Sunday, 3 July, 2022
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जंगली जानवरों को बचाने के बाद असम और बंगाल ने बढ़ाई सतर्कता

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कोलकाता/गुवाहाटी, 14 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल एवं असम में इस महीने कंगारुओं एवं चिम्पांजियों को बचाये जाने के बाद दुर्लभ प्रजातियों के जानवरों की तस्करी को रोकने के लिए दोनों राज्यों के वन विभागों ने सतर्कता बढ़ा दी है।

असम के कारबी आंगलांग जिले से 12 अप्रैल को एक वाहन से पांच चिम्पांजियों को बरामद किया गया जबकि पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में इस महीने की शुरुआत में तीन कंगारुओं को जंगल में भटकते हुए पाया गया था।

मुख्य वन्यजीव वार्डन देबल रॉय ने बताया, ‘‘बैकुंठपुर वन संभाग से तीन जानवरों(कंगारू) को बचाया गया, उनमें से एक मृत पाया गया । तीन कंगारुओं में से एक ने जख्म के कारण दम तोड़ दिया । दोनों पशु सिलीगुड़ी के बंगाल सफारी पार्क में निगरानी में हैं।’’

अधिकारी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि विभाग ने कंगारुओं सहित विदेशी प्रजातियों के जानवरों की तस्करी को रोकने के लिए खुफिया तंत्र को और तेज कर दिया है।

रॉय ने कहा कि यह पहली बार है, जब कंगारुओं को इस क्षेत्र में तस्करी के दौरान बचाया गया है और विभाग नियमित रूप से खुफिया विभाग के संपर्क में है तथा पुलिस इस नेटवर्क का भंडाफोड़ करने की कोशिश कर रही है।

कंगारू मुख्य रूप से आस्ट्रेलिया में पाये जाते हैं ।

एक अन्य वन अधिकारी ने कहा कि संभवत: कंगारुओं को म्यामां की ओर से पूर्वोत्तर के रास्ते इधर लाया गया । विभाग ने जानवरों को ले जा रहे एक वाहन को रोकने के लिए बैकुंठपुर वन प्रभाग के तहत गजोल्डोबा जंगल में जाल बिछाया था।

रॉय ने कहा कि स्थानीय ग्रामीणों से अधिक जानकारी इकट्ठा करने के लिए नेटवर्क को बढ़ावा देने के अलावा, प्रशिक्षित कुत्तों की संख्या में वृद्धि की गई है और स्थानीय लोगों और वन कर्मियों वाले सतर्कता समूह बैकुंठपुर वन रेंज के आसपास के क्षेत्र में किसी भी संदिग्ध वाहन और व्यक्तियों की आवाजाही की निगरानी कर रहे हैं।

असम-नगालैंड सीमा के पास दिलई तिनियाली इलाके में एक वाहन से चिम्पांजी बरामद किये जाने के मामले में दो संदिग्ध तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। इन पशुओं को बुधवार को मांजा रेंज के वन विभाग के अधिकारियों को सौंप दिया गया।

पूछताछ के दौरान दोनों संदिग्ध तस्करों ने बताया कि वे मणिपुर के थौउबल जिले के रहने वाले हैं।

असम के एक वन अधिकारी ने कहा कि पूर्वोत्तर में वन्यजीवों की तस्करी प्रमुख चिंता का विषय है क्योंकि शिकारियों द्वारा लुप्तप्राय और दुर्लभ जानवरों को निशाना बनाया जाता है।

अधिकारी ने बताया, ‘‘पहले, गैंडे, हाथी और बाघ जैसे जानवरों के मांस और शरीर के अंगों के लिये उनका अवैध शिकार किया जाता था और इसके हिस्सों की तस्करी उत्तर और दक्षिण पूर्व एशिया के कई देशों में की जाती थी। लेकिन तस्करों ने अब अपना ध्यान गेको, पैंगोलिन और हाल ही में कंगारु और चिम्पांजी पर केंद्रित किया है ।

पश्चिम बंगाल के वन मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक ने पीटीआई-भाषा को बताया, पिछले आठ-नौ महीनों से जानवरों और वन उपज की तस्करी के खिलाफ निगरानी नेटवर्क तेज कर दिया गया है, हाल के दिनों में राज्य में वन कर्मियों द्वारा कछुओं की 2,300 से अधिक दुर्लभ प्रजातियों को जब्त किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लोगों ने पैंगोलिन, मैकॉ और अन्य विदेशी पक्षियों को भी बचाया है तथा कुछ जानवरों के शरीर के अंग बरामद किए हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हमारी टीमों द्वारा एक दिन में औसतन छह-सात छापेमारी की जाती है ताकि राज्य के विभिन्न वन क्षेत्रों में, दक्षिण और उत्तर बंगाल दोनों में तस्करी और अवैध शिकार को रोका जा सके।’’

मंत्री ने कहा, ‘‘हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि जानवरों के अंगों की तस्करी और अवैध शिकार के कृत्यों के संबंध में गिरफ्तार लोगों को सजा मिले।’’

मलिक ने कहा कि विभाग ने सागौन एवं चंदन की लकड़ी भी बरामद की है और इसे ई-नीलामी के लिए रखा गया है । उन्होंने कहा, ‘‘हमारे विभाग ने लकड़ी बेचकर सरकारी खजाने में 125 करोड़ रुपये दिए हैं।’’

कंगारुओं के बारे में मलिक ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उनमें से एक कंगारु को बचाया नहीं जा सका।

वन मंत्री ने कहा, ‘‘दो अन्य अब अच्छी तरह से ठीक हो रहे हैं और सिलीगुड़ी की ठंडी जलवायु को अपना रहे हैं। बाद में उन्हें चिड़ियाघर ले जाया जाएगा, विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्र में ।’’

असम के वन अधिकारी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सहित पड़ोसी राज्य सरकारों, सुरक्षा एजेंसियों, वन विभागों और जैव विविधता और पर्यावरण क्षेत्र में काम करने वाले गैर सरकारी संगठनों के साथ समन्वित तरीके से काम करने के लिए ठोस प्रयास किया जा रहा है।

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि हाल ही में असम में दुर्लभ जानवरों की जब्ती से संकेत मिलता है कि सुरक्षा एजेंसियां ​​सतर्क हैं।

भाषा रंजन नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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