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Sunday, 24 May, 2026
होमदेशसरकार ने ‘जनविरोधी’ भारत-अमेरिका समझौते को अब तक निरस्त क्यों नहीं किया: कांग्रेस

सरकार ने ‘जनविरोधी’ भारत-अमेरिका समझौते को अब तक निरस्त क्यों नहीं किया: कांग्रेस

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नयी दिल्ली, 24 मई (भाषा) कांग्रेस ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो के उस बयान को लेकर रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने अगले पांच वर्षों में 500 अरब डॉलर का अमेरिकी सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।

विपक्षी पार्टी ने साथ ही यह आरोप भी लगाया कि ‘‘कंप्रोमाइज्ड पीएम’’ अपने ‘‘करीबी मित्र’’ को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने यह भी सवाल किया कि मोदी सरकार ने ‘‘जनविरोधी’’ और ‘‘खतरनाक’’ उस भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को निरस्त करने का साहस क्यों नहीं दिखाया।

उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि मोदी सरकार ने अमेरिका से रिकॉर्ड आयात करने पर ’’सहमति’’ क्यों जताई, जबकि प्रधानमंत्री ने पहले ही नागरिकों से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए घरेलू ईंधन की खपत और विदेश यात्राएं कम करने का आग्रह किया था। उन्होंने पूछा, ‘‘क्या अमेरिका से आयात में यह भारी वृद्धि रुपये की गिरावट को और तेज नहीं करेगी?’’

रमेश ने कहा कि रूबियो ही वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने युद्धविराम की घोषणा की, जिससे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अप्रत्याशित रूप से रुक गया, और उन्होंने ही सबसे पहले यह घोषणा भी की कि वेनेजुएला की राष्ट्रपति अगले सप्ताह भारत का दौरा करेंगी।

कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘ऑपरेशन सिंदूर युद्धविराम और रूस से तेल और गैस आयात रोकने से लेकर भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और वेनेजुएला की राष्ट्रपति की यात्रा तक, भारतीय विदेश नीति से संबंधित सभी संचार अब नयी दिल्ली के बजाय वाशिंगटन डीसी से पहले क्यों आ रहे हैं?’’

रमेश ने कहा, ‘आज रूबियो ने एक बार फिर ‘एक्स’ पर यह बयान देकर देश को चौंका दिया है कि मोदी सरकार ने अगले पांच वर्षों में ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और कृषि क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदने की प्रतिबद्धता जताई है।’’

उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026 तक भारत का वार्षिक आयात 52.9 अरब डॉलर है और रूबियो के बयान का अर्थ है कि भारत को अमेरिका से अपना वार्षिक आयात दोगुना करना पड़ेगा।

रमेश ने कहा, ‘‘इस नए घटनाक्रम पर प्रधानमंत्री से हमारे पांच सीधे सवाल हैं – अमेरिकी उच्चतम न्यायालय के उस फैसले के बाद, जिसमें ट्रंप टैरिफ को रद्द कर दिया गया था, मलेशिया जैसे देशों ने अमेरिका के साथ अपने व्यापार समझौतों को ‘अमान्य’ घोषित कर दिया है।’’

उन्होंने कहा, “अमेरिका के उच्चतम न्यायालय द्वारा टैरिफ रद्द करने के फैसले के बाद इस समझौते का औचित्य पूरी तरह से खत्म हो गया है। मलेशिया और अन्य देशों की तरह मोदी सरकार ने इस ‘जनविरोधी’ और ‘खतरनाक’ व्यापार समझौते को रद्द करने का साहस क्यों नहीं दिखाया?’’

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए घरेलू ईंधन खपत और विदेश यात्राएं कम करने की अपील कर चुके हैं, तो फिर उसी समय मोदी सरकार ने अमेरिका से रिकॉर्ड आयात पर सहमति क्यों दी?

रमेश ने पूछा, ‘‘मोदी सरकार ने इस समय अमेरिका से रिकॉर्ड आयात करने पर इतनी खुलेआम सहमति क्यों दे दी है?’’

उन्होंने पूछा कि पिछले 12 महीनों में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी 12 प्रतिशत कीमत खो चुका है, तो ऐसे में क्या अमेरिका से आयात में यह भारी वृद्धि रुपये की गिरावट को और तेज नहीं करेगी?

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले सप्ताह ट्रंप प्रशासन ने सौर ऊर्जा घोटाले में गौतम अदाणी के खिलाफ आपराधिक धोखाधड़ी के आरोप खारिज कर दिए, जिसमें कथित तौर पर 26.5 करोड़ डॉलर की रिश्वत दी गई थी। क्या आयात के मुद्दे पर अमेरिका के सामने प्रधानमंत्री मोदी का समर्पण, राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ‘मोदानी’ साम्राज्य को दी गई राहत से जुड़ा हुआ है?’’

उन्होंने पूछा, ‘‘प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत की संप्रभु विदेश नीति को भारतीय जनता और दुनिया के सामने रखने की अपनी जिम्मेदारी क्यों छोड़ दी है?’’

कांग्रेस नेता ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘ऐसा लग रहा है कि ‘कंप्रोमाइज्ड’ प्रधानमंत्री अपने करीबी मित्र को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।’’

भाषा

देवेंद्र धीरज गोला

गोला

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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