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ज़ोजिला दर्रे के दुर्गम रास्ते से लद्दाख जाता हुआ सामान से भरा ट्रक. (फोटो: गेटी इमेजेज)
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नई दिल्ली: मुंबई स्थित इंफ्रास्ट्रकचर लीज़िंग एंड फाइनेंसियल सर्विसिस (आईएलएंडएफएस) के संकट में आने से जम्मू एव कश्मीर की दो बड़ी बुनियादी परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नींव रखने के पांच महीने बाद ही 6,809 करोड़ रुपये की ज़ोजिला सुरंग परियोजना पर काम ठहर गया है. ज़ेड मोड़ सुरंग परियोजना जो कि श्रीनगर और कारगिल को आपस में बारहमासी (किसी भी मौसम में) संपर्क से जोड़ने की परियोजना है, शायद ही 2019 की समयसीमा में पूरी हो पाए.

दोनों ही परियोजनाओं को आईएलएंडएफएस द्वारा फाइनेंस किया गया था. इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश से जुड़ी सरकारी क्षेत्र की कंपनी आईएलएंडएफएस 90,000 करोड़ रुपये के कर्ज़ में डूबी है.

सूत्रों का कहना है कि भारत की सबसे लम्बी सुरंग ज़ोजिला परियोजना पर काम की गति आईएलएंडएफएस की वित्तीय परेशानियों के चलते धीमी चल रही है. लेकिन आईएलएंडएफएस के संकटग्रस्त होने के कारण काम पूरी तरह से रुक गया है.


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राष्ट्रीय राजमार्गों और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएचआईडीसीएल) के प्रबंध संचालक एनएन सिन्हा जो परियोजना की देखरेख कर रहे हैं, उन्होंने कहा ‘हमें उनकी (आईएलएंडएफएस) तकनीकी दक्षता के बारे में संदेह नहीं था लेकिन वे वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं, जिसकी वजह से काम धीमी गति से आगे बढ़ रहा था.’

सिन्हा ने कहा कि ‘कर्ज़ में डूबने के बाद आईएलएंडएफएस ने हमें वापस बताया भी नहीं कि क्या वे इस परियोजना को आगे जारी रखना चाहते हैं. काम रुक गया है. अब हम उनके जवाब की प्रतीक्षा कर रहे हैं.’

आईएलएंडएफएस ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क (आईटीएनएल) के एक प्रवक्ता ने कहा कि संकट का पता लगने के बाद सरकार द्वारा स्थापित नया बोर्ड इस परियोजना पर फैसला करेगा.

प्रवक्ता ने कहा, ‘नए प्रबंधन द्वारा कार्यभार संभालने के बाद भी इस परियोजना पर अभी तक कोई भी फैसला नहीं लिया है. वे जल्द ही इस पर निर्णय लेंगे. उन्हें अपनी रिपोर्ट जमा करने में समय लगेगा और उसी के अनुसार प्रबंधन आगे बढ़ने पर निर्णय लेगा.’

बारहमासी सुरंग

ज़ोजिला सुरंग श्रीनगर-कारगिल-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित 14.5 किलोमीटर लंबी 2 लेन प्रस्तावित सुरंग है. इसके जरिये सभी मौसमों में कनेक्टिविटी को सुनिश्चित करना और ज़ेड-मोड़ सुरंग को श्रीनगर और लेह-लद्दाख क्षेत्र के बीच जोड़ना है. वर्तमान समय में बर्फ के गिरने के कारण राजमार्ग साल में सात महीने तक बंद रहते हैं.

सुरंग के निर्माण के लिए एनएचआईडीसीएल ने इस साल जनवरी में आईएलएंडएफएस की सहायक कंपनी आईटीएनएल और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के साथ सहमति ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया था.

इस वर्ष जून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना की नींव रखी थी. प्रधानमंत्री मोदी ने तब यह बात कही थी कि वह इस परियोजना को जल्द पूरा करने के लिए सात साल की अवधि को कम करने के तरीकों पर संबंधित मंत्रालय से बातचीत करेंगे.

हालांकि अब आईएलएंडएफएस के संकट में आ जाने से कारण परियोजना पर संदेह उत्पन्न हो गया है.

सुरंग परियोजना समय से पूरी नहीं हो पायेगी

ज़ेड-मोड़ सुरंग परियोजना जो श्रीनगर और कारगिल के बीच सभी मौसम में कनेक्टिविटी को सुनिश्चित करने की दिशा में पहला कदम था. 2019 की अपनी समय सीमा पर पूरा नहीं हो पायेगी. यह परियोजना अब 2020 तक पूरी होने की संभावना है.

यह परियोजना अक्टूबर 2012 में पिछली यूपीए सरकार द्वारा शुरू की गयी थी.

एनएचआईडीसीएल के प्रबंध निदेशक एनएन सिन्हा ने कहा कारगिल में आतंकवाद और आईएलएंडएफएस की वित्तीय समस्याएं इस परियोजना में देरी होने के प्रमुख कारण हैं.

हालांकि उन्होंने कहा कि परियोजना पर लगभग 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था.

जम्मू-कश्मीर के गांदरबल ज़िले में गगनगिर के पास 6.5 किमी सुरंग का निर्माण किया जा रहा है. सोनमर्ग और गगनगिर के बीच ज़ेड आकार के कारण इसको ज़ेड मोड़ सुरंग का नाम मिला.

आईएलएंडएफएस संकट

करीब तीन दशक पुरानी कर्ज़दाता कंपनी आईएलएंडएफएस का मुख्यालय मुंबई में है. यह देश के सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को विस्तार देने में आर्थिक मदद प्रदान करती है.

हालांकि आईएलएंडएफएस को सितंबर में वित्तीय क्षेत्र में संकट का सामना करना पड़ा, जब इसके कर्ज का भुगतान नहीं हो पाया था.

जल्द ही पता चला कि कंपनी पर 90,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज़ है. सरकार ने तबसे इस समूह को अपने नियंत्रण में कर लिया है. संकट को कम करने के लिए पुराने बोर्ड को खत्म करके नए बोर्ड का गठन किया गया है.

इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.


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