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नई दिल्ली में कठुआ बलात्कार के विरोध की फाइल फोटो |पीटीआई
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फॉरेन्सिक विशेषज्ञों का कहना है कि डीएनए परीक्षण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें जैविक नमूना पूरी तरह से या आंशिक रूप से नष्ट हो सकता है।

नई दिल्ली: फॉरेन्सिक विशेषज्ञों का कहना है कि हो सकता है कि कठुआ केस पीड़िता के बालों के नमूने डीएनए परीक्षण में ही पूरी तरह नष्ट हो गए हों जैसा कि एक विवाद ने तूल पकड़ रखा है कि एक लिफाफा, जिसमें आठ वर्षीय बच्ची के बाल रखे हुए थे, अदालत में खोले जाने पर खाली पाया गया।

केन्द्रीय फॉरेन्सिक विज्ञान प्रयोगशाला, जहाँ डीएनए परीक्षण किया गया था, के सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि डीएनए परीक्षण में बालों जैसे अधिकतर जैविक सबूत आंशिक या पूर्ण रूप से नष्ट हो सकते हैं।

प्रयोगशाला के एक अधिकारी ने कहा, “एक जैविक सैंपल से डीएनए का पता लगाना हमेशा सबूत नष्ट करने वाली प्रक्रिया रही है।”

अधिकारी ने स्पष्ट किया, “सैंपल आमतौर पर आंशिक रूप से या पूरी तरह से नष्ट हो जाता है। इसे रासायनिक तरीके से गलाना पड़ता है ताकि इससे डीएनए अलग किया जा सके।”

आगे उन्होंने दावा किया, “अगर सबूत के कोई अवशेष बचते हैं तो उन्हें सीलबंद पैकेट में संबंधित एजेंसी को वापस भेज दिया जाता है।” उन्होंने कहा, “जैविक सैंपल के मामले में 100 प्रतिशत विनाश साधारण बात है।”

अधिकारी ने आगे बताया कि यदि परीक्षण में सैंपल नष्ट हो जाता है, तो रिपोर्ट में इसका उल्लेख नहीं किया जाता है।

प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ बालों के डीएनए पीड़िता के साथ मेल खाते थे। कठुआ के रसाना गाँव में अपराध स्थल से एकत्र किए गए बालों के छह नमूनों को डीएनए परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेजा गया था।

परीक्षण की रिपोर्ट इस मामले में एक ठोस सबूत साबित हुई, जिससे यह बात साफ हो गई कि जनवरी में हत्या करने से पहले एक सप्ताह तक उसे रसाना गाँव के मंदिर में कथित तौर पर बंधक बना कर रखा गया था और दवाओं से बेहोश करके उसके साथ बलात्कार किया गया था। यह इस मामले में अप्रैल में पुलिस द्वारा दाखिल एक आरोप पत्र का एक हिस्सा भी बनाता है।

जहाँ पर पीड़िता के शरीर को फेंका गया था वहाँ से प्राप्त एक अन्य बाल की डीएनए रिपोर्ट उस नाबालिग के साथ मेल खा गई थी जो कथित तौर पर पीड़िता का बलात्कार और गलाघोंट कर हत्या करने में शामिल था, इससे उस स्थान पर उसकी उपस्थिति साबित होती है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस की अपराध शाखा के सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि जांच दल के लिए डीएनए रिपोर्ट महत्वपूर्ण थी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नमूनों वाले पैकट को फॉरेन्सिक प्रयोगशाला में भेजने से पहले एक मजिस्ट्रेट के सामने सील बंद किया गया था।

एक अधिकारी ने कहा कि “डीएनए रिपोर्ट के अलावा, प्रयोगशाला ने एक सील बंद लिफाफा हमें वापस भेजा था। यह अदालत की संपत्ति थी…इसे जज के सामने खोला गया था।”

अधिकारी ने आगे बताया कि “चूंकि लिफाफे में कोई बाल नहीं मिले थे इसलिए हम मानते हैं कि वे परीक्षण में नष्ट हो गए होंगे, जैसा कि अधिकतर जैविक सैंपलों के साथ होता है। हालांकि, यह फॉरेन्सिक विशेषज्ञों द्वारा विस्तारपूर्वक व्याख्यान का विषय है।”

Read in English : DNA tests destroy samples, say experts as row erupts over Kathua rape victim’s missing hair


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