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जयललिता, एम करुणानिधी, स्टालिन और पलानीस्वामी/दिप्रिंट
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नई दिल्ली: केंद्र की राजनीति का महत्वपूर्ण धूरी रहा दक्षिण भारत का राज्य तमिलनाडु इस बार भी क्या वही करिशमा दोहरा पाएगा जो पिछले पचास दशकों से दिखाता आ रहा है. दक्षिण की राजनीति के खेल के दो बड़े खिलाड़ी जयललिता और एम.करूणानिधि ने एक साल पहले ही दुनिया को अलविदा कह दिया है.

राष्ट्रीय राजनीति के पचास दशकों में यह पहला मौका होगा कि जब इन दोनों बड़े नेताओं के बगैर राज्य में लोकसभा चुनाव होने जा रहे है. राज्य में राजनीति करने वाले दोनों बड़े दल एआईडीएमके और डीएमके के पास कोई बड़ा चेहरा नहीं है. इस लोकसभा चुनाव में दोनों ही दल अपने अस्तित्व की लडाई लड़ रहे हैं.


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द्रमुक की ज़िम्मेदारी स्टालिन पर

शतरंज के खेल में माहिर खिलाड़ी एम.करूणानिधि के बेटे एम के स्टालिन तमिलनाडु की राजनीति में सबसे चर्चित चेहरा माने जाते हैं. वे 14 की उम्र से अपनी पार्टी के लिए काम कर रहे हैं. जब से उन्होंने पार्टी की बागडोर अपने हाथों में ली है तभी से पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं उनसे आस बांध रखी है कि वे पार्टी के खोए हुए जनाधार को मजबूती से खड़ा करेंगे. स्टालिन की पार्टी संगठन में अच्छी खासी पकड़ है. कई चुनावों में कारारी हार देखने के बाद भी पार्टी कार्यकताओं ने उनका साथ नहीं छोड़ा.

पार्टी को 2014 के लोकसभा चुनावों में एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी. राज्य में दोबारा मजबूत स्थिति में लौटने के लिए स्टालिन ने राज्य में कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन किया है. इसके साथ ही वे पीएम पद के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को उपयुक्त भी समझते है. पार्टी की तरफ से लोकसभा चुनावों की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर है. छह बार विधानसभा की चुनावों में जीत दर्ज कर चुके स्टालिन ने अभी तक एक बार भी लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ा हैं. हालांकि वे राज्य में उपमुख्यमंत्री कार्यभार भी संभाल चुके हैं.

बदलाव के दौर से गुजर रही है एआईडीएमके

जयललिता के निधन के बाद पार्टी दो धड़े में बंट गई थी. पार्टी के उत्तराधिकारी और मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी में कई दिनों मचे घमासान के बाद दोनों प्रमुख नेता राज्य के मुख्यमंत्री ईके.पलानिस्वामी और उपमुख्यमंत्री ओ.पन्नीरसेल्वम एक हो गए है. इसके बाद भी आए दिन मतभेद की बाते भी सामने आते रहती है.

एआईडीएमके ने राज्य में भारतीय जनता पार्टी से हाथ मिलाया है.वर्तमान के दौर में पार्टी एक बदलाव के दौर से गुजर रही है. अभी उनके पास ऐसा कोई चेहरा नहीं है जो चुनाव में उन्हें जीत दिलवा सके. पार्टी अभी जयललिता के नाम और राज्य सरकार के विकास कार्यों को लेकर ही मैदान में उतर रही है.

पिछले दो चुनावों में यह थी दोनों दलों की स्थिति

2009 में एआईडीएमके को 09, एआईडीएमके को 9, कांग्रेस को 8 और अन्य दलों को 4 सीटें हासिल हुई थी. वहीं 2014 में एआईडीएमके ने 37 सीटें और अन्य को दो सीटें हासिल हुई थी. 234 सदस्य वाली तमिलनाडु विधानसभा में अभी 213 विधायक है. इनमें एआईएडीएमके के पास 114, डीएमके व कांग्रेस गठबंधन के पास 97 सीटे हैं.

राज्य में लोकसभा के साथ विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव भी होना है. एआईडीएमके के पास 114 में 4 निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है. सरकार को बचाने के लिए कम से कम 6 विधायकों की आवश्यकता है.पार्टी को बहुमत के लिए 116 क आंकड़े की जरूरत है.


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पहले राजनीति दो नेताओें के ईदगिर्द होती थी

राजनीतिक जानकारों की मानें तो राज्य की राजनीति दो बड़े नेता करूणानिधि और जयललिता के ईदगिर्द की नजर आती थी. बड़ी संख्या में दोनों के प्रशंसक है. दोनों नेताओं के दौर में चेहरे के नाम पर वोट मिल जाया करते थे, लेकिन वर्तमान परिपेक्ष्य में ऐसा नजर नहीं आ रहा है. तमिलनाडु की राजनीति में तमिल के दो सुपरस्टार ने इंट्री ली है. कमल हासन ने अपनी नई पार्टी ‘मक्कल नीधि मैयम’ को स्थापित करने में लगे हुए है.वहीं रजनीकांत अपने प्रशंसकों के दम पर पार्टी के आगे बढ़ा रहे हैं.


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