सलमान खान, जोधपुर में काला हिरण हत्या के मामले में पेश होने को आए| पीटीआई
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संजय दत्त को 1993 में हुए विस्फोटों में अवैध रूप से हथियार रखने के मामले में जेल से करीब तीन साल बाद 2016 में रिहा किया गया।

नई दिल्ली: कारागार किसी भी व्यक्ति के लिये उचित जगह नहीं है कम से कम उन व्यक्तियों के लिये तो कतई नहीं जो मशहूर,समृद्ध और अच्छा जीवन व्यतीत करने वाले है.

बॉलीवुड स्टार सलमान खान को अवैध रूप से शिकार करने के लिए दी गई जेल की सजा उनकी पहली सजा नहीं है – इससे पहले भी उन्हें 2002 में हुए हिट एंड रन के मामले में तीन दिन की सजा हो चुकी है, लेकिन सजा के यह पांच साल उनके अब तक के सबसे लम्बे साल साबित हो सकते है।

इस बात पर सलाह देने के लिए कि जेल में कैसे समय बिताएं, सलमान खान अपने करीबी दोस्त और सह कलाकार संजय दत्त से सलाह ले सकते हैं जिन्हें फरवरी २०१६ में जेल से अपने 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों के बाद अवैध हथियार रखने के आरोप में 3 साल की सजा काट कर रिहा किया गया था।

दिप्रिंट के एडीटर-इन-चीफ शेखर गुप्ता से ऑफ द कफ प्रोग्राम में बात करते हुए, दत्त ने जेल में बिताई हुई अपनी लम्बी जिन्दगी के बारे में बताया।

यह वास्तव में एक आसान समय नहीं

संजय दत्त ने कहा, “जेल के अंदर के शुरूआती दो महीने मेरे लिए बहुत दर्दनाक थे, बहुत, बहुत ही ज्यादा पीड़ा दायक थे।”

दत्त ने बताया कि कैसे उन्होंने अपने खुद के लिए खाना पकाया और कैसे उन्होंने खाने की सामग्री खरीदने के लिए “स्ट्राइक डील” की जिसके लिए उनको भारी कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने बताया कि “केरोसीन तेल की एक बोतल 2,000 रुपये की थी।”

संजय दत्त ने उस समय को भी याद किया जब “अरबों” की संख्या में मक्खियों ने जेल को घेर लिया था क्योंकि पंढरपुर के लिए तीर्थयात्रियों ने पास ही में कैंपों की स्थापना की थी। तीर्थयात्रियों ने खुले मैदान में भोजन किया था, जो कि मक्खियों को इकठ्ठा करने के लिए एक चुंबक के रूप में साबित हुआ।

“अरबों की संख्या में मक्खियाँ जेल में आती हैं। मेरा मतलब है मैं आपको बता रहा हूं कि सभी जगहों पर मक्खियां हैं मैंने एक साथ इतनी मक्खियों को कभी नहीं देखा है” उन्होंने यह भी कहा कि कि मक्खियों की संख्या अधिक होने के कारण वह अक्सर कैदियों के भोजन में गिर जाया करती थीं।

उन्होंने कहा कि गिरी हुई मक्खियों को मैं बाहर निकालकर फेंक दिया करता था लेकिन मक्खियों की संख्या अधिक होने के कारण गलती से कभी-कभी खा भी जाया करता था।

जेल से उन्हें कैसा अनुभव मिला

यह पूछने पर कि वास्तव में उन्हें किसने मदद की, दत्त ने कहा, मैंने सकारात्मक रवैया बनाए रखा था। “मैंने सोचा था कि भगवान ने मुझे तीन से चार साल का यह समय दिया है, तो मैं इस समय को सकारात्मक तरीके से सोचकर उपयोग क्यूं नहीं कर सकता?”

बाद में उन्होंने जेल, वाईसीपी के लिए एक रेडियो स्टेशन का शुभारंभ किया और कुछ अन्य कैदियों के साथ आरजे की भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि “हम बहुत सारे गाने गुनगुनाते थे और सब के साथ (अलग) विषयों के बारे में बात करते थे।“

किताबों से भी मदद मिली और दत्त ने शिव और वेदों के बारे में पढ़ा तथा हिंदू धर्म के बारे में ढ़ेर सारी जानकारी प्राप्त की।

अपराधियों का विश्वविद्यालय

यह पूछने पर कि क्या भारत की जेल कैदियों के पुनर्वास में मदद करती हैं, अभिनेता ने कहा कि सिस्टम को तोड़ा गया था। “वे (जेल) अपराधी बनाने के लिए एक विश्वविद्यालय हैं”, उन्होंने कहा।

दत्त ने कहा कि “हमारी जेलों की हालत ऐसी है कि अगर आप अपराधी नहीं हैं, तो आप बड़े अपराधी बनकर बाहर निकलेंगे”। उन्होंने आगे कहा कि न केवल जेलों को, बल्कि न्यायिक प्रणाली को भी सुधारने की जरूरत है, न्याय पाने के लिए आरोपी अपना लंबा समय सलाखों के पीछे गुजारते हैं। उन्होंने बताया, “मैंने कई परिवारों को केवल न्याय तंत्र की भारी सुस्ती के कारण टूटते हुए देखा है।”


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