news on politics
दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार | दिप्रिंट
Text Size:
  • 22
    Shares

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता राजीव बब्बर के मानहानि की शिकायत मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री व आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल व तीन अन्य को समन जारी किया है. अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी समर विशाल ने केजरीवाल, आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार गुप्ता, विधायक मनोज कुमार व आप प्रवक्ता आतिशी मारलेना को अपने समक्ष 30 अप्रैल को प्रस्तुत होने को कहा.

बब्बर ने दिल्ली की मतदाता सूची से ‘मतदाताओं’ के नाम हटाने के लिए भाजपा पर आरोप लगाने व उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए केजरीवाल व अन्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.

बब्बर ने कहा, ‘सभी आरोपियों ने भाजपा के खिलाफ एक तय तरीके से समाज के कुछ तबकों जैसे बनिया, पूर्वाचलियों, मुस्लिमों व अन्य वर्ग के मतदाताओं के बीच भाजपा की छवि को नकारात्मक बनाने के लिए आरोप लगाया जिससे शिकायकर्ता की प्रतिष्ठा को अपूर्णनीय नुकसान पहुंचा.’ बब्बर ने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने न सिर्फ भाजपा को बल्कि पार्टी से जुड़े सभी लोगों को बदनाम किया है.

बब्बर ने अपनी याचिका में कहा, ‘आरोपी (केजरीवाल) के बयान का उद्देश्य भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचाना और आगामी चुनावों में राजनीतिक लाभ लेना था.’

बब्बर ने अपनी याचिका वकील नीरज, एसएन वर्मा व पूजा सूरी के जरिए दायर की है.

नीतीश को हत्या के मामले में राहत

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ निचली अदालत द्वारा 28 साल पुराने एक हत्या के मामले में लिए गए संज्ञान को पटना उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को निरस्त कर दिया. पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति ए. अमानुल्लाह की एकल पीठ ने पटना जिले के पंडारक में 16 नवंबर, 1991 को हुई हत्या के मामले में नीतीश कुमार द्वारा दर्ज याचिका की सुनवाई के बाद निचली अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया.

अदालत ने इस मामले में 31 जनवरी को दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी कर ली थी और फैसला सुरक्षित रख लिया था.

उल्लेखनीय है कि पंडारक के ढीबर गांव में 16 नवंबर, 1991 को बाढ़ संसदीय क्षेत्र के मध्यावधि चुनाव के लिए हुए मतदान के दिन ग्रामीण सीताराम सिंह की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में दर्ज प्राथमिकी में नीतीश कुमार सहित कुल पांच लोगों को आरोपी बनाया गया था. लेकिन बाद में नीतीश कुमार सहित दो लोगों को पुलिस ने जांच के बाद आरोपमुक्त कर दिया था.

2009 में मृतक के भाई अशोक सिंह द्वारा बाढ़ के तत्कालीन अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में दर्ज परिवाद पत्र की सुनवाई के बाद अदालत ने नीतीश के खिलाफ संज्ञान लिया. इसे रद्द करने के लिए नीतीश ने पटना उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी.


  • 22
    Shares
Share Your Views

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here