले, इन रिकॉर्डों को एक सदी से भी ज्यादा समय तक जिला स्तर के रजिस्टरों में उर्दू और अरबी भाषा में रखा जाता था.

WAMSI के आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 38 लाख एकड़ से ज्यादा भूमि पर फैली करीब 8.72 लाख अचल वक्फ संपत्तियां मौजूद थीं, जिनकी अनुमानित कीमत 1.2 लाख करोड़ रुपये थी. सरकार ने भारत को दुनिया में सबसे ज्यादा वक्फ संपत्तियों वाला देश बताया है. भारत के भीतर वक्फ संपत्तियां ज़मीन के मामले में केवल सशस्त्र बलों और भारतीय रेलवे के बाद तीसरे स्थान पर आती हैं.

WAMSI के एक अलग विश्लेषण से पता चला कि 8.72 लाख संपत्तियों के लिए केवल 9,279 ओनरशिप डॉक्यूमेंट ही अपलोड किए गए थे और केवल 1,083 वक्फ डीड (वक्फ से जुड़े कानूनी दस्तावेज़) डिजिटल रूप में उपलब्ध थे. करीब 50 प्रतिशत संपत्तियों की स्थिति के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी. इसी समस्या को दूर करने के लिए UMEED में थ्री-टियर वर्कफ्लो शुरू की गई. सबसे पहले किसी वक्फ संपत्ति का मुतवल्ली उस संपत्ति का विवरण पोर्टल पर अपलोड करता है. इस भूमिका में मुतवल्ली को मेकर कहा जाता है.

इसके बाद यह रिकॉर्ड वक्फ बोर्ड के एक अधिकारी के पास जाता है, जिसे चैकर कहा जाता है. वह जमा किए गए दस्तावेजों और भूमि रिकॉर्ड के आधार पर जानकारी की जांच करता है.

चैकर की मंजूरी मिलने के बाद यह रिकॉर्ड वक्फ बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी, आमतौर पर सीईओ, के पास जाता है. उन्हें अप्रूवर कहा जाता है और वही अंतिम मंजूरी देते हैं.

किसी संपत्ति को UMEED पर पूरी तरह रजिस्टर्ड तभी माना जाता है, जब वह इन तीनों चरणों को पार कर ले. अगर चैकर या अप्रूवर किसी रिकॉर्ड को खारिज कर देता है, तो वह सुधार के लिए वापस मेकर के पास भेज दिया जाता है और पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू होती है. इस व्यवस्था को अनिवार्य बनाने वाला वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 शुरू से ही विवादों में रहा.

लोकसभा ने 12 घंटे की बहस के बाद इस विधेयक को 288-232 मतों से पारित किया था. वहीं राज्यसभा में 14 घंटे की चर्चा के बाद यह 128-95 मतों से पारित हुआ. इस कानून को चुनौती देने वाली 65 से ज्यादा याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गईं. इसके बाद सितंबर 2025 में अदालत ने कानून के दो प्रावधानों पर आंशिक रोक लगा दी.

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पोर्टल को अवैध बताया और इसे निलंबित करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. हालांकि, अदालत ने यह मांग स्वीकार नहीं की.

दो महीने में सिर्फ 69 रजिस्ट्रेशन

पोर्टल शुरू होने के शुरुआती दो महीनों ने ही इसकी रफ्तार का संकेत दे दिया था. लॉन्च के दो महीने बाद UMEED पर केवल 69 संपत्तियां ही अपलोड की गई थीं और सिर्फ 663 मुतवल्लियों ने डेटा एंट्री की प्रक्रिया शुरू की थी. इस दौरान पोर्टल कई बार क्रैश हुआ. बिहार में एक ऐसे वक्फ के मुतवल्ली, जिसकी स्थापना औरंगजेब की मौत के लगभग दस साल बाद हुई थी, अब भी हेल्पडेस्क को पत्र लिख रहे थे क्योंकि वे एक वक्फ गांव का रिकॉर्ड अपलोड नहीं कर पा रहे थे.

कई राज्यों के वक्फ बोर्डों ने शिकायत की कि पोर्टल सर्वे और गजट में अधिसूचित (नोटिफाइड) संपत्तियों को दर्ज करने में सक्षम नहीं है. मध्य प्रदेश के एक मुतवल्ली ने तो सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पोर्टल को “अपने कानूनी उद्देश्य को पूरा करने में तकनीकी रूप से अक्षम” बताया. 5 दिसंबर, जो अंतिम तारीख थी, उस दिन रिजिजू ने पत्रकारों से कहा, “आज आखिरी दिन है और अभी भी लाखों वक्फ संपत्तियां पंजीकृत नहीं हुई हैं. कई सांसद और सामाजिक नेता मेरे पास आए और उन्होंने बताया कि 9 लाख से ज्यादा वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण कराने में दिक्कतें आ रही हैं.”

उन्होंने उस समय समय-सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया.

6 दिसंबर की आधी रात को पोर्टल बंद कर दिया गया. उस समय तक 5,17,040 संपत्तियों की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी थी और 2,16,905 संपत्तियों को अंतिम मंजूरी मिल चुकी थी, जो कुल संपत्तियों का लगभग 27 प्रतिशत था. इसके बाद रिजिजू ने घोषणा की कि जिन लोगों ने पंजीकरण नहीं कराया है, उन पर तीन महीने तक कोई जुर्माना नहीं लगाया जाएगा. उन्होंने मुतवल्लियों से कहा कि वे समय बढ़ाने के लिए अपने-अपने राज्य के वक्फ ट्रिब्यूनल से संपर्क करें.

राज्य-दर-राज्य तस्वीर

रिपोर्ट में सभी 38 बोर्ड शामिल हैं और इसमें बहुत ज़्यादा फ़र्क है. पंजाब में 25,373 अप्रूव्ड प्रॉपर्टीज़ हैं, जिनमें से बहुत कम अभी पाइपलाइन में हैं. जम्मू और कश्मीर में 25,248 अप्रूव्ड हैं. तेलंगाना ने 54,550 को फ़ाइनल अप्रूवल तक पहुंचाया है, जो देश भर में किसी भी बोर्ड से दूसरा सबसे ज़्यादा है. आंध्र प्रदेश में 14,698 हैं.

दिल्ली दूसरी तरफ है: 64 अप्रूव्ड, चेकर्स के पास 2,846 एंट्रीज़ पेंडिंग हैं, और 269 अभी भी शुरू होने वाले स्टेज पर हैं, डेडलाइन के छह महीने बाद वेरिफ़िकेशन स्टेज पर पाइपलाइन लगभग पूरी तरह से रुकी हुई है.

महाराष्ट्र में 17,178 अप्रूव्ड हैं लेकिन चेकर्स के पास 27,926 एंट्रीज़ पेंडिंग हैं और अप्रूवर्स के पास 9,790, इसका मतलब है कि बड़ी मात्रा में अपलोड किया गया है लेकिन चेन में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है. केरल में 49,443 अप्रूव्ड हैं, लेकिन चेकर्स के पास 12,141 एंट्रीज़ और अप्रूवर्स के पास 4,013 एंट्रीज़ बाकी हैं.

अरुणाचल प्रदेश, गोवा, लद्दाख, मिजोरम, नागालैंड और सिक्किम में हर कॉलम में ज़ीरो दिखता है.

पश्चिम बंगाल: 716 से 86,222 तक

दिसंबर 2025 और लेटेस्ट रिपोर्ट के बीच सबसे खास बदलाव पश्चिम बंगाल में हुआ है. दिसंबर की डेडलाइन तक, राज्य ने 80,480 में से 716 प्रॉपर्टी रजिस्टर की थीं, जो 0.89 परसेंट का कम्प्लीशन रेट है. उस समय की तृणमूल कांग्रेस सरकार ने महीनों तक वक्फ अमेंडमेंट एक्ट को लागू करने का विरोध किया था, जिसके बाद अधिकारियों को पोर्टल के आखिरी हफ्ते में ही डिटेल्स अपलोड करने का निर्देश दिया गया था.

8 जून की रिपोर्ट से पता चलता है कि पश्चिम बंगाल में 86,222 प्रॉपर्टीज़ को मंज़ूरी मिली है, 7,827 चेकिंग के लिए पेंडिंग हैं, और 3,760 अभी भी शुरू होने वाले स्टेज पर हैं. कुल 1,10,491 की पाइपलाइन अब देश में सबसे बड़ी है.

BJP ने मई 2026 के असेंबली इलेक्शन में तृणमूल कांग्रेस से पश्चिम बंगाल का कंट्रोल छीन लिया, और शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. नई सरकार ने UMEED फ्रेमवर्क को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया, और उसके बाद के हफ्तों में मंज़ूरी मिलती रही. पश्चिम बंगाल दिसंबर में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले बड़े राज्य से जून तक पूरी तरह से मंज़ूरी देने वाले राज्यों में सबसे ऊपर पहुंच गया.

उत्तर प्रदेश: सबसे जटिल मामला

उत्तर प्रदेश में देश के किसी भी अन्य राज्य से ज्यादा वक्फ संपत्तियां हैं और पोर्टल पर इसके आंकड़े सबसे ज्यादा जटिल दिखाई देते हैं. लगातार तकनीकी दिक्कतों का हवाला देते हुए यूपी वक्फ ट्रिब्यूनल ने सुन्नी और शिया दोनों वक्फ बोर्डों को 5 जून 2026 तक छह महीने का अतिरिक्त समय दिया था.

रिपोर्ट के अनुसार, यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड की 1,03,540 संपत्तियों को मंजूरी मिल चुकी है, जो देश के किसी भी एकल वक्फ बोर्ड में सबसे ज्यादा है. लेकिन रिपोर्ट यह भी दिखाती है कि 13,880 संपत्तियां अभी भी शुरुआती (इनिशिएटेड) चरण में हैं, 5,551 संपत्तियां चेकर के पास लंबित हैं और 29,747 संपत्तियों को खारिज कर सुधार के लिए मेकर के पास वापस भेजा गया है. यह देश के किसी भी बोर्ड में सबसे ज्यादा रिजेक्शन का आंकड़ा है.

यूपी शिया वक्फ बोर्ड की 4,751 संपत्तियों को मंजूरी मिली है, जबकि 2,059 आवेदन खारिज किए गए हैं. बढ़ी हुई समय-सीमा के दौरान चलाए गए सत्यापन अभियान में भी कई बातें सामने आईं. बड़े स्तर पर हुई जांच में भारी गड़बड़ियां मिलने के बाद अधिकारियों ने 31,328 संपत्तियों का पंजीकरण रद्द कर दिया.

अधिकारियों ने कहा कि जांच के दौरान अपलोड किए गए विवरण और राजस्व रिकॉर्ड में अंतर मिलने के कारण 31,192 दावों को खारिज कर दिया गया. इनमें गलत खसरा नंबर और भूमि के क्षेत्रफल में असंगतियां जैसी समस्याएं शामिल थीं. मई के आखिरी हफ्ते में जारी एक बयान में उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा था कि जो संपत्तियां पोर्टल पर पंजीकृत नहीं होंगी, उन्हें जब्त किया जा सकता है.

जिन संपत्तियों का पंजीकरण रद्द किया गया था, उन्हें नोटिस जारी किए गए थे और कमियों को दूर करने के लिए 5 जून तक का समय दिया गया था. उन्होंने कहा, “इसके बाद केवल वही संपत्तियां वक्फ के पास रहेंगी जिनके रिकॉर्ड वैध होंगे.”

यह समय-सीमा तीन दिन पहले समाप्त हो चुकी है.

1.06 लाख संपत्तियों का सवाल

हालांकि, 5,43,597 संपत्तियों को मंजूरी मिल चुकी है, फिर भी WAMSI के रिकॉर्ड और UMEED पर दिखाई देने वाले आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है. 9 दिसंबर 2024 को रिजिजू ने राज्यसभा में बताया था कि WAMSI के आंकड़ों के अनुसार भारत में 8,72,352 अचल वक्फ संपत्तियां हैं.

8 जून की रिपोर्ट के अनुसार, UMEED पर सभी चरणों को मिलाकर 7,66,470 संपत्तियां दर्ज हैं. मार्च 2026 तक करीब 1.05 लाख वक्फ संपत्तियां ऐसी थीं जिन्हें UMEED पर बिल्कुल भी जमा नहीं किया गया था. सरकार ने अब तक इस अंतर को सीधे तौर पर नहीं समझाया है.

सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 की संवैधानिक वैधता पर फैसला नहीं सुनाया है. इस बीच 85,000 से ज्यादा प्रविष्टियों को खारिज कर सुधार के लिए मुतवल्लियों के पास वापस भेजा जा चुका है.

पिछले हफ्ते रिजिजू का यह बयान कि अपंजीकृत संपत्तियां “संभवतः सरकार के पास चली जाएंगी”, इस मामले में सरकार की अब तक की सबसे स्पष्ट टिप्पणी मानी जा रही है. हालांकि, यह प्रक्रिया कैसे चलेगी और जब कानून की वैधता खुद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के तहत है, तब किस कानूनी आधार पर आगे बढ़ा जाएगा—इन सवालों का जवाब रिजिजू ने फिलहाल नहीं दिया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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