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Monday, 15 July, 2024
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रोजगार बढ़ाने और अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए मोदी सरकार निर्माण सेक्टर पर क्यों दांव लगा रही है

पूंजीगत खर्च में भारी वृद्धि से न केवल उत्पादक परिसंपत्तियों का निर्माण होगा बल्कि कंस्ट्रक्शन सेक्टर में रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा होंगे. यह मांग को मजबूती देगा और निजी निवेश को आकर्षित करके आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देगा.

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भारत में सबसे ज्यादा श्रम आधारित क्षेत्रों में कंस्ट्रक्शन सेक्टर भी शामिल है इसलिए उस पर सरकारी खर्च में वृद्धि से रोजगार के अवसर बढ़ाने में मदद मिलेगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण ने इन्फ्रास्ट्रक्चर की विभिन्न परियोजनाओं के लिए पैसा जुटाने की खातिर वर्ष 2022-23 के केंद्रीय बजट में पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) में 35.4 फीसदी की वृद्धि कर दी है. उनका मुख्य ज़ोर रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा करना है.

कैपेक्स पर ज़ोर देने से न सिर्फ उत्पादक परिसंपत्तियों का निर्माण होगा बल्कि इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि इससे निर्माण सेक्टर में रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा होंगे. यह मांग को मजबूती देगा और निजी निवेश को आकर्षित करके आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देगा.

कोविड की महामारी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था को जिन बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है उनमें से एक है बेरोजगारी में इजाफा. बड़ी संख्या में रोजगार देने वाले ‘एमएसएमई’ सेक्टर को उधार की गारंटी के जरिए मदद दी जा रही है तो दूसरी ओर निर्माण सेक्टर पर अधिक ज़ोर देकर रोजगार के अवसर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है.


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कंस्ट्रक्शन सेक्टर में रोजगार

‘पीरिऑडिक लेबर फोर्स सर्वे’ के अनुमानों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्र में खेतीबाड़ी के बाद निर्माण सेक्टर रोजगार देने वाला दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर है. उद्योगों में कामगारों के व्यापक विभाजन के अनुसार 12 फीसदी कामगार निर्माण सेक्टर में कार्यरत हैं. यह सेक्टर मौसमी रोजगार देने में भी आगे है.

खेतों में बुवाई का मौसम खत्म होने के बाद यह सेक्टर अतिरिक्त कामगारों को सबसे बड़ी संख्या में रोजगार देता है. यह उन प्रमुख क्षेत्रों में भी है जिनमें भारत के प्रवासी कामगारों को ज्यादा रोजगार मिलता है.

‘क्वाटर्ली एंपलॉयमेंट सर्वे’ बताता है कि निर्माण सेक्टर में नियमित कर्मचारियों की संख्या कम लेकिन ठेके पर या अस्थायी तौर पर काम करने वालों की संख्या अधिक है. इस सेक्टर को जो भी नीतिगत प्रोत्साहन मिलेगा, वह भारत में अनौपचारिक क्षेत्र के कामगारों की विशाल फौज को फायदा ही पहुंचाएगा.


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सड़कों और हाइवे निर्माण को बजटीय प्रोत्साहन

केंद्रीय बजट की एक प्रमुख घोषणा यह थी कि 2022-23 में नेशनल हाइवे में 25,000 किमी का इजाफा किया जाएगा. इससे भी रोजगार को बढ़ावा मिलेगा.

सड़क परिवहन एवं हाइवे मंत्रालय को 1.99 लाख करोड़ रु. का आवंटन किया गया है जबकि पिछले बजट में 1.18 लाख करोड़ का आवंटन किया गया था. 81,000 करोड़ की अतिरिक्त राशि में से बड़ा हिस्सा नेशनल हाइवे ऑथरिटी ऑफ इंडिया (एनएचआइए) में निवेश के लिए आवंटित किया गया है.

2021-22 के बजट के मुक़ाबले 2022-23 के बजट में एनएचआइए के लिए आवंटन में 133 प्रतिशत की वृद्धि की गई है. हाइवे निर्माण पर ज्यादा खर्च कामगारों के लिए मांग में वृद्धि करेगा.

बजट में ‘नेशनल रोपवेज डेवलपमेंट प्रोग्राम’ (‘पर्वतमाला’) भी प्रस्तावित किया गया है जिसका लक्ष्य पहाड़ी इलाकों में प्रदूषण-मुक्त परिवहन और संपर्क को बढ़ावा देना है. इससे भी रोजगार पैदा होंगे और अतिरिक्त लाभ यह होगा कि पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा.


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आवास को प्रोत्साहन

सस्ते आवास को बड़ा बढ़ावा देने से रियल एस्टेट और निर्माण सेक्टर में रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकेंगे.

वित्त मंत्री ने सस्ते आवास की ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के लिए 48,000 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं ताकि शहरी और ग्रामीण इलाकों में 80 लाख गहरों का निर्माण किया जा सके.

खासकर आवास सेक्टर में निर्माण की गतिविधियों से अर्थव्यवस्था के दूसरे सेक्टरों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. मसलन, निर्माण के लिए सीमेंट और इस्पात सबसे जरूरी चीजें हैं. सड़कों और आवासों को बढ़ावा देने से इन सेक्टरों को भी मजबूती मिलेगी और रोजगार के अवसर पैदा होंगे.

शहरी इलाकों में ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के कारण पैदा हुए रोजगार का आकलन करने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी ने जो अध्ययन किया था उसमें पाया गया कि इसका अहम प्रभाव हुआ है. इस अध्ययन का अनुमान है कि जून 2015 से जनवरी 2019 के बीच इसने प्रत्यक्ष रोजगार के 18.92 लाख और अप्रत्यक्ष रोजगार के 42.57 लाख अवसर पैदा किए.


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ग्रामीण सड़क निर्माण पर ज़ोर

ग्रामीण इलाकों में सड़क निर्माण के लिए बजट में आवंटन इस बार बढ़ा दिया गया है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए फंड में 2021-22 में 14,000 करोड़ रु. (संशोधित अनुमान) दिए गए थे जिस बढ़ाकर 2022-23 में 19,000 करोड़ रु. कर दिया गया है. इस वृद्धि से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे.

इस बात को लेकर चिंता जाहिर की जा रही है कि अगले साल के लिए ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ‘नरेगा’ के लिए केवल 73,000 करोड़ रुपए दिए गए हैं. यह चालू वित्त वर्ष के संशोधित अनुमान से 25 फीसदी कम है लेकिन महामारी वाले साल में किए गए आवंटन से तुलना उचित नहीं होगी. अगर ज्यादा रोजगार की मांग होगी तो सरकार आवंटन में वृद्धि भी कर सकती है.

वित्त मंत्री सीतारामण ने राज्यों को भी पूंजीगत खर्च में वृद्धि करने के लिए प्रोत्साहित किया है. बजट में राज्यों को ‘गति शक्ति’ योजना और ग्रामीण सड़क निर्माण के लिए ब्याज मुक्त कर्ज उपलब्ध कराने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए की व्यवस्था की है. इससे राज्यों को पूंजीगत खर्च में वृद्धि करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और वे रोजगार के ज्यादा अवसर पैदा कर सकेंगे.

(इला पटनायक एक अर्थशास्त्री और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी में प्रोफेसर हैं. राधिका पांडे एनआईपीएफपी में सलाहकार हैं. व्यक्त विचार निजी हैं)

(इस लेख को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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