Thursday, 2 February, 2023
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धनबाद जज की मौत मामले की चार्जशीट में फॉरेंसिक रिपोर्ट का दिया गया हवाला, लेकिन CBI बोली—जांच जारी

सीबीआई का कहना है जज की हत्या के पीछे बड़ी साजिश की ‘जांच चल रही’ है. वहीं, हाई कोर्ट ने कहा है कि वह इस मामले में जांच एजेंसी की प्रगति और जांच की गति से ‘निराश’ है.

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नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की तरफ से धनबाद में 28 जुलाई को एक ऑटो-रिक्शा की चपेट में आने वाले अतिरिक्त जिला जज उत्तम आनंद की मौत के मामले में दो लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किए जाने के दो दिन बाद झारखंड हाई कोर्ट ने कहा है कि वह जांच एजेंसी की प्रगति और इस मामले में जांच की गति से ‘निराश’ है.

सीबीआई ने यह मामला अगस्त में धनबाद पुलिस से अपने हाथ में लिया था लेकिन जांचकर्ता अभी तक अपराध के मकसद को साबित नहीं कर पाए हैं.

रिपोर्टों के मुताबिक, झारखंड हाई कोर्ट ने कहा है कि जांच एजेंसी सचिवालय के ‘बाबू’ की तरह काम कर रही है.

अदालत ने सीबीआई निदेशक को 29 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित रहने को भी कहा है.

सीबीआई ने बुधवार को ऑटो चालक लखन वर्मा (22 वर्ष) और उसके साथी राहुल वर्मा (21 वर्ष) के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 201 (सबूत नष्ट करना) और धारा 34 (जानबूझकर) के तहत आरोपपत्र दायर किया था.

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सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, चूंकि प्रोटोकॉल के मुताबिक गिरफ्तारी के 90 दिनों के भीतर आरोपपत्र दायर किया गया था, इसलिए आरोपी जमानत के पात्र नहीं हैं, वहीं अदालत ने शुक्रवार को एजेंसी से पूछा कि इसके बारे में क्यों नहीं बताया गया, जबकि झारखंड हाई कोर्ट मामले की निगरानी कर रहा है.

जज उत्तम आनंद के ब्रदर-इन-लॉ प्रभात कुमार ने दिप्रिंट से बातचीत में कहा कि सीबीआई मामले में महत्वपूर्ण सबूत पेश नहीं कर पाई है.

उन्होंने बताया, ‘अदालत ने कहा है कि मामले में प्रगति असंतोषजनक है. सीबीआई कहती रही है कि उनके पास अहम सुराग हैं लेकिन उन्होंने अभी तक कोर्ट को कुछ नहीं दिया है और जांच किसी मुकाम पर नहीं पहुंच पाई है. हम अभी भी इंतजार कर रहे हैं.’


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मामला ‘अभी जांच के दायरे में ही है’

हालांकि, अदालत में दायर आरोपपत्र में चार फोरेंसिक रिपोर्ट इस बात के ‘साक्ष्य’ के तौर पर शामिल की गई है कि दोनों आरोपियों ने जज को ‘जानबूझकर’ मार डाला, लेकिन यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि हत्या किसी ‘बड़ी साजिश’ का हिस्सा थी या नहीं. सीबीआई अब तक यह सबूत नहीं जुटा पाई है कि कथित बड़ी साजिश के पीछे कौन हो सकता है.

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, चार्जशीट में कहा गया है कि हिट एंड रन का मामला ‘जानबूझकर किया गया प्रयास था न कि कोई आकस्मिक घटना’. हालांकि, इसमें इस बात का जिक्र नहीं है कि दो लोगों ने जज को क्यों मारा. आरोपपत्र में सीबीआई ने इस बात का उल्लेख किया है कि मामले की ‘अभी जांच चल रही है’ और न्यायाधीश की हत्या के पीछे ‘बड़ी साजिश’ का पता लगाने की कोशिश की जा रही है.

सूत्र के मुताबिक, फॉरेंसिक रिपोर्ट के अलावा नार्को एनालिसिस टेस्ट रिपोर्ट भी जमा कर दी गई है, हालांकि मामले में जांच अभी जारी है.

पहली बार नहीं

यह पहला मौका नहीं है जब अदालत ने इस मामले की जांच में प्रगति को लेकर एजेंसी की खिंचाई की है.

झारखंड हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को भी जांच की धीमी गति पर असंतोष जताया था.

सीबीआई ने अगस्त में जांच अपने हाथ में ली थी और उससे मामले में नियमित तौर पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया था.

सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाई कोर्ट ने हिट एंड रन की घटना पर स्वत: संज्ञान लिया था, जब जज को टक्कर मारकर गिराने वाले तिपहिया वाहन के सड़क पर लहराकर चलने का सीसीटीवी फुटेज सामने आया था.


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