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Thursday, 12 March, 2026
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संकटग्रस्त आवासीय परियोजनाओं के लिए पुनरुद्धार कोष बनाने पर करें विचार: न्यायालय ने केंद्र से कहा

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नयी दिल्ली, 13 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने केंद्र से घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए संकटग्रस्त परियोजनाओं के लिए एक पुनरुद्धार कोष बनाने पर विचार करने को कहा है।

न्यायालय ने कर देने वाले मध्यम वर्ग के नागरिकों की परेशानियों का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें से कई के लिए घर का समान अधूरा रह गया है।

न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि राज्य का संवैधानिक दायित्व है कि वह एक ऐसा ढांचा बनाए और उसे सख्ती से लागू करे जहां किसी भी डेवलपर को घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी या शोषण करने की अनुमति न हो।

पीठ ने कहा कि देश की शहरी नीति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आवासीय परियोजनाएं समय पर पूरी हों।

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि यह जरूरी है कि रेरा प्राधिकरण ”दंतविहीन बाघ” न बन जाएं और उन्हें पर्याप्त बुनियादी ढांचे, सशक्त न्यायाधिकरणों और प्रभावी प्रवर्तन तंत्रों से लैस किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि रेरा के आदेशों को अक्षरशः और शीघ्रता से लागू करना चाहिए।

यह टिप्पणी करते हुए कि सरकार ”मूक दर्शक” बनी नहीं रह सकती, पीठ ने कहा कि सरकार संवैधानिक रूप से घर खरीदारों और समग्र अर्थव्यवस्था के हितों की रक्षा करने के लिए बाध्य है।

पीठ ने कहा कि केंद्र राष्ट्रीय संपत्ति पुनर्निर्माण कंपनी लिमिटेड (एनएआरसीएल) या अन्य की तर्ज पर रियल एस्टेट और निर्माण केंद्रित सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा या सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से एक निकाय की स्थापना पर भी विचार कर सकता है।

न्यायालय ने कहा कि कुछ मामलों में पूरा या पर्याप्त भुगतान करने के बावजूद निर्माण शुरू भी नहीं हुआ है और भारी भरकम भुगतान करने के बावजूद घर न होने की चिंता स्वास्थ्य, उत्पादकता और सम्मान पर गंभीर असर डालती है।

पीठ ने कहा, ”केंद्र सरकार सीआईआरपी (कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया) से गुजर रही संकटग्रस्त परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए एनएआरसीएल के तहत एक पुनरुद्धार कोष स्थापित करने पर भी विचार कर सकती है।”

न्यायालय ने राज्यों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि रेरा प्राधिकरणों में पर्याप्त बुनियादी ढांचा, विशेषज्ञ और संसाधन हों।

पीठ ने कहा कि तीन महीने के भीतर उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जानी चाहिए, जिसमें कानून, आवास मंत्रालय और रियल एस्टेट तथा वित्त के क्षेत्र विशेषज्ञ शामिल हों। यह समिति रियल एस्टेट क्षेत्र में स्वच्छता और विश्वसनीयता लाने के लिए सुझाव देगी।

भाषा पाण्डेय

पाण्डेय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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