Thursday, 30 June, 2022
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चार साल की उम्र में लता मंगेशकर के गाने पर तबला बजाने वाले आलोकरेश लाहिड़ी ऐसे बने ‘बप्पी दा’

बप्पी लाहिड़ी के नाम से पहचाने जाने वाले आलोकरेश लाहिड़ी बंगाल में कोलकात में पैदा हुए थे. चार साल की उम्र में लता मंगेशकर के एक गाने पर तबला बजाकर मशहूर हुए बच्चे को सब बप्पी के नाम से बुलाने लगे.

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नई दिल्ली: मशहूर संगीतकार बप्पी लाहिड़ी का 69 साल की उम्र में मंगलवार को मुंबई के क्रिटिकेयर अस्पताल में निधन हो गया. बप्पी लाहिड़ी ही वो शख्स थे जिन्होंने डिस्को संगीत को भारत में लाने का काम किया और बाद में उन्हें डिस्कों किंग नाम से भी जाना जाने लगा.

बप्पी लाहिड़ी ने पिछले 48 सालों में 500 से अधिक फिल्मों में 5 हजार से ज्यादा गानों को कंपोज किया और गाया भी. बप्पी लाहिड़ी ने हिंदी के साथ-साथ बंगाली, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, गुजराती, मराठी, पंजाबी, उड़िया, भोजपुरी, आसामी में भी गानों को कंपोज किया था.

बप्पी लाहिड़ी के निधन की खबर सुनने के बाद से ही उनके फैन्स को सदमा लगा है. सभी यह जानना चाहते हैं कि आखिरी बप्पी दा का निधन कैसे हुआ.

बप्पी लाहिड़ी की तबियत बीते कई दिनों से खराब से चल रही थी. समाचार एजेंसी पीटीआई को अस्पताल के निदेशक डॉक्टर दीपक नामजोशी ने बताया, ‘बप्पी लाहिड़ी पिछले एक महीने से अस्पताल में भर्ती थे. सोमवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी. लेकिन मंगलवार रात को उनकी तबियत अचानक खराब हो गई थी. उन्हें कई तरह की दिक्कते थीं. उनकी मौत मंगलावार को आधी रात से ठीक पहले ओएसए (ऑब्सट्रक्टिव स्लीप ऐप्नीअ) से हुई.’.

छोटी उम्र से करियर की शुरुआत

बप्पी लाहिड़ी के नाम से पहचाने जाने वाले आलोकरेश लाहिड़ी बंगाल में कोलकाता में पैदा हुए थे. चार साल की उम्र में लता मंगेशकर के एक गाने पर तबला बजाकर मशहूर हुए बच्चे को सब बप्पी के नाम से बुलाने लगे. उनका परिवार शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा का पालन करने वाला था. बप्पी लाहिड़ी ने 19 साल की उम्र में अपना करियर शुरू किया था, जिसकी शुरुआत उन्होंने एक संगीत निर्देशक के रूप में की थी. बप्पी लाहिड़ी ने ही 70-80 के दशक में ऐसे गाने बनाए जिन पर लोग आज भी थिरकते हैं.

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बप्पी लाहिड़ी की मां भी एक गायिका और संगीतकार थीं. उनके पिता अपरेश लाहिड़ी भी एक मशहूर बंगाली गायक थे.

बप्पी लाहिड़ी संगीत के अलावा अपने लुक के लिए भी पहचाने जाते थे. उन्हें सोना पहनने का बहुत शौक था. वो अक्सर अपने गले में सोने की बड़ी-बड़ी और भारी चैन पहने हुए देखे जाते थे.

संगीत की दुनिया में शुरुआत

बप्पी लाहिड़ी को फिल्म में गाने का मौका एक बंगाली पिक्चर ‘दादू’ में मिला जो 1972 में आई थी. वहीं हिंदी फिल्मों की बात करें तो उन्होंने 1973 में आई ‘नन्हा शिकारी’ फिल्म से अपनी शुरुआत की. 1975 में आई फिल्म जख्मी से उनको पहचान मिलनी शुरू हुई, इसी फिल्म के जरिए बप्पी लाहिड़ी ने बॉलीवुड में अपनी जगह बनानी शुरू की.

बप्पी लाहिड़ी ने ‘आई एम ए डिस्को डांसर,,,’ ‘आप जैसा कोई मेरी जिंदगी में आए…’ जैसे गानों के साथ साथ ‘यार बिना चैन कहा रे’ तक बप्पी दा ने कई ऐसे गाने बॉलीवुड को दिए जिनपर आज भी लोग थिरकना पसंद करते हैं.

बप्पी लाहिड़ी ने शराबी, डिस्को डांसर जैसे कई सुपरहिट गाने गाए. हाल ही में उन्होंने टाइगर श्रॉफ और श्रद्धा कपूर की फिल्म बागी 3 के लिए भंकस गाना कम्पोज किया था.

सोशल मीडिया पर अंतिम विदाई

पीएम मोदी से लेकर सचिन तेंदुलकर तक देश की तमाम बड़ी हस्तियां बप्पी दा को अपने अंदाज में याद कर रही हैं. पीएम मोदी ने ट्विटर पर लिखा, ‘बप्पी लाहिड़ी जी का संगीत सर्वांगीण था, तरह-तरह की भावनाओं को खूबसूरती से जाहिर करता था. पीढ़ियों से लोग उनके कामों से खुद को जोड़कर देखते थे. उनका जीवंत स्वभाव सबको याद रहेगा. उनके निधन से दुखी हूं. उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना. शांति.’

देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बप्पी लाहिड़ी के निधन पर लिखा, ‘बप्पी लाहिड़ी एक बेजोड़ गायक-संगीतकार थे. उनके गीतों को न केवल भारत में बल्कि विदेशों में भी लोकप्रियता मिली. उनकी विविध रेंज में युवा और साथ ही भावपूर्ण धुनें शामिल थीं. उनके यादगार गीत लंबे समय तक श्रोताओं को खुश करते रहेंगे. उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना.’

सचिन तेंदुलकर ने लिखा, ‘मैंने बप्पी दा के म्यूजिक का खूब लुत्फ उठाया है, खासकर याद आ रहा है… ड्रेसिंग रूम में कई बार इस गाने को सुना है. उनके टैलेंट की रेंज बहुत शानदार थी. आप हमेशा हमें याद रहोगे बप्पी दा.’


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