Monday, 27 June, 2022
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महाराष्ट्र में बदला कोरोना का ट्रेंड : राज्य भर में बढ़ रहे मामले, लेकिन मुंबई में दर्ज की गई गिरावट

इस शुक्रवार को मुंबई में 5,008 मामले दर्ज किए गए जो सोमवार के 6,000 मामलों की तुलना में कम हैं. जबकि इसी अवधि में महाराष्ट्र का कुल आंकड़ा 31,111 से बढ़कर 48,270 हो गया. दोनों स्थितियों में पॉजिटिविटी रेट का रुझान भी इसी तरह नजर आ रहा है.

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मुंबई/नागपुर: महाराष्ट्र और इसकी राजधानी मुंबई में कोविड-19 मामलों की संख्या जिस तरह बढ़ रही है, उसमें एक बिल्कुल अलग ही ट्रेंड नजर आने लगा है.

शनिवार को मुंबई में 3,568 मामले दर्ज किए गए, जो सोमवार को करीब 6,000 रहे थे. इसी अवधि में राज्य में मामले 31,111 से बढ़कर 46,393 हो गए. शुक्रवार को महाराष्ट्र में कुल केस का आंकड़ा 48,270 रहा था जो तीसरी लहर में अब तक का सबसे अधिक था.

मुंबई में टेस्ट पॉजीटिविटी रेट यानी कुल टेस्ट में पॉजिटिव मामले पाए जाने की दर शनिवार को पिछले दिन 10 प्रतिशत की तुलना में गिरकर 7 प्रतिशत रह गई. पूरे राज्य के लिए टेस्ट पॉजीटिविटी रेट शुक्रवार को 23.4 प्रतिशत रहा, जो गुरुवार को 20 प्रतिशत पर था.

बीएमसी ने कर रखी है पूरी तैयारी

दिप्रिंट ने मुंबई के आंकड़ों के विश्लेषण में पाया कि सोमवार (17 जनवरी) से शुरू हफ्ते में शहर में हर दिन होने वाले कुल डेली टेस्ट का आंकड़ा 47,000-52,000 के बीच रहा, जो एक हफ्ते 55,000-65,000 की तुलना में कम रहा. हालांकि, अतिरिक्त नगर आयुक्त डॉ. सुरेश काकानी ने दिप्रिंट ने कहा कि शहर में डेली टेस्ट की संख्या में कटौती नहीं की गई है बल्कि पॉजिटिव मरीजों के कांटैक्ट को और तेजी से ट्रेस किया जा रहा है.

डॉ. काकानी ने कहा, ‘हमने उन सभी मरीजों को ट्रैक किया जो पॉजीटिव मरीजों के संपर्क में आए थे और वार्ड वॉर रूम के माध्यम पूरी सख्ती के साथ उन्हें होम क्वारंटाइन कराया, ताकि हम संक्रमण को घटा सकें.’

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बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के डैशबोर्ड के मुताबिक, पिछले दो दिनों में कुल बेड की संख्या 5,000 से अधिक से घटकर लगभग 4,200 हो गई और 11 जनवरी से 21 जनवरी के बीच सक्रिय मामले 100,000 से अधिक से गिरकर 14,000 हो गए।

डॉ. काकानी ने कहा, ‘हमने बेड की संख्या, ऑक्सीजन, मेडिकल सप्लाई, मैनपॉवर बढ़ाने आदि के रूप में अपने सभी संसाधनों को बढ़ाया और इस वजह से सिस्टम में विश्वास बना रहा और महामारी की लहर को नियंत्रित करने में मदद मिली.’

उन्होंने यह भी बताया कि बीएमसी के शुरुआती विश्लेषणों के मुताबिक इस तीसरी लहर में 93 फीसदी मामले बहुमंजिली इमारतों में सामने आए हैं जबकि महज 7 फीसदी मामले घनी आबादी वाले इलाकों से जुड़े पाए गए हैं.

डॉ. काकानी ने कहा कि हर्ड इम्यूनिटी, टीकाकरण और झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को टीका लगाने पर जोर दिए जाने की वजह से इन क्षेत्रों में संक्रमण रोकने में मदद मिली है.

बीएमसी के मुताबिक, शहर में लगभग 90 फीसदी लोगों को टीके की दोनों खुराक दी जा चुकी हैं, जबकि ‘100 प्रतिशत से अधिक’ को टीके की की एक खुराक मिल चुकी है, क्योंकि मुंबई में आसपास के उपनगरीय इलाकों के निवासियों का भी टीकाकरण होता है.

बाकी महाराष्ट्र की स्थिति चिंता का विषय

राज्य के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, महाराष्ट्र के कुल आंकड़ों में एक बड़ा हिस्सा मुख्य तौर पर पुणे का है, इसके बाद नागपुर का नंबर आता है. पुणे में शुक्रवार को 11,000 से अधिक मामले सामने आए, जबकि नागपुर का आंकड़ा 4,000 से अधिक का रहा.

नागपुर नगर निगम के आयुक्त राधाकृष्णन बी ने दिप्रिंट से कहा कि हालांकि, तीसरी लहर में अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की दर घटने से राज्य को काफी मदद मिली है.

कई नगर निगम भी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से तीसरी लहर से बेहतर तरीके से निपटने के लिए तैयार थे. दिप्रिंट ने अमरावती, नागपुर, मुंबई, पुणे के अधिकारियों से बात की, जिन्होंने बताया कि उन्होंने अस्पतालों में बेड, ऑक्सीजन क्षमता और ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्रों के मामले में बुनियादी ढांचा विकसित किया है. लेकिन बढ़ते मामलों की संख्या अभी चिंता का विषय बनी हुई है.

राधाकृष्णन ने दिप्रिंट को बताया, ‘निश्चित तौर पर मामले (नागपुर में) बढ़ रहे हैं. लेकिन अच्छी बात यही है कि अभी हमारे 10 प्रतिशत भी बेड नहीं भरे हैं. हो सकता है कि हमें अधिक मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने जैसी स्थिति का सामना करना पड़े लेकिन हम इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं क्योंकि हमने अस्पताल के बेड, ऑक्सीजन बढाने पर ध्यान दिया है और मुंबई की तरह ही वार्ड वार रूम भी बनाए हैं.’

अधिकारियों को आशंका है कि राज्य में कोविड के मामले अभी तेजी से बढ़ सकते हैं.

उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, जो पुणे जिले के गार्जियन मंत्री भी हैं, ने शनिवार को मामलों की बढ़ती संख्या के कारण जिले में स्कूलों को फिर से खोलने का निर्णय टाल दिया.

पवार ने पुणे में पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ‘हम अभी एक और सप्ताह पुणे में स्थिति पर नजर रखेंगे और उसके बाद ही जिले में स्कूलों को खोलने पर कोई फैसला करेंगे.’

( इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें )


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