मुंबई, 28 नवंबर (भाषा) मुंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि खराब वायु गुणवत्ता से निपटने में कुछ समय लगेगा, लेकिन अगर दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए तो शहर में निर्माण गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण से निपटा जा सकता है।
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अनखड की पीठ ने एक स्वतंत्र पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है, ताकि निर्माण स्थलों का निरीक्षण किया जा सके और यह पता लगाया जा सके कि दिशानिर्देशों का पालन किया जा रहा है या नहीं।
समिति में बृह्नमुंबई महानगर पालिका (बीएमसी), महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) और राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शामिल होंगे।
मुंबई में बिगड़ते वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पर चिंता जताने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने बीएमसी और एमपीसीबी को निर्देश दिया कि वे पिछले साल उठाए गए कदमों के बारे में 15 दिसंबर तक कार्रवाई रिपोर्ट पेश करें।
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने कहा कि देश की आर्थिक राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 2023 से हर साल बिगड़ रहा है।
इस पर मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर ने कहा कि इस समस्या से निपटने में कुछ समय लगेगा। अदालत ने कहा, ‘‘इसमें कुछ समय लगेगा। दिल्ली 15 साल से ज्यादा समय से संघर्ष कर रही है।’’
पीठ ने कहा है कि निर्माण स्थलों पर विशेष दस्तों के दौरे, सीसीटीवी कैमरे लगाने और सेंसर आधारित वायु प्रदूषण मॉनिटर लगाने के रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए।
अदालत द्वारा सहायता के लिए नियुक्त वरिष्ठ वकील डेरियस खंबाटा ने शुक्रवार को कहा कि निर्माण स्थलों के लिए अदालत द्वारा 2024 में निर्धारित दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिनमें सीसीटीवी कैमरे लगाना, सेंसर-आधारित वायु प्रदूषण मॉनिटर लगाना और पानी का छिड़काव शामिल है।
बीएमसी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील मिलिंद साठे ने कहा कि विशेष दस्ते हैं जो निर्माण स्थलों पर आकस्मिक जांच करते हैं।
भाषा
शफीक वैभव
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