Wednesday, 25 May, 2022
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सरकार ने संसद को बताया—2017 से अब तक 6 लाख से अधिक लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ी

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा को दिए एक लिखित जवाब में बताया कि 2016 से 2020 के बीच 4,177 लोगों को भारतीय नागरिकता दी गई. इसके लिए कुल 10,645 लोगों ने आवेदन किया था.

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नई दिल्ली: सरकार ने मंगलवार को संसद को बताया कि 2017 से लेकर 30 सितंबर 2021 के बीच 6 लाख से अधिक लोगों ने दूसरे देशों के लिए भारत की नागरिकता छोड़ दी है.

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि 2017 में 1.33 लाख भारतीयों ने नागरिकता छोड़ी, 2018 में यह संख्या 1.34 लाख, 2019 में 1.44 लाख और 2020 में 85,248 थी. 2021 में 30 सितंबर तक यह आंकड़ा 1.11 लाख हो गया है.

राय ने बताया कि विदेश मंत्रालय के पास उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अभी कुल 1,33,83,718 भारतीय नागरिक विदेशों में रह रहे हैं.

राय ने आगे यह भी बताया कि 2016 और 2020 के बीच 4,177 लोगों को भारतीय नागरिकता दी गई. उन्होंने कहा कि इस अवधि के दौरान कुल 10,645 लोगों ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया था.

इनमें सबसे ज्यादा आवेदन पाकिस्तान (7,782) से आए, उसके बाद अफगानिस्तान (795), अमेरिका (227), श्रीलंका (205), बांग्लादेश (184), नेपाल (167) और केन्या (185) का नंबर रहा.

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केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2016 में कुल 2,262 लोगों ने भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया, जबकि 2017 में यह संख्या 855, 2018 में 1,758, 2019 में 4,224 और 2020 में 1,546 रही.

राय ने लोकसभा को बताया कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (सीएए) के तहत पात्र लोग नियम अधिसूचित होने के बाद नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं.

सीएए का उद्देश्य मुस्लिम बहुल पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया में तेजी लाना है.

हालांकि, सीएए 12 दिसंबर 2019 को अधिसूचित किया गया था और यह 10 जनवरी, 2020 से प्रभावी घोषित किया गया था, लेकिन नियमों को अधिसूचित नहीं किए जाने के कारण इसे अभी तक लागू नहीं किया जा सका है.


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‘राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी पर कोई फैसला नहीं’

राय ने अपने जवाब में यह बात भी दोहराई कि सरकार ने अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) तैयार करने जैसा कोई निर्णय नहीं लिया है. गौरतलब है कि असम में ऐसी पहल को लेकर ही खासा विवाद खड़ा हो गया था.

20 नवंबर 2019 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उस समय नागरिकता संशोधन विधेयक पर जारी बहस के दौरान कहा था कि एक राष्ट्रव्यापी एनआरसी पर काम चल रहा है. उसके बाद अगले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ किया कि उनकी सरकार या संसद ने एनआरसी पर कोई चर्चा नहीं की है. उन्होंने कहा, ‘इस बारे में कोई बातचीत नहीं हुई है.’

सीएए पारित करने के सरकार के फैसले के खिलाफ 2019 में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था.


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