Saturday, 25 June, 2022
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17 जिलों में झड़पें, ‘पुलिस पर हमला, महिलाओं से अभद्रता’- कैसे UP चुनाव में भड़की हिंसा

समाजवादी पार्टी ने जहां सत्तारूढ़ भाजपा पर चुनाव में अपने फायदे के लिए पुलिस और राज्य की मशीनरी का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है, वहीं भाजपा ने विपक्ष पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है.

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दिनों से जारी पंचायत चुनावों के बीच हिंसात्मक घटनाओं के कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई है, जहां अगले साल प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच खींचतान जारी है.

पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच कथित झड़प के कई वीडियो सोशल मीडिया पर आए हैं, और उन्हें व्यापक स्तर पर शेयर भी किया जा रहा है. समाजवादी पार्टी ने जहां सत्तारूढ़ भाजपा पर चुनाव में अपने फायदे के लिए पुलिस और राज्य की मशीनरी का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है, वहीं भाजपा ने विपक्ष पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है.

लखनऊ, कानपुर, इटावा और उन्नाव सहित कम से कम 17 जिलों में झड़पें होने की खबरें आई हैं. सोशल मीडिया पर कथित पुलिस फायरिंग और लाठीचार्ज के कई वीडियो सामने आए हैं. एक अन्य वीडियो, जिसमें शनिवार को उन्नाव के मुख्य विकास अधिकारी द्वारा कथित तौर पर एक पत्रकार को पीटे जाते दिखाया गया था, को भी काफी ज्यादा शेयर किया जा रहा है.

ऐसी भी खबरें आईं कि गुरुवार और शुक्रवार को दो महिलाओं की साड़ी खींची गई. राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया और यूपी पुलिस से उपयुक्त कार्रवाई करने को कहा. एक घटना गुरुवार को लखीमपुर खीरी में ब्लॉक प्रमुख पद के लिए नामांकन दाखिल किए जाने के दौरान हुई.

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कई जिलों में पुलिसकर्मियों पर भी कथित रूप से हमला किया गया, जिसके बाद यूपी पुलिस ने इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया. अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था प्रशांत कुमार ने मीडिया को बताया कि 17 जगहों पर मामूली झड़प हुई और सभी जिला पुलिस प्रमुखों को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है.


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प्रतिष्ठा का सवाल’ बने चुनाव

पंचायत चुनाव ऐसे समय पर हो रहे हैं जब राजनीतिक दल अगले साल प्रस्तावित और बेहद अहम माने जा रहे विधानसभा चुनाव की तैयारियों के क्रम में अपने राजनीतिक अभियानों को धार देने और एजेंडा मजबूत करने में जुटे हैं. हालांकि, पहले तो पंचायत चुनाव किसी खास राजनीतिक आधार पर नहीं लड़े जाते थे, लेकिन अब इन चुनावों की अहमियत काफी बढ़ गई है.

इसी क्रम में भाजपा और पिछले चुनाव में हार का सामना करने वाली सपा दोनों ही ग्रामीण इलाकों में अपना जनाधार मजबूत करने में जुटी हैं.

लखनऊ यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान संकाय के सदस्य प्रोफेसर कविराज ने बताया कि पंचायत चुनाव तीन श्रेणियों में होते हैं—ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत.

चुनाव के पहले चरण में लोग ग्राम प्रधान, और क्षेत्र (ब्लॉक) पंचायत और जिला पंचायत के वार्ड सदस्यों को चुनने के लिए वोट देते हैं. दूसरे चरण में निर्वाचित लोग अपने अध्यक्ष चुनते हैं, दूसरे चरण के दौरान झड़पें हुई हैं.

सपा ने दावा किया कि उसने पहले चरण में जीत हासिल की है, लेकिन निर्दलीय उम्मीदवारों के बारे में कोई स्पष्टता नहीं है, जो क्षेत्र और जिला पंचायतों दोनों में अध्यक्ष पद हासिल करने के लिहाज से काफी अहम होते हैं.

कविराज ने दिप्रिंट को बताया, ‘पहले चरण के चुनाव के बाद भाजपा कुछ दबाव में थी. इसलिए, उसने दूसरे चरण में पूरा जोर लगाया. किसी भी तरह से उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में निर्दलीयों का समर्थन मिला. अब, वे ब्लॉक प्रमुख चुनाव जीतने की पूरी कोशिश कर रहे थे, लेकिन सपा अधिक चौकस रही, इसलिए हमने कई जगहों पर झड़पें देखी हैं.’

राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर कमल कुमार कहते हैं कि यह ग्रामीण चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है. उन्होंने कहा, ‘यह विधानसभा चुनाव से कम नहीं लग रहा है. इसी तरह का प्रचार इन चुनावों में हुआ है. ऐसा लगता है कि ये एक हाई-बजट चुनाव है जिसमें सत्ताधारी और विपक्षी दलों दोनों के लिए बहुत कुछ दांव पर लगा है. ग्रामीण चुनावों में इस तरह की झड़पें पहले भी होती थीं… अब सोशल मीडिया के युग में यह और अधिक सामने आने लगा है.’


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अब तक की चुनाव प्रक्रिया

अप्रैल और मई में पहले चरण में 58,000 ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत के लगभग 75,000 वार्ड सदस्यों और 3,050 जिला पंचायत वार्ड सदस्यों के पदों के लिए मतदान हुआ था.

3 जुलाई को सम्पन्न दूसरे चरण में 75 जिला पंचायत अध्यक्षों के लिए चुनाव हुआ. शनिवार को 825 क्षेत्र पंचायतों के लिए मतदान हुआ.

यह देखते हुए कि ये चुनाव पार्टी लाइन पर नहीं लड़े जाते हैं, यह हमेशा स्पष्ट नहीं होता है कि किस पार्टी ने सबसे अधिक सीटें जीती हैं. सपा का दावा किया कि उसने जिला पंचायत चुनावों में, भाजपा का गढ़ माने जाने वाले अयोध्या, वाराणसी और प्रयागराज जैसे जिलों सहित, 1,000 से अधिक वार्ड जीते हैं.

भाजपा का दावा है कि 75 सीटों पर जिला परिषद अध्यक्षों के चुनाव में जीते उम्मीदवारों में 67 प्रत्याशी ऐसे थे जो पार्टी समर्थित थे. क्षेत्र पंचायत चुनाव में उसने 825 में से 625 सीटों पर जीत का दावा किया है.

सपा, भाजपा का खरीद-फरोख्त का आरोप

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आई.पी. सिंह के मुताबिक, भाजपा ने ‘चुनाव को प्रभावित करने के लिए राज्य के पूरे सरकारी तंत्र का इस्तेमाल किया.’

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, ‘वे सीधे तौर पर मतदान में नहीं जीते, इसलिए अब अन्य तरीकों से जीत हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं. पिछले तीन दिनों में जो हिंसा हुई है उसके लिए सीधे तौर पर योगी आदित्यनाथ जिम्मेदार हैं. हमारे सदस्यों के नामांकन पत्र फाड़े गए हैं. महिला सदस्यों के साथ धक्का-मुक्की की गई और साड़ी तक खींची गई. यह योगी के राज में ऐसा हुआ है. उन्होंने हमारे सदस्यों को पर्चा तक दाखिल नहीं करने दिया.’

सिद्धार्थनगर में पूर्व स्पीकर माता प्रसाद की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी के एक उम्मीदवार का नामांकन पत्र कथित तौर पर छीन लिया गया. उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं उन्नाव के नवाबगंज इलाके में भी हुईं, जहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रत्याशियों से पर्चे छीनने की कोशिश की.

हालांकि, यूपी में भाजपा के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने इस तरह के आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता ‘पंचायत चुनाव में बुरी तरह हार के कारण निराश हैं.’

उन्होंने कहा, ‘मैं भी इससे सहमत हूं कि अगर किसी को हिंसा का दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन यह सब विपक्ष का दुष्प्रचार है, जिसे वे सोशल मीडिया पर फैला रहे हैं.’

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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