Monday, 24 January, 2022
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जुलाई-सितंबर 2021 में 9 क्षेत्रों में बढ़ीं 2 लाख नौकरियां, अधिक महिलाओं को मिला मौक़ा: सरकारी रिपोर्ट

रोज़गार मंत्रालय के तिमाही रोज़गार सर्वेक्षण से पता चलता है कि रोज़गार में लगी महिला कामगारों का प्रतिशत अप्रैल-जून में 29.3 से बढ़कर जुलाई-सितंबर में 32.1 हो गया.

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नई दिल्ली: कोविड-19 की दूसरी लहर के दब जाने के साथ, पिछली तिमाही के मुक़ाबले जुलाई से सितंबर 2021 के बीच नौ प्रमुख क्षेत्रों में, जिनमें मैन्युफेक्चरिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य और आईटी-बीपीओ क्षेत्र शामिल हैं, नौकरियों की अनुमानित संख्या, 2 लाख के इज़ाफे के साथ कुल 3.10 करोड़ पहुंच गई. ये ख़ुलासा सोमवार को जारी श्रम मंत्रालय के तिमाही रोज़गार सर्वेक्षण (क्यूईएस) के, दूसरे चरण में किया गया है.

सर्वे से पता चला है कि इन क्षेत्रों में लगीं महिला कामगारों के प्रतिशत में भी इज़ाफा हुआ है.

कुल अनुमानित नौकरियां अप्रैल-जून तिमाही के 3.08 करोड़ से बढ़कर, जुलाई-सितंबर 2021 में 3.10 करोड़ हो गईं, जिसमें सबसे ज़्यादा वृद्धि मैन्युफेक्चरिंग क्षेत्र में देखी गई, जो अब कुल रोज़गार का 39.1 प्रतिशत कवर करता है जिसके बाद शिक्षा (22 प्रतिशत) और हेल्थ (10.8 प्रतिशत) है.

तिमाही सर्वेक्षण में रोज़गार के आंकड़ों की तुलना 2013-14 में हुई छठी आर्थिक जनगणना से की गई है, जब इन नौ क्षेत्रों में मिलाकर कुल नौकरियां 2.37 करोड़ बताई गईं थीं. सातवीं आर्थिक जनगणना के नतीजे, जो 2020 में की गई थी, अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.

इस सर्वे में शामिल नौ क्षेत्र हैं- मैन्युफेक्चरिंग, शिक्षा, परिवहन, व्यापार, निर्माण, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी)-बिज़नेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ), अकॉमोडेशन और रेस्टोरेंट, स्वास्थ्य और वित्तीय सेवाएं.

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महिला कामगारों के प्रतिशत में इज़ाफा

केंद्रीय श्रम मंत्री भूपेंदर यादव ने रिपोर्ट जारी करने के बाद कहा, ‘क्यूईएस से पता चलता है कि अप्रैल-जून तिमाही के मुक़ाबले, जुलाई-सितंबर तिमाही में नौकरियों की संख्या में दो लाख का इज़ाफा हुआ है जो कि एक स्वस्थ संकेत है’.

यादव ने कहा कि तिमाही सर्वे में एक और अहम प्रवृत्ति ये देखने में आई कि महिला कामगारों के कुल प्रतिशत में भी बढ़ोतरी देखी गई- जो अप्रैल-जुलाई तिमाही के 29.3 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल-जून तिमाही में 32.1 प्रतिशत हो गई.

ग्राफिक्स: रमनदीप कौर | दिप्रिंट

पहले, रोज़गार क्षेत्र का डेटा हासिल करने के लिए सरकार आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) का इस्तेमाल करती थी जिसे सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा कराया जाता है.  यादव ने कहा कि पीएलएफएस श्रम बाज़ार की केवल सप्लाई पक्ष की जानकारी देता था.

इसी कमी को पूरा करने के लिए पिछले साल श्रम मंत्रालय ने अखिल भारतीय त्रैमासिक प्रतिष्ठान आधारित रोजगार सर्वेक्षण (एक्यूईईएस) शुरू किया. इसका लक्ष्य अर्थव्यवस्था के नौ ग़ैर-कृषि क्षेत्रों के लिए  रोज़गार, रिक्तियां, प्रशिक्षण और अन्य संबंधित मानदंडों का अनुमान उपलब्ध कराना है.

क्यूईएस दरअसल एक्यूईईएस का ही एक अंश है जिसमें उन प्रतिष्ठानों को कवर किया जाता है जिनमें कम से कम 10 कामगार हों. दूसरे अंश एएफईएस (एरिया फ्रेम इस्टेबलिशमेंट सर्वे) में उन प्रतिष्ठानों की जानकारी जुटाई जाएगी जहां 10 से कम श्रमिक काम करते हैं.

यादव ने आगे कहा, ‘क्यूईएस नियमित अंतराल पर मांग पक्ष की ओर से रोज़गार की एक व्यापक तस्वीर पेश करता है. इस डेटा से सरकार को साक्ष्य-आधारित नीति बनाने में सहायता मिलेगी’.

मैन्युफेक्चरिंग, शिक्षा में सबसे अधिक रोज़गार

क्यूईएस रिपोर्ट में पता चला कि कुल अनुमानित नौकरियों में 39 प्रतिशत केवल मैन्युफेक्चरिंग क्षेत्र में थीं, जिसके बाद 22 प्रतिशत के साथ शिक्षा और क़रीब 10-10 प्रतिशत के साथ, स्वास्थ्य और आईटी-बीपीओ क्षेत्र थे. कुल अनुमानित श्रमिकों के 5.3 प्रतिशत और 4.6 प्रतिशत, क्रमश: व्यापार और परिवहन क्षेत्र में लगे हुए थे.

सर्वे में ये भी पता चला कि इन नौ चयनित क्षेत्रों में, कुल अनुमानित श्रमबल का 87 प्रतिशत नियमित कर्मचारी हैं और केवल 2 प्रतिशत आकस्मिक कर्मचारी हैं लेकिन निर्माण क्षेत्र में 20 प्रतिशत संविदा श्रमिक थे जबकि 6.4 प्रतिशत आकस्मिक श्रमिक थे.

इसके अलावा, 98.3 प्रतिशत प्रतिष्ठान घरों से बाहर स्थित थे, हालांकि अकॉमोडेशन और रेस्टोरेंट्स क्षेत्र में 5.1 इकाइयां- जो सभी क्षेत्रों में सबसे अधिक संख्या थी- घरों के अंदर से संचालित होती पाई गईं.

90% इकाइयों में 100 से कम श्रमिक

क्यूईएस से पता चलता है कि अनुमान के मुताबिक़, सर्वे किए गए क़रीब 90 प्रतिशत प्रतिष्ठान 100 से कम श्रमिकों के साथ काम कर रहे थे. हालांकि, कम से कम 30 प्रतिशत आईटी-बीपीओ प्रतिष्ठानों में कम से कम 100 श्रमिक काम कर रहे थे जिनमें क़रीब 12 प्रतिशत में 500 या उससे अधिक लोग लगे हुए थे. क्यूईएस के पहले राउण्ड में, आईटी-बीपीओ सेक्टर में 91 प्रतिशत प्रतिष्ठान 100 से कम श्रमिकों के साथ काम करते बताए गए थे.

स्वास्थ्य के क्षेत्र में 19 प्रतिष्ठानों में 100 या उससे ज़्यादा लोग काम पर लगे थे. परिवहन क्षेत्र में भी कुल अनुमानित प्रतिष्ठानों के 14 प्रतिशत 100 या उससे अधिक श्रमिकों के साथ काम कर रहे थे.

शैक्षिक योग्यता

सर्वे में पता चलता है कि नौ में से सात क्षेत्रों (शिक्षा और स्वास्थ्य को अलावा) में काम करने वाले 28.4 प्रतिशत लोग, मैट्रिकुलेट्स/सेकेंडरी या उससे कम पढ़े हुए थे जबकि 37 प्रतिशत ग्रेजुएट्स या उच्च योग्यता वाले थे.

91.6 प्रतिशत के साथ, ग्रेजुएट्स या उससे ऊंची शिक्षा वाले सबसे अधिक लोग आईटी/बीपीओ क्षेत्र में काम करते पाए गए जिसके बाद 59.8 प्रतिशत वित्तीय सेवाओं में थे. स्वास्थ्य क्षेत्र में 18 प्रतिशत ग़ैर-क्लीनिकल श्रमिक मैट्रिकुलेट्स/सेकेंडरी या उससे कम पढ़े हुए थे.

रिक्तियां

सभी क्षेत्रों को मिलाकर सर्वे में दिखाया गया है कि कुल प्रतिष्ठाने में से 5.6 में रिक्तियां मौजूद थीं. मात्रा की दृष्टि से देखें तो सभी प्रतिष्ठानों में कुल मिलाकर रिक्तियों की संख्या 4.3 लाख थी. 65.8 मामलों में रिक्तियों का कोई विशेष कारण नहीं दिया गया था.

सर्वे में पता चलता है कि क़रीब 23 प्रतिशत रिक्तियां इस्तीफों की वजह से हुईं और बाक़ी 11.7 प्रतिशत रिक्तियां कर्मचारियों के रिटायर होने से से पैदा हुईं. कुल मिलाकर बताई गईं 91 प्रतिशत रिक्तियां अकेले चार क्षेत्रों – शिक्षा, मैन्युफेक्चरिंग, आईटी/बीपीओज़ और स्वाथ्य में थीं.

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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